डायबिटीज मरीजों के लिए बड़ी खुशखबरी! ना सुई का दर्द, ना खून; सिर्फ 20 सेकंड बोलकर चलेगा शुगर का पता
डायबिटीज की जांच के लिए आमतौर पर ब्लड टेस्ट करवाना पड़ता है। इसके लिए मरीज के शरीर से खून का सैंपल लिया जाता है। कई लोगों को सुई लगने या खून निकलवाने से परेशानी होती है और इसी वजह से वे समय पर जांच कराने से बचते हैं। लेकिन अब वैज्ञानिक एक ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं, जिसमें सिर्फ आवाज के सैंपल के जरिए टाइप-2 डायबिटीज के खतरे की पहचान करने की कोशिश की गई है।
अभी कैसे होती है डायबिटीज की जांच?
डायबिटीज की पुष्टि के लिए आमतौर पर HbA1c, फास्टिंग ब्लड शुगर और ग्लूकोज टॉलरेंस जैसे ब्लड टेस्ट किए जाते हैं। HbA1c टेस्ट पिछले करीब 2 से 3 महीनों के औसत ब्लड शुगर लेवल की जानकारी देता है। वहीं फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट में खाली पेट ग्लूकोज का स्तर जांचा जाता है।
ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट में शरीर खाने के बाद ग्लूकोज को किस तरह प्रोसेस करता है, इसकी जांच की जाती है। इन पारंपरिक जांचों में ब्लड सैंपल की जरूरत पड़ती है।
AI आवाज से कैसे लगाएगा डायबिटीज का अंदाजा?
रिपोर्ट के मुताबिक, Thymia टेक्नोलॉजी फर्म के इंजीनियरों ने मेलबर्न की RMIT यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर एक AI आधारित स्पीच स्क्रीनिंग मॉडल विकसित किया है। यह सिस्टम आवाज में आने वाले कुछ बदलावों का विश्लेषण करता है, जिन्हें टाइप-2 डायबिटीज से जुड़े जोखिम के साथ जोड़ा गया है।
इस मॉडल को तैयार करने के लिए यूके और अमेरिका के 21 हजार से ज्यादा लोगों की 63 हजार से अधिक वॉइस रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद करीब 20 सेकंड की ऑडियो क्लिप के आधार पर मॉडल की क्षमता का परीक्षण किया गया। प्रतिभागियों से बोलने और पढ़ने के दौरान आवाज के सैंपल लिए गए।
स्टडी में क्या सामने आया?
रिपोर्ट के अनुसार, यूके के 7 हजार से ज्यादा प्रतिभागियों पर किए गए परीक्षण में AI मॉडल ने उन लोगों को ज्यादा रिस्क स्कोर दिया, जिनके बारे में स्टडी में टाइप-2 डायबिटीज का संकेत मिला था। रिपोर्ट में यह आंकड़ा करीब 80 प्रतिशत मामलों का बताया गया है।
इसके अलावा 801 लोगों के एक छोटे समूह का अलग विश्लेषण किया गया। इन लोगों ने आवाज की रिकॉर्डिंग देने के करीब तीन महीने के अंदर घर पर ब्लड टेस्ट भी कराया था। इस विश्लेषण में एल्गोरिदम ने करीब 75 प्रतिशत मामलों में ज्यादा जोखिम वाला स्कोर दिया।
क्या अब ब्लड टेस्ट की जरूरत नहीं पड़ेगी?
अभी ऐसा कहना सही नहीं होगा। यह तकनीक फिलहाल डायबिटीज की पुष्टि करने वाले पारंपरिक ब्लड टेस्ट का विकल्प नहीं है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से शुरुआती स्क्रीनिंग या जोखिम का अंदाजा लगाने के लिए किया जा सकता है।अगर भविष्य में इस तरह के AI मॉडल बड़े स्तर पर और अधिक सटीक साबित होते हैं, तो फोन या ऐप के जरिए लोगों की आवाज रिकॉर्ड करके उन लोगों की पहचान करने में मदद मिल सकती है, जिन्हें आगे डायबिटीज की जांच करवाने की जरूरत है।
रिसर्चर्स को क्यों दिख रही है उम्मीद?
Thymia की रिसर्च साइंटिस्ट Giedre Cepukaityte के मुताबिक, यह टाइप-2 डायबिटीज के लिए स्पीच-बेस्ड स्क्रीनिंग पर की गई बड़ी रियल-वर्ल्ड स्टडीज में से एक है। रिसर्च में AI मॉडल के अनुमान की तुलना ब्लड टेस्ट और प्रतिभागियों की डायबिटीज संबंधी जानकारी से की गई।
इस तरह की तकनीक का संभावित फायदा यह हो सकता है कि जिन लोग नियमित हेल्थ चेकअप नहीं करवाते, उन्हें शुरुआती स्तर पर जोखिम के बारे में जानकारी मिल सके। हालांकि, किसी व्यक्ति को डायबिटीज है या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए फिलहाल डॉक्टर की सलाह और मान्य मेडिकल टेस्ट जरूरी हैं।

