Samachar Nama
×

पटाखों से जलने की घटनाओं के लिए पीजीआई तैयार, प्रो. अतुल पाराशर बोले- उपचार से बेहतर है बचाव

चंडीगढ़, 7 नवंबर (आईएएनएस)। पीजीआई के सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. अतुल पाराशर ने कहा कि दीपावली के दौरान जलने की घटनाओं के इलाज के लिए अस्पताल पूरी तरह तैयार है। बेड, चिकित्सा स्टाफ और ड्रेसिंग सामग्री चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेगी। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे फिटेड सूती कपड़े पहनें, पटाखों को हाथ में पकड़कर न जलाएं, आग लगने की स्थिति में स्टॉप-ड्रॉप-रोल का पालन करें और तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

चंडीगढ़, 7 नवंबर (आईएएनएस)। पीजीआई के सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. अतुल पाराशर ने कहा कि दीपावली के दौरान जलने की घटनाओं के इलाज के लिए अस्पताल पूरी तरह तैयार है। बेड, चिकित्सा स्टाफ और ड्रेसिंग सामग्री चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेगी। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे फिटेड सूती कपड़े पहनें, पटाखों को हाथ में पकड़कर न जलाएं, आग लगने की स्थिति में स्टॉप-ड्रॉप-रोल का पालन करें और तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

पीजीआई सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. अतुल पाराशर ने कहा, "जैसा कि दीपावली पर अक्सर देखा जाता है, काफी लोग जलने की चोट के बाद हमारे पास आते हैं। इसके लिए हम पूरी तरह से तैयार हैं। हमने पर्याप्त बेड आरक्षित रखे हुए हैं, ताकि यदि कोई ऐसा मरीज आता है, तो उसका उचित इलाज किया जा सके। हमारे डॉक्टरों की टीम भी 24×7 उपलब्ध है, जो इस तरह की चोटों के उपचार के लिए तैयार रहती है।"

लोगों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि इसके अलावा, ड्रेसिंग सामग्री जैसी आवश्यक चिकित्सा व्यवस्था भी हमारे यहां पूरी तरह उपलब्ध है। लेकिन मेरा आग्रह आपके दर्शकों से है कि वे कुछ सावधानियां अवश्य बरतें, ताकि जलने की घटनाएं हों ही नहीं। खुशियों का त्योहार खुशियों के साथ ही मनाया जाए।

प्रो. पाराशर ने कहा कि प्लास्टिक सर्जरी विभाग की ओर से मेरी सलाह है कि जब हम घर में मोमबत्तियां, दीये या पटाखे जलाते हैं, तो उस समय सूती (कॉटन) और शरीर से फिट रहने वाले कपड़े पहनें। ढीले कपड़ों, विशेषकर पारंपरिक परिधानों में लंबी चुन्नी या दुपट्टे जैसी चीज़ों से बचें। ऐसे कपड़ों में आग लगने की संभावना अनजाने में अधिक रहती है।

उन्होंने कहा कि यदि गलती से कोई व्यक्ति जल जाता है, तो प्रभावित हिस्से को तुरंत बहते हुए साफ पानी के नीचे रखें। उसे तब तक पानी के नीचे रखें, जब तक जलन कम न हो जाए। इस साधारण उपाय से जलने की गंभीरता सीमित हो जाती है, उपचार आसान हो जाता है और बाद में निशान पड़ने की संभावना भी कम हो जाती है।

प्रो. अतुल पाराशर ने कहा कि अक्सर देखा गया है कि कम उम्र के बच्चों और विशेष रूप से किशोरों में पटाखों को लेकर काफी उत्साह रहता है। वे कई बार हाथ में पकड़कर पटाखे जलाने की कोशिश करते हैं। मैं इस आदत को दृढ़ता से हतोत्साहित करना चाहूँगा। यह कोई बहादुरी या आकर्षक दिखने का तरीका नहीं है।

उन्होंने कहा कि इससे ऐसी गंभीर चोटें हो सकती हैं, जिनमें दो, तीन या चार सर्जरी के बाद भी हाथ की पूरी कार्यक्षमता वापस नहीं आ पाती। चूंकि यह उम्र पढ़ाई और भविष्य के निर्माण की होती है, इसलिए ऐसी चोटें जीवन पर बड़ा असर डाल सकती हैं।

प्रो. पाराशर ने कहा कि इसके अलावा, यदि गलती से कपड़ों में आग लग जाए, तो घबराएं नहीं। तुरंत रुक जाएं और इधर-उधर भागें नहीं। भागने से ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है और आग तेजी से फैल सकती है। ऐसे में "स्टॉप, ड्रॉप एंड रोल" का सिद्धांत अपनाएं। यानी रुक जाएं, जमीन पर बैठ या लेट जाएं और लुढ़कने की कोशिश करें। हमारा उद्देश्य यह होना चाहिए कि कपड़ों में लगी आग फैले नहीं और चेहरे तक न पहुंचे।

उन्होंने कहा कि यदि आसपास कंबल या कोई मोटी चादर उपलब्ध हो, तो उससे शरीर को ढक दें, ताकि ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो और आग जल्दी बुझ सके। एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि कई बार पटाखा जलाने के बाद वह तुरंत नहीं फूटता। ऐसे में लोग उसे जांचने के लिए उसके पास चले जाते हैं। इसी दौरान वह अचानक फूट सकता है और हाथ, चेहरे या आंखों में गंभीर चोट पहुंचा सकता है। इसलिए यदि कोई पटाखा नहीं फूटता है, तो उसे वहीं छोड़ दें और उसके पास दोबारा न जाएं।

प्रो. पाराशर ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में हाथ, चेहरा और आंखें सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। यदि किसी कारणवश पटाखा फटने से आंख में चोट लग जाए या जलन महसूस हो, तो आंखों को बिल्कुल न मलें। तुरंत किसी नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें या पीजीआई जैसे अस्पताल में जाकर जांच कराएं।

उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते कि खुशियों के इस पर्व पर लोग अस्पतालों के चक्कर लगाएं। इसलिए मेरा सभी दर्शकों से आग्रह है कि 'उपचार से बेहतर बचाव' के सिद्धांत को अपनाएं। फिर भी यदि किसी प्रकार की चोट हो जाती है, तो हमारा विभाग और पीजीआई पूरी तरह से तैयार है और सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।

--आईएएनएस

केके/एएस

Share this story

Tags