क्या आपका बच्चा भी टीवी-मोबाइल देखते हुए ज्यादा खाता है? एक्सपर्ट से जानें इस 'माइंडलेस ईटिंग' का सच
आज के समय में बच्चों को खाना खिलाते वक्त मोबाइल, टीवी या टैबलेट चलाना कई घरों में आम बात हो गई है। बच्चा खाना खाने में आनाकानी करे तो उसे कार्टून या वीडियो दिखाकर खाना खिलाना आसान लगता है। लेकिन लंबे समय में यह आदत बच्चे के खाने के व्यवहार पर असर डाल सकती है।
रिसर्च में स्क्रीन के सामने खाना खाने और बच्चों के ज्यादा कैलोरी लेने, ज्यादा एनर्जी वाले स्नैक्स खाने तथा खाने की मात्रा पर ध्यान कम रहने के बीच संबंध पाया गया है। स्क्रीन पर ध्यान होने की वजह से बच्चे अपने शरीर के भूख और पेट भरने के संकेतों को कम महसूस कर सकते हैं।
मोबाइल देखते हुए बच्चा ज्यादा क्यों खा सकता है?
जब बच्चा कार्टून, गेम या वीडियो में पूरी तरह व्यस्त होता है, तो उसका ध्यान खाने से हटकर स्क्रीन पर चला जाता है। ऐसे में उसे यह पता लगाने में मुश्किल हो सकती है कि उसने कितना खाना खा लिया है और उसका पेट कब भर गया।
इसे आम तौर पर Distracted या Mindless Eating से जोड़कर देखा जाता है। यानी बच्चा खाने पर ध्यान देने के बजाय किसी दूसरी गतिविधि में व्यस्त रहते हुए खाता रहता है।
American Academy of Pediatrics की समीक्षा में भी पाया गया है कि स्क्रीन के दौरान खाना बच्चों में ऊर्जा की खपत बढ़ाने वाले कारणों में से एक हो सकता है।
सबसे ज्यादा परेशानी स्नैकिंग में हो सकती है
मोबाइल या टीवी देखते समय बच्चों के हाथ में अक्सर चिप्स, बिस्किट, नमकीन, चॉकलेट या मीठे पेय जैसी चीजें होती हैं। स्क्रीन पर ध्यान होने की वजह से बच्चा यह कम ध्यान दे सकता है कि उसने कितनी मात्रा में स्नैक खा लिया।
इसके अलावा टीवी और दूसरे डिजिटल कंटेंट में दिखने वाले खाने-पीने के विज्ञापन भी बच्चों की फूड पसंद और खाने के व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं।
परिवार के साथ खाना क्यों जरूरी है?
अगर बच्चा हर बार मोबाइल या टीवी देखते हुए खाना खाता है, तो परिवार के साथ बैठकर भोजन करने और खाने पर ध्यान देने की आदत कम हो सकती है।
बिना स्क्रीन के परिवार के साथ खाना बच्चे को भोजन का स्वाद, मात्रा और भूख-पेट भरने के संकेतों पर ध्यान देना सीखने में मदद कर सकता है। AAP भी भोजन के दौरान स्क्रीन को कम करने और घर में कुछ जगहों को screen-free zone रखने की सलाह देता है।
माता-पिता क्या कर सकते हैं?
बच्चे को खाना खिलाते समय शुरुआत से ही एक छोटा-सा नियम बनाया जा सकता है कि खाने की टेबल पर मोबाइल और टीवी नहीं चलेगा।
बच्चे को एक निश्चित जगह पर बैठाकर खाना खिलाएं और स्नैक्स की मात्रा पहले से तय करें। चिप्स, बिस्किट और ज्यादा प्रोसेस्ड स्नैक्स की जगह फल, दही, दूध, नट्स और दूसरे पौष्टिक विकल्प दिए जा सकते हैं।
साथ ही माता-पिता खुद भी भोजन के समय फोन से दूरी बनाएं, क्योंकि बच्चे अक्सर घर के बड़ों की आदतों को देखकर सीखते हैं।
क्या स्क्रीन टाइम पूरी तरह बंद करना जरूरी है?
जरूरी नहीं कि हर तरह का स्क्रीन इस्तेमाल बंद कर दिया जाए। ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि बच्चे के लिए उम्र के हिसाब से संतुलित स्क्रीन रूटीन बनाया जाए और खासकर खाने के समय स्क्रीन से दूरी रखी जाए।
क्योंकि समस्या सिर्फ मोबाइल देखने की नहीं है, बल्कि स्क्रीन के कारण भोजन, नींद, शारीरिक गतिविधि और खानपान की आदतों में होने वाले बदलाव भी महत्वपूर्ण हैं।
इसलिए अगली बार बच्चे को खाना खिलाने के लिए मोबाइल हाथ में देने से पहले एक बार सोचिए—क्या बच्चा सच में खाना सीख रहा है या सिर्फ स्क्रीन देखते-देखते खाना खा रहा है?

