स्किन कैंसर के इलाज में बड़ी कामयाबी! पर्सनलाइज्ड mRNA वैक्सीन ने दोबारा बीमारी लौटने का खतरा होगा ना के बराबर
सर्जरी के बाद भी, कैंसर के दोबारा होने का खतरा बना रहता है – जो मेलेनोमा (एक तरह का स्किन कैंसर) के मामलों में आम बात है। हालांकि, मर्क (Merck) और मॉडर्ना (Moderna) द्वारा विकसित एक नई mRNA वैक्सीन थेरेपी, मेलेनोमा को दोबारा होने से रोकने में सफल साबित हुई है। यह स्किन कैंसर के इलाज में एक अहम कदम हो सकता है। यह थेरेपी दो चीज़ों को मिलाकर बनाई गई है: मॉडर्ना की पर्सनलाइज़्ड वैक्सीन (mRNA-4157/V940) और मर्क की दवा, कीट्रूडा (Keytruda)।
फेज़ 3 किसी भी दवा के लिए ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल का आखिरी और सबसे अहम चरण होता है, जिसके बाद रेगुलेटरी मंज़ूरी की प्रक्रिया शुरू होती है। आइए समझते हैं कि यह वैक्सीन थेरेपी कैसे काम करती है।
**यह वैक्सीन थेरेपी खास क्यों है?**
पारंपरिक वैक्सीन के उलट, यह mRNA पर आधारित एक पर्सनलाइज़्ड कैंसर थेरेपी है जिसे मरीज़ के खास ट्यूमर के हिसाब से तैयार किया जाता है। ट्रायल के दौरान, मरीज़ के ट्यूमर का विश्लेषण किया जाता है ताकि उसमें मौजूद जेनेटिक बदलावों – या म्यूटेशन – की पहचान की जा सके। फिर मरीज़ में पाए गए खास कैंसर म्यूटेशन के आधार पर एक अनोखी थेरेपी विकसित की जाती है। यह थेरेपी इम्यून सिस्टम को कैंसर सेल्स को पहचानने और खत्म करने के लिए एक्टिवेट करती है। यह उन हाई-रिस्क वाले मरीज़ों में कैंसर के दोबारा होने का खतरा कम करती है जिनकी पहले ही सर्जरी हो चुकी है।
**थेरेपी कैसे काम करती है**
आसान शब्दों में कहें तो, यह mRNA वैक्सीन थेरेपी इम्यून सिस्टम को कैंसर सेल्स को पहचानने के लिए तैयार करती है। यह T-सेल रिस्पॉन्स को मज़बूत करती है - जो कैंसर सेल्स को खत्म करता है - और बचे हुए कैंसर को दोबारा बढ़ने से रोकती है। फेज़ 3 INTerpath-001 ट्रायल में, इस थेरेपी ने स्टेज IIB-IV मेलेनोमा वाले मरीज़ों में कैंसर के दोबारा होने और आगे फैलने के खतरे को कम किया। ध्यान देने वाली बात यह है कि मरीज़ के ट्यूमर में म्यूटेशन का पैटर्न अलग-अलग हो सकता है। वैज्ञानिक mRNA वैक्सीन में ऐसे 34 म्यूटेशन को एनकोड करते हैं, जिसे खास तौर पर उस मरीज़ के लिए तैयार किया जाता है; इसलिए इसे पर्सनलाइज़्ड वैक्सीन थेरेपी कहा जाता है।
ट्रायल कैसे किया गया?
ट्रायल में हाई-रिस्क मेलेनोमा वाले 1,137 मरीज़ शामिल थे जिनकी ट्यूमर हटाने के लिए सर्जरी हो चुकी थी; इसमें स्टेज IIB से स्टेज IV तक के मरीज़ शामिल थे। मरीज़ों को दो ग्रुप में बांटा गया: एक को नई वैक्सीन थेरेपी दी गई, जबकि दूसरे को सिर्फ़ कीट्रूडा दिया गया।
ट्रायल में पाया गया कि हाई-रिस्क वाले मरीज़ों के लिए सिर्फ़ कीट्रूडा काफी नहीं था। इसमें कैंसर के दोबारा होने में लगने वाले समय पर भी नज़र रखी गई। कंपनियों का कहना है कि अकेले कीट्रूडा (Keytruda) के इस्तेमाल की तुलना में, अलग वैक्सीन और कीट्रूडा के कॉम्बिनेशन से बेहतर नतीजे मिले। गौरतलब है कि 2022 में दुनिया भर में मेलेनोमा के 3,30,000 से ज़्यादा नए मामले सामने आए, जिनमें से 1,12,000 मामले अकेले अमेरिका में थे।
विशेषज्ञों ने क्या कहा?
डॉ. कनिका सूद शर्मा (डायरेक्टर, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, धर्मशिला नारायणा हॉस्पिटल) का कहना है कि मेलेनोमा स्किन कैंसर का एक बहुत आक्रामक रूप है। उनका कहना है कि यह इलाज कैंसर के दोबारा होने के जोखिम को 50 प्रतिशत तक कम कर देता है। इस इलाज को लेने वाले दस में से कम से कम सात मरीज़ कैंसर-मुक्त रह सकते हैं, जो एक अहम आंकड़ा है। अगला कदम इन दवाओं के लिए रेगुलेटरी मंज़ूरी हासिल करना है, जिसके बाद ये कमर्शियली उपलब्ध हो जाएंगी।

