Cancer Awareness Day: महिलाओं में सबसे ज्यादा पाया जाता है ब्रेस्ट कैंसर, शरीर के इन 6 बदलावों को न करें नजरअंदाज
कैंसर ऐसी बीमारी है, जिसका नाम सुनते ही लोगों के मन में डर पैदा हो जाता है। भारत में भी कैंसर के मामले एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बने हुए हैं। हालांकि, बीमारी की समय पर पहचान और सही इलाज से इसके खिलाफ लड़ाई को प्रभावी बनाया जा सकता है। हर साल 7 नवंबर को नेशनल कैंसर अवेयरनेस डे मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को कैंसर के जोखिम, शुरुआती लक्षणों और बचाव के तरीकों के प्रति जागरूक करना है।
फोर्टिस हेल्थकेयर की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में नए मामलों की संख्या के लिहाज से ब्रेस्ट कैंसर सबसे आम कैंसर है। महिलाओं में भी इसका प्रसार सबसे अधिक है। इसके अलावा लंग कैंसर, ओरल कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, स्टमक कैंसर और कोलोरेक्टल कैंसर भी देश में प्रमुख कैंसर में शामिल हैं।
1. ब्रेस्ट कैंसर: गांठ और निप्पल में बदलाव हो सकते हैं संकेत
भारत में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर सबसे ज्यादा पाया जाता है। इसके जोखिम के पीछे आनुवंशिक कारण, बढ़ती उम्र, हार्मोनल बदलाव और जीवनशैली से जुड़े कई कारक हो सकते हैं। परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास, मोटापा, शराब का सेवन और देर से मेनोपॉज भी जोखिम बढ़ा सकते हैं।
ब्रेस्ट में गांठ महसूस होना, स्तन के आकार या बनावट में बदलाव और निप्पल से असामान्य डिस्चार्ज इसके संभावित संकेत हैं। ऐसे बदलाव दिखने पर डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। जरूरत के अनुसार मैमोग्राम और दूसरी जांचों की मदद ली जा सकती है।
2. लंग कैंसर: लंबे समय तक खांसी को न करें नजरअंदाज
लंग कैंसर यानी फेफड़ों का कैंसर भारत में भी एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। इसका प्रमुख जोखिम कारक तंबाकू का सेवन है। सिगरेट और बीड़ी पीने के अलावा दूसरों के धुएं के संपर्क में रहना, वायु प्रदूषण और एस्बेस्टस जैसे पदार्थों के संपर्क में आना भी जोखिम बढ़ा सकता है।
लंबे समय तक खांसी रहना, खांसी के साथ खून आना, सीने में दर्द और बिना वजह वजन कम होना इसके संभावित लक्षण हो सकते हैं। ऐसे संकेत लगातार बने रहें तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
3. ओरल कैंसर: मुंह में घाव या सफेद धब्बे हो सकते हैं चेतावनी
ओरल कैंसर में होंठ, जीभ, मसूड़े और मुंह के दूसरे हिस्से प्रभावित हो सकते हैं। भारत में तंबाकू और सुपारी से जुड़ी आदतें इसके प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। गुटखा, खैनी, धूम्रपान और ज्यादा शराब का सेवन भी खतरा बढ़ा सकते हैं।
मुंह में सफेद या लाल धब्बे, लंबे समय तक ठीक न होने वाला घाव और असामान्य उभार इसके संभावित संकेत हैं। ऐसे बदलावों की जांच कराने में देरी नहीं करनी चाहिए।
4. सर्वाइकल कैंसर: HPV संक्रमण से जुड़ा है खतरा
सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के गर्भाशय ग्रीवा यानी सर्विक्स को प्रभावित करता है। इसके ज्यादातर मामले ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) के लगातार बने रहने वाले संक्रमण से जुड़े होते हैं। कमजोर इम्यून सिस्टम और धूम्रपान भी जोखिम बढ़ा सकते हैं।
इस कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए पैप स्मीयर और HPV टेस्ट जैसी जांच महत्वपूर्ण हैं। HPV वैक्सीन संक्रमण के उन प्रकारों से बचाव में मदद करती है, जो सर्वाइकल कैंसर का कारण बन सकते हैं।
5. स्टमक कैंसर: लगातार अपच और पेट दर्द पर दें ध्यान
स्टमक कैंसर को गैस्ट्रिक कैंसर भी कहा जाता है। हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया का संक्रमण इसका प्रमुख जोखिम कारक है। इसके अलावा ज्यादा नमक वाले और स्मोक्ड खाद्य पदार्थों का सेवन, धूम्रपान, शराब और परिवार में इस बीमारी का इतिहास भी जोखिम से जुड़े हैं।
लगातार अपच, पेट में दर्द, मतली, सीने में जलन और थोड़ा खाना खाने के बाद ही पेट भरा महसूस होना इसके संभावित संकेत हो सकते हैं। इन समस्याओं के लगातार बने रहने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
6. कोलोरेक्टल कैंसर: मल में खून आना हो सकता है संकेत
कोलोरेक्टल कैंसर बड़ी आंत और मलाशय को प्रभावित करता है। कई मामलों में इसकी शुरुआत पॉलीप नाम की छोटी वृद्धि से हो सकती है। बढ़ती उम्र, मोटापा, कम शारीरिक गतिविधि, फाइबर की कमी वाला भोजन, प्रोसेस्ड मीट, धूम्रपान और शराब इसके जोखिम कारकों में शामिल हैं।
पेट में ऐंठन, मल त्याग की आदतों में बदलाव और मल में खून आना इसके संभावित लक्षण हैं। ऐसे बदलाव दिखाई देने पर जल्द डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
कैंसर के इन सामान्य संकेतों पर भी रखें नजर
कैंसर के अलग-अलग प्रकार के लक्षण अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ सामान्य बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इनमें शामिल हैं:
- बिना किसी स्पष्ट वजह के वजन कम होना।
- लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना।
- शरीर के किसी हिस्से में गांठ या सूजन होना।
- ऐसा घाव जो लंबे समय तक ठीक न हो।
- लंबे समय तक खांसी या आवाज में बदलाव।
- मल त्याग की आदतों में लगातार बदलाव।
ध्यान रखें कि इन लक्षणों का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता। कई सामान्य बीमारियों में भी ऐसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। फिर भी कोई समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
कैंसर का जोखिम कम करने के लिए अपनाएं ये आदतें
हर तरह के कैंसर से बचाव संभव नहीं है, लेकिन कुछ आदतें जोखिम कम करने में मदद कर सकती हैं। तंबाकू और शराब से दूरी बनाना, संतुलित आहार लेना, फल और सब्जियों को भोजन में शामिल करना, वजन नियंत्रित रखना और नियमित व्यायाम करना फायदेमंद हो सकता है।
इसके साथ ही उम्र और व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार जरूरी स्क्रीनिंग जांच कराना भी महत्वपूर्ण है। नेशनल कैंसर अवेयरनेस डे का संदेश यही है कि बीमारी के शुरुआती संकेतों को पहचानें, समय पर चिकित्सकीय सलाह लें और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें।
नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। लक्षण या जांच से जुड़ा निर्णय डॉक्टर की सलाह के अनुसार लें।

