Samachar Nama
×

Fake Rabies Vaccine Alert: दिल्ली में नकली 'Abhayrab' वैक्सीन का खुलासा, जानलेवा रेबीज के नाम पर कैसे चल रहा था फर्जीवाड़े का खेल?
 

Fake Rabies Vaccine Alert: दिल्ली में नकली 'Abhayrab' वैक्सीन का खुलासा, जानलेवा रेबीज के नाम पर कैसे चल रहा था फर्जीवाड़े का खेल?


भारत में नकली दवाओं का कारोबार अब सिर्फ सामान्य दवाओं तक सीमित नहीं रह गया है. जांच एजेंसियों के सामने आए एक मामले ने स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस बार निशाने पर रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी से बचाने वाली वैक्सीन रही. दिल्ली में कथित तौर पर नकली 'अभयरेब' (Abhayrab) वैक्सीन मिलने के बाद दवा आपूर्ति श्रृंखला और मरीजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.

रेबीज एक ऐसी बीमारी है, जिसके लक्षण सामने आने के बाद बचने की संभावना बेहद कम मानी जाती है. ऐसे में जानवर के काटने के बाद लगाई जाने वाली वैक्सीन का नकली होना मरीज के लिए गंभीर खतरा बन सकता है. जांच में सामने आया कि संदिग्ध शीशियों पर असली कंपनी का नाम और बैच नंबर इस्तेमाल किया गया था, लेकिन गुणवत्ता परीक्षण में सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे.

दिल्ली में कैसे सामने आया नकली वैक्सीन का मामला?
मामले का खुलासा 22 अप्रैल 2026 को दिल्ली में हुई कार्रवाई के बाद हुआ. पुलिस की क्राइम ब्रांच और ड्रग्स कंट्रोल विभाग ने मुखर्जी नगर इलाके में एक कथित अवैध ठिकाने पर छापेमारी की. कार्रवाई के दौरान रेबीज वैक्सीन 'अभयरेब' के नाम से पैक कई संदिग्ध शीशियां बरामद की गईं.

बताया गया कि इन शीशियों पर बैच नंबर KE25012 दर्ज था. मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया और जब्त सैंपल को गुणवत्ता जांच के लिए भेजा गया.
लैब टेस्ट में फेल हुए संदिग्ध सैंपल
बरामद वैक्सीन के नमूनों की जांच कसौली स्थित केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला में कराई गई. जांच में सैंपल पोटेंसी टेस्ट में मानकों पर खरे नहीं उतरे. रिपोर्ट के बाद इन्हें मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं और गलत लेबलिंग वाला बताया गया.
जांच के दौरान पैकेजिंग और लेबलिंग में भी कई अंतर सामने आए. संदिग्ध शीशियों के आर्टवर्क, QR कोड, ढक्कन के रंग और अन्य विवरणों में कथित तौर पर असली उत्पाद से भिन्नताएं मिलीं.

क्या असली कंपनी का बैच भी संदिग्ध था?
वैक्सीन निर्माता इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड (IIL) ने जब्त की गई संदिग्ध शीशियों के निर्माण से इनकार किया. कंपनी के अनुसार, KE25012 नाम का असली बैच अधिकृत गुणवत्ता प्रक्रियाओं के बाद वितरण नेटवर्क में भेजा गया था.

जांच एजेंसियों के सामने यह आशंका उभरी कि कथित जालसाजों ने असली बैच नंबर का इस्तेमाल कर नकली उत्पाद तैयार किया. यानी मामला असली वैक्सीन की गुणवत्ता खराब होने का नहीं, बल्कि ब्रांड और बैच विवरण का गलत इस्तेमाल कर फर्जी उत्पाद बाजार में पहुंचाने का हो सकता है.

विदेशों तक पहुंच चुकी थी नकली वैक्सीन की चिंता
नकली अभयरेब वैक्सीन से जुड़ी चिंताएं भारत तक सीमित नहीं रहीं. पहले भी विदेशों में भारत में लगाए गए कुछ संदिग्ध बैचों को लेकर अलर्ट जारी किया जा चुका है.
ऑस्ट्रेलिया में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक कथित फर्जी बैच को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी थी. भारत में भी इससे पहले संदिग्ध रेबीज वैक्सीन डोज को लेकर ड्रग्स कंट्रोल विभाग की ओर से एडवाइजरी जारी की जा चुकी है.


नकली रेबीज वैक्सीन क्यों है बेहद खतरनाक?
रेबीज को दुनिया की सबसे खतरनाक संक्रामक बीमारियों में गिना जाता है. जानवर के काटने के बाद समय पर सही उपचार न मिलने पर संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है.
सबसे बड़ा खतरा नकली वैक्सीन से मिलने वाला झूठा सुरक्षा का भरोसा है. मरीज को लग सकता है कि उसने वैक्सीन लगवा ली है और अब वह सुरक्षित है. लेकिन यदि वैक्सीन में जरूरी सक्रिय तत्व या पर्याप्त क्षमता नहीं है, तो शरीर में अपेक्षित प्रतिरक्षा विकसित नहीं हो सकती.
यही वजह है कि रेबीज के मामलों में सिर्फ वैक्सीन लगवाना ही नहीं, बल्कि सही समय पर पूरा चिकित्सा प्रोटोकॉल अपनाना भी जरूरी होता है.
सिर्फ वैक्सीन नहीं, पूरा इलाज प्रोटोकॉल जरूरी

रेबीज से बचाव के लिए विशेषज्ञ घाव की तत्काल सफाई को बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं. जानवर के काटने के बाद घाव को अच्छी तरह धोना, डॉक्टर की सलाह के अनुसार वैक्सीन की सभी डोज समय पर लेना और गंभीर मामलों में जरूरी अतिरिक्त उपचार कराना महत्वपूर्ण होता है.
कुछ मामलों में वैक्सीन लेने के बावजूद संक्रमण के गंभीर परिणाम सामने आए हैं. विशेषज्ञों की जांच में यह पाया गया कि कई मामलों में इलाज की प्रक्रिया में देरी या प्रोटोकॉल का सही तरीके से पालन न करना बड़ी वजह रहा.
इसलिए किसी भी संदिग्ध स्थिति में खुद से इलाज करने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है.

नकली दवाओं का कारोबार कैसे फैलता है?
नकली दवाओं के कारोबार में अब जालसाज आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल कर रहे हैं. असली जैसी पैकेजिंग, फर्जी QR कोड, होलोग्राम और बैच नंबर के जरिए उत्पादों को असली दिखाने की कोशिश की जाती है.

जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि नकली उत्पादों को कई बार इतनी पेशेवर तरीके से तैयार किया जाता है कि सामान्य उपभोक्ता के लिए असली और नकली में अंतर करना मुश्किल हो जाता है.

भारी डिस्काउंट और कम कीमत का लालच देकर भी संदिग्ध दवाओं को सप्लाई चेन में शामिल करने की कोशिश की जा सकती है. यही कारण है कि दवा खरीदते समय केवल अधिकृत मेडिकल स्टोर और विश्वसनीय अस्पतालों का चयन करना महत्वपूर्ण है.
आम लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

वैक्सीन या जीवनरक्षक दवा लेते समय मरीज और उनके परिवार कुछ जरूरी सावधानियां अपना सकते हैं—
•    वैक्सीन केवल अधिकृत अस्पताल या विश्वसनीय मेडिकल स्टोर से लें.
•    पैकेजिंग और बैच विवरण को ध्यान से जांचें.
•    असामान्य रूप से कम कीमत या भारी डिस्काउंट वाली दवाओं से सतर्क रहें.
•    वैक्सीन लगाने का रिकॉर्ड और बिल सुरक्षित रखें.
•    किसी दवा की गुणवत्ता या पैकेजिंग पर संदेह होने पर तुरंत संबंधित अस्पताल या ड्रग्स कंट्रोल विभाग को जानकारी दें.
•    रेबीज एक्सपोजर की स्थिति में देरी किए बिना डॉक्टर से संपर्क करें.
स्वास्थ्य सुरक्षा पर बड़ा सवाल
नकली रेबीज वैक्सीन का मामला सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है. जीवनरक्षक दवाओं और वैक्सीन की सप्लाई चेन में जालसाजी मरीजों की जान को सीधे खतरे में डाल सकती है.

ऐसे मामलों ने एक बार फिर दवा निर्माण से लेकर वितरण और अंतिम बिक्री तक पूरी सप्लाई चेन की मजबूत निगरानी की जरूरत को सामने रखा है. विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक ट्रैक-एंड-ट्रेस सिस्टम, सख्त जांच और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के जरिए ही नकली दवाओं के नेटवर्क पर अंकुश लगाया जा सकता है.

नोट: रेबीज या किसी जानवर के काटने की स्थिति में घरेलू उपचार पर निर्भर न रहें. तुरंत डॉक्टर या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क कर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार पूरा उपचार कराएं.
 

Share this story

Tags