डॉक्टर की पर्ची के बिना मैग्नीशियम सप्लीमेंट लेना खतरनाक: जानें ओवरडोज शरीर को कैसे पहुंचाता है नुकसान
मैग्नीशियम शरीर के लिए बेहद जरूरी मिनरल है। यह मांसपेशियों और नसों को सही तरीके से काम करने, हड्डियों को मजबूत बनाए रखने, शरीर में ऊर्जा बनाने और दिल की सामान्य धड़कन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को मैग्नीशियम की गोलियां या सप्लीमेंट लेने चाहिए।आजकल थकान, मांसपेशियों में ऐंठन, नींद की परेशानी और तनाव जैसी समस्याओं के लिए कई लोग खुद ही मैग्नीशियम सप्लीमेंट लेना शुरू कर देते हैं। परेशानी यह है कि इन लक्षणों के पीछे कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं। बिना जांच के इन्हें मैग्नीशियम की कमी मान लेना सही नहीं है। जरूरत से ज्यादा सप्लीमेंट लेने पर दस्त, पेट में ऐंठन और गंभीर मामलों में ब्लड प्रेशर गिरने या दिल की धड़कन प्रभावित होने का खतरा हो सकता है।
मैग्नीशियम की कमी के डर से खुद दवा क्यों लेने लगते हैं लोग?
सोशल मीडिया और इंटरनेट पर अक्सर बताया जाता है कि मैग्नीशियम की कमी से थकान, कमजोरी, मांसपेशियों में खिंचाव और नींद से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसी जानकारी पढ़कर लोग अपने लक्षणों को मैग्नीशियम की कमी से जोड़ने लगते हैं और बिना डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट खरीद लेते हैं।
हालांकि, इन लक्षणों की वजह पोषण की कमी, पानी की कमी, कुछ दवाएं, नींद की समस्या या दूसरी स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां भी हो सकती हैं।
मैग्नीशियम की कमी के संभावित कारणों में लंबे समय तक दस्त रहना, पोषक तत्वों का ठीक से अवशोषित न होना, अत्यधिक शराब का सेवन और कुछ दवाओं का इस्तेमाल शामिल हैं। टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों में भी इसका जोखिम बढ़ सकता है।
इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर सप्लीमेंट शुरू करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर मेडिकल हिस्ट्री, खानपान और जांच के आधार पर उचित निर्णय ले सकते हैं।
ज्यादा मैग्नीशियम लेने से पेट पर क्या असर पड़ता है?
मैग्नीशियम सप्लीमेंट की अधिक मात्रा लेने पर दस्त, मतली और पेट में ऐंठन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। मैग्नीशियम के कुछ यौगिक आंतों में पानी खींचते हैं, जिससे मल पतला हो सकता है और बार-बार शौच जाने की परेशानी हो सकती है।
यही कारण है कि मैग्नीशियम के कुछ प्रकारों का इस्तेमाल कब्ज दूर करने वाली दवाओं में भी किया जाता है।
अगर सप्लीमेंट लेने के बाद लगातार दस्त या पेट दर्द हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। गंभीर या लंबे समय तक बने रहने वाले दस्त से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करें।
ध्यान रखें कि पेट में परेशानी होने का मतलब हमेशा गंभीर ओवरडोज नहीं होता। जोखिम इस बात पर भी निर्भर करता है कि कितनी मात्रा ली गई है, मैग्नीशियम का कौन-सा प्रकार इस्तेमाल किया गया है और व्यक्ति की किडनी कितनी अच्छी तरह काम कर रही है।
किडनी के मरीजों के लिए क्यों बढ़ सकता है खतरा?
किडनी शरीर में मैग्नीशियम का संतुलन बनाए रखने और अतिरिक्त मात्रा को पेशाब के जरिए बाहर निकालने में मदद करती है। लेकिन किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर शरीर में मैग्नीशियम जमा होने का खतरा बढ़ सकता है।
क्रोनिक किडनी डिजीज या किडनी फेलियर से जूझ रहे लोगों में मैग्नीशियम सप्लीमेंट या मैग्नीशियम युक्त कुछ दवाओं का इस्तेमाल बिना चिकित्सकीय सलाह के नुकसानदायक हो सकता है।
शरीर में मैग्नीशियम का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ने पर कमजोरी, अत्यधिक सुस्ती, ब्लड प्रेशर कम होना और गंभीर मामलों में सांस लेने या दिल की धड़कन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
किडनी की बीमारी वाले लोगों को मैग्नीशियम सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। उन्हें एसिडिटी, कब्ज या अन्य समस्याओं के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं की जानकारी भी डॉक्टर को देनी चाहिए, क्योंकि कुछ दवाओं में मैग्नीशियम मौजूद हो सकता है।
रोजाना कितने मैग्नीशियम की जरूरत होती है?
मैग्नीशियम की दैनिक जरूरत उम्र, लिंग और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के अनुसार, सामान्य वयस्कों के लिए प्रतिदिन इसकी जरूरत लगभग इतनी होती है:
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वयस्क पुरुष: 400–420 मिलीग्राम
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वयस्क महिलाएं: 310–320 मिलीग्राम
ये मात्रा भोजन सहित पूरे दिन में मिलने वाले मैग्नीशियम की जरूरत बताती हैं।
वहीं, वयस्कों के लिए प्रतिदिन 350 मिलीग्राम की निर्धारित ऊपरी सीमा केवल सप्लीमेंट और मैग्नीशियम युक्त दवाओं से मिलने वाले मैग्नीशियम पर लागू होती है। भोजन से प्राकृतिक रूप से मिलने वाला मैग्नीशियम इस सीमा में शामिल नहीं है। यह सामान्य स्वस्थ वयस्कों के लिए तय सीमा है, न कि हर व्यक्ति के इलाज की खुराक।
डॉक्टर किसी खास स्वास्थ्य समस्या में निगरानी के साथ अलग मात्रा की सलाह दे सकते हैं। इसलिए खुद से अधिक खुराक लेना उचित नहीं है।
इन खाद्य पदार्थों से भी मिल सकता है मैग्नीशियम
मैग्नीशियम की जरूरत पूरी करने के लिए रोजमर्रा के खानपान में कुछ पौष्टिक चीजें शामिल की जा सकती हैं:
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कद्दू के बीज और दूसरे बीज
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बादाम और मूंगफली
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दालें और फलियां
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साबुत अनाज
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पालक जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां
संतुलित आहार से शरीर को मैग्नीशियम के साथ अन्य जरूरी पोषक तत्व भी मिलते हैं। स्वस्थ लोगों में भोजन से मिलने वाला मैग्नीशियम आमतौर पर सुरक्षित होता है।
दूसरी दवाओं के साथ भी बरतें सावधानी
मैग्नीशियम सप्लीमेंट कुछ एंटीबायोटिक्स और दूसरी दवाओं के अवशोषण को प्रभावित कर सकता है। इससे दवाओं का असर बदल सकता है। इसलिए यदि आप नियमित रूप से कोई दवा लेते हैं, तो मैग्नीशियम सप्लीमेंट शुरू करने से पहले डॉक्टर या फार्मासिस्ट से पूछें।

