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हेल्थ अलर्ट: दुनिया में 12% कैंसर के मामलों की वजह इन्फेक्शन; पेट की आम समस्या से बढ़ रहा गैस्ट्रिक कैंसर का खतरा

हेल्थ अलर्ट: दुनिया में 12% कैंसर के मामलों की वजह इन्फेक्शन; पेट की आम समस्या से बढ़ रहा गैस्ट्रिक कैंसर का खतरा

कैंसर को आमतौर पर तंबाकू, शराब, मोटापा, प्रदूषण, बढ़ती उम्र और आनुवंशिक कारणों से जोड़ा जाता है। लेकिन एक नए वैश्विक अध्ययन ने कैंसर के एक अन्य महत्वपूर्ण जोखिम कारक की ओर ध्यान दिलाया है।The Lancet Oncology में प्रकाशित इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) के अध्ययन के मुताबिक, 2024 में दुनियाभर में करीब 23 लाख नए कैंसर मामले संक्रमण से जुड़े थे। यह उस साल सामने आए कुल नए कैंसर मामलों का लगभग 12%, यानी करीब हर 8 में से 1 मामला है।

अध्ययन में ऐसे संक्रमणों को शामिल किया गया है जिन्हें कैंसर पैदा करने वाले कारकों के तौर पर स्थापित किया जा चुका है। इनमें कुछ वायरस, बैक्टीरिया और परजीवी शामिल हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, अच्छी बात यह है कि संक्रमण से जुड़े कैंसर के कई मामलों को टीकाकरण, समय पर जांच, उचित इलाज और बेहतर रोकथाम के जरिए कम किया जा सकता है।

H. pylori सबसे ज्यादा मामलों से जुड़ा

अध्ययन के अनुसार, Helicobacter pylori (H. pylori) संक्रमण करीब 7.6 लाख कैंसर मामलों से जुड़ा था। यह बैक्टीरिया मुख्य रूप से पेट में संक्रमण करता है। लंबे समय तक बना रहने वाला H. pylori संक्रमण पेट के कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है।इसके बाद Human Papillomavirus (HPV) का स्थान रहा। HPV से करीब 7.5 लाख कैंसर मामले जुड़े पाए गए। यह वायरस सर्वाइकल कैंसर के अलावा कुछ अन्य जननांग और सिर-गले के कैंसर से भी संबंधित है।

Hepatitis B, EBV और Hepatitis C भी प्रमुख संक्रमण

अध्ययन में कुछ अन्य संक्रमण भी कैंसर के मामलों से जुड़े पाए गए। इनमें:

  • Hepatitis B virus: करीब 3.6 लाख मामले

  • Epstein-Barr virus (EBV): करीब 2.6 लाख मामले

  • Hepatitis C virus: करीब 1.6 लाख मामले

Hepatitis B और C संक्रमण मुख्य रूप से लिवर कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से जुड़े हैं।

हर संक्रमण कैंसर नहीं बनता

विशेषज्ञों के मुताबिक, इसका मतलब यह नहीं है कि हर संक्रमण से कैंसर हो जाएगा। कुछ संक्रमण अगर लंबे समय तक शरीर में बने रहते हैं, तो वे लगातार सूजन, कोशिकाओं में बदलाव और DNA को नुकसान जैसी प्रक्रियाओं से कैंसर का जोखिम बढ़ा सकते हैंयथार्थ अस्पताल, नई दिल्ली के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. राजीव कुमार के मुताबिक, संक्रमण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। HPV और Hepatitis B से बचाव के लिए उपलब्ध वैक्सीन महत्वपूर्ण हैं, जबकि H. pylori जैसे संक्रमण की पहचान होने पर समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार जरूरी है।

वैक्सीनेशन और समय पर जांच से कम हो सकता है खतरा

डॉक्टरों के अनुसार, HPV वैक्सीनेशन सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसी तरह Hepatitis B से बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध है।H. pylori संक्रमण की पहचान होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज किया जा सकता है। वहीं Hepatitis B और C की समय पर जांच और मेडिकल निगरानी लिवर से जुड़ी गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।

कम और मध्यम आय वाले देशों में ज्यादा चुनौती

IARC के मुताबिक, संक्रमण से जुड़े कैंसर का बोझ दुनिया के सभी हिस्सों में एक जैसा नहीं है। कम और मध्यम आय वाले देशों में ऐसे कैंसर का हिस्सा अधिक देखा जाता है। इन क्षेत्रों में वैक्सीनेशन, कैंसर स्क्रीनिंग, संक्रमण की जांच और इलाज तक पहुंच अभी भी बड़ी चुनौती है।

कैंसर से बचाव में सिर्फ तंबाकू-शराब पर फोकस काफी नहीं

अध्ययन का अहम संदेश यह है कि कैंसर की रोकथाम केवल तंबाकू और शराब जैसे जोखिम कारकों को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए।टीकाकरण, सुरक्षित स्वास्थ्य व्यवहार, समय पर स्क्रीनिंग और संक्रमण की पहचान व इलाज भी कैंसर की रोकथाम की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हालांकि, किसी संक्रमण या कैंसर के व्यक्तिगत जोखिम को समझने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

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