हार्ट अटैक के बाद तुरंत चेक करें विटामिन-D का लेवल! जानिए सप्लीमेंट लेने से सच में फायदा होता है या नहीं
हार्ट अटैक आने के बाद मरीजों को अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। एक बार दिल का दौरा पड़ने के बाद दोबारा ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए डॉक्टर दवाओं के साथ खानपान, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने की सलाह देते हैं। इस बीच विटामिन D सप्लीमेंट को लेकर भी वैज्ञानिकों की दिलचस्पी बढ़ी है। कुछ शोध में संकेत मिले हैं कि विटामिन D लेने से दोबारा हार्ट अटैक का जोखिम कम हो सकता है। हालांकि, अभी इस दावे की पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई है।
साल 2026 में प्रकाशित TARGET-D Trial में खासतौर पर उन लोगों पर अध्ययन किया गया, जिन्हें पहले हार्ट अटैक आ चुका था। रिसर्च में विटामिन D के स्तर के आधार पर मरीजों को सप्लीमेंट देने के प्रभाव का आकलन किया गया। इसके नतीजों में विटामिन D लेने वाले समूह में दोबारा हार्ट अटैक के मामले कम दिखाई दिए। हालांकि, अध्ययन के मुख्य संयुक्त परिणाम में महत्वपूर्ण लाभ साबित नहीं हुआ। ऐसे में इसे दूसरे हार्ट अटैक से बचाव का पक्का तरीका मानना अभी जल्दबाजी होगी।
विटामिन D और दिल की सेहत के बीच क्या है संबंध?
आमतौर पर विटामिन D को हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत रखने वाले पोषक तत्व के रूप में जाना जाता है। लेकिन शरीर में इसकी भूमिका सिर्फ इतनी ही नहीं है। यह कैल्शियम के अवशोषण और शरीर की कई महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रियाओं में भी योगदान देता है।वैज्ञानिक अध्ययनों में कम विटामिन D स्तर और हृदय संबंधी बीमारियों के बीच संबंध देखा गया है। यही वजह है कि हार्ट अटैक के बाद मरीजों में इसकी भूमिका को समझने के लिए शोध किए जा रहे हैं।हालांकि, यह समझना जरूरी है कि विटामिन D की कमी और हार्ट डिजीज के बीच संबंध मिलने का मतलब यह नहीं है कि सप्लीमेंट लेने से दिल की बीमारी को रोका जा सकता है। इसके लिए नियंत्रित क्लिनिकल ट्रायल के नतीजे ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं।
क्या विटामिन D सप्लीमेंट लेने से कम हो सकता है हार्ट अटैक का खतरा?
इस सवाल का जवाब जानने के लिए वैज्ञानिकों ने कई शोध किए हैं। कुछ ऑब्जर्वेशनल स्टडी में पाया गया कि जिन लोगों के शरीर में विटामिन D का स्तर कम था, उनमें हृदय रोगों का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक था।
लेकिन इन नतीजों से यह साबित नहीं होता कि विटामिन D की कमी ही हार्ट डिजीज की वजह है। इसके पीछे दूसरी वजहें भी हो सकती हैं। उदाहरण के तौर पर कम धूप में निकलना, शारीरिक गतिविधियों की कमी, खराब खानपान और पहले से मौजूद बीमारियां विटामिन D के स्तर के साथ-साथ दिल की सेहत को भी प्रभावित कर सकती हैं।
2019 में प्रकाशित एक बड़े विश्लेषण में 21 रैंडमाइज्ड क्लिनिकल ट्रायल के 83 हजार से अधिक लोगों के आंकड़ों का अध्ययन किया गया था। इसमें पाया गया कि विटामिन D सप्लीमेंट लेने से हार्ट अटैक, स्ट्रोक या हृदय रोग से होने वाली मौत के जोखिम में स्पष्ट कमी नहीं आई।
2026 की नई रिसर्च में क्या सामने आया?
यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित 2026 के TARGET-D Trial में उन मरीजों को शामिल किया गया, जिन्हें पहले हार्ट अटैक हो चुका था। इस अध्ययन में कुल 630 मरीजों पर विटामिन D सप्लीमेंट के प्रभाव का मूल्यांकन किया गया।
इस रिसर्च में मरीजों के विटामिन D स्तर की जांच की गई और उसी के आधार पर सप्लीमेंट की खुराक को समायोजित किया गया।
अध्ययन के नतीजों के मुताबिक:
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विटामिन D सप्लीमेंट लेने वाले समूह में दोबारा हार्ट अटैक की दर 3.8 प्रतिशत रही।
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सामान्य देखभाल वाले समूह में दोबारा हार्ट अटैक की दर 7.9 प्रतिशत दर्ज की गई।
इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि विटामिन D का सेवन कुछ मरीजों में दोबारा हार्ट अटैक का जोखिम कम करने में मददगार हो सकता है।
हालांकि, अध्ययन का मुख्य संयुक्त परिणाम, जिसमें हार्ट अटैक, मौत, हार्ट फेलियर और स्ट्रोक जैसी घटनाएं शामिल थीं, उसमें महत्वपूर्ण कमी साबित नहीं हुई। इसके अलावा, अध्ययन में मरीजों की संख्या भी सीमित थी। इसलिए इन नतीजों की पुष्टि के लिए बड़े स्तर पर और रिसर्च की जरूरत है।
दूसरे हार्ट अटैक से बचने के लिए किन बातों का रखें ध्यान?
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, हार्ट अटैक के बाद दोबारा दिल का दौरा पड़ने का खतरा कम करने के लिए नियमित इलाज और जीवनशैली में सुधार बेहद जरूरी है।
मरीजों को इन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
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दवाएं नियमित लें: डॉक्टर ने जो दवाएं निर्धारित की हैं, उन्हें अपनी मर्जी से बंद न करें और समय पर लेते रहें।
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ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखें: हाई ब्लड प्रेशर दिल पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। इसलिए नियमित जांच जरूरी है।
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कोलेस्ट्रॉल पर नजर रखें: खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से धमनियों में रुकावट का खतरा बढ़ सकता है।
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ब्लड शुगर कंट्रोल करें: डायबिटीज के मरीजों को शुगर का स्तर नियंत्रित रखने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
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संतुलित भोजन करें: डाइट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करें।
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धूम्रपान से दूरी बनाएं: सिगरेट और तंबाकू का सेवन हृदय की सेहत के लिए नुकसानदायक है।
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शारीरिक गतिविधि करें: डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित व्यायाम और वॉक करें। जरूरत पड़ने पर कार्डियक रिहैबिलिटेशन की मदद लें।
क्या हार्ट अटैक के मरीजों को लेना चाहिए विटामिन D सप्लीमेंट?
विटामिन D की कमी होने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लेना फायदेमंद हो सकता है। लेकिन इसे दोबारा हार्ट अटैक रोकने की प्रमाणित दवा नहीं माना जा सकता।
हार्ट अटैक के बाद मरीज को विटामिन D की जांच करानी चाहिए या नहीं और सप्लीमेंट की कितनी खुराक जरूरी है, इसका फैसला डॉक्टर से सलाह लेकर ही करना चाहिए। बिना जरूरत ज्यादा मात्रा में विटामिन D लेना भी नुकसानदायक हो सकता है।

