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शिंगल्स की नई वैक्सीन से दिल की बीमारियों का खतरा भी घट सकता है? 7 साल की स्टडी में सामने आया बड़ा संकेत
 

शिंगल्स की नई वैक्सीन से दिल की बीमारियों का खतरा भी घट सकता है? 7 साल की स्टडी में सामने आया बड़ा संकेत


शिंगल्स यानी दाद से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाली वैक्सीन को लेकर एक नई स्टडी ने मेडिकल जगत में दिलचस्प सवाल खड़े किए हैं. शोधकर्ताओं ने पाया कि पुरानी वैक्सीन की तुलना में नई शिंगल्स वैक्सीन लेने वाले लोगों में कई तरह की हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों का जोखिम कम देखा गया. हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक इन नतीजों को यह मानने का आधार नहीं माना जा सकता कि वैक्सीन सीधे तौर पर दिल की बीमारी से बचाती है.

यह रिसर्च मेडिकल जर्नल Nature Medicine में प्रकाशित हुई है. शोधकर्ताओं ने अमेरिका के बड़े हेल्थ रिकॉर्ड डेटाबेस का इस्तेमाल करते हुए 60 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों में पुरानी और नई शिंगल्स वैक्सीन के असर की तुलना की.

7 साल तक 72 हजार से ज्यादा लोगों पर नजर

स्टडी के मुख्य विश्लेषण में 36,460-36,460 लोगों के दो ग्रुप बनाए गए. दोनों समूहों में उम्र, पहले से मौजूद बीमारियां, दवाओं और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारकों को ध्यान में रखते हुए तुलना की गई.

इसके बाद करीब सात वर्षों तक यह देखा गया कि दोनों समूहों में दिल और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियां कितनी सामने आईं. शोधकर्ताओं ने ऐसे समय का डेटा इस्तेमाल किया, जब अमेरिका में पुरानी शिंगल्स वैक्सीन की जगह नई वैक्सीन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा था.

शुरुआती दौर में करीब 98.6 प्रतिशत लोगों को पुरानी वैक्सीन लगी थी, जबकि एक साल बाद वाले दौर में करीब 93.5 प्रतिशत लोगों को नई वैक्सीन दी गई.

नई वैक्सीन लेने वालों में कुल हृदय जोखिम 9% कम

रिसर्च में सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई कि नई शिंगल्स वैक्सीन लेने वाले समूह में सात साल के दौरान हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों का कुल जोखिम करीब 9 प्रतिशत कम पाया गया.

हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि समय बीतने के साथ दोनों समूहों के बीच यह अंतर धीरे-धीरे कम होता गया. इसका मतलब है कि शुरुआती वर्षों में दिखाई देने वाला संभावित लाभ बाद के वर्षों में उतना मजबूत नहीं रहा.

हार्ट फेल्योर का खतरा करीब 12% कम

अलग-अलग बीमारियों का विश्लेषण करने पर भी कुछ महत्वपूर्ण अंतर सामने आए. नई वैक्सीन वाले समूह में कोरोनरी हार्ट डिजीज का जोखिम करीब 10 प्रतिशत कम पाया गया.

वहीं, हार्ट फेल्योर का जोखिम करीब 12 प्रतिशत कम था. पुरुषों और महिलाओं दोनों में इसके नतीजे लगभग समान रहे.

इसके अलावा, एट्रियल फिब्रिलेशन यानी दिल की धड़कन के अनियमित होने की समस्या का खतरा भी नई वैक्सीन लेने वाले लोगों में करीब 7 प्रतिशत कम देखा गया.

हालांकि, हर हृदय और रक्त वाहिका संबंधी बीमारी में कमी नहीं मिली. कुछ स्थितियों, जैसे हृदय की मांसपेशियों में सूजन, पैरों की नसों से जुड़ी बीमारी और दिमाग में रक्तस्राव के मामलों में दोनों समूहों के बीच कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं पाया गया.

पुरुषों में स्ट्रोक का जोखिम 12% कम, लेकिन तस्वीर इतनी सीधी नहीं

इस्केमिक स्ट्रोक के मामले में दोनों समूहों के बीच कुल मिलाकर कोई बड़ा अंतर नहीं मिला. लेकिन जब पुरुषों और महिलाओं के आंकड़ों को अलग-अलग देखा गया, तो पुरुषों में इस्केमिक स्ट्रोक का जोखिम करीब 12 प्रतिशत कम पाया गया.

यहां यह समझना बेहद जरूरी है कि इसका मतलब यह नहीं है कि शिंगल्स वैक्सीन हर पुरुष में स्ट्रोक का खतरा 12 प्रतिशत कम कर देती है. यह केवल इस स्टडी में सामने आया एक संभावित संबंध है. इसे पक्का साबित करने के लिए अलग तरह की और रिसर्च की जरूरत होगी.

वैक्सीन से दिल को फायदा कैसे हो सकता है?

शोधकर्ताओं ने इसके पीछे इम्यून सिस्टम और शरीर में होने वाली सूजन से जुड़े संभावित कारणों की ओर इशारा किया है.

नई शिंगल्स वैक्सीन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को लंबे समय तक सक्रिय रखने में भूमिका निभा सकती है. शोधकर्ताओं का अनुमान है कि इससे शरीर में सूजन से जुड़ी कुछ प्रक्रियाओं पर असर पड़ सकता है.

चूंकि लंबे समय तक रहने वाली सूजन को हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम से जोड़ा जाता है, इसलिए वैज्ञानिकों को लगता है कि वैक्सीन और बेहतर कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ के बीच कोई संबंध हो सकता है.

हालांकि, यह अभी एक संभावित जैविक व्याख्या है. स्टडी ने इस प्रक्रिया को सीधे साबित नहीं किया है.

शोधकर्ताओं ने कई बार जांचे नतीजे

रिसर्चरों ने यह भी जांचने की कोशिश की कि कहीं महामारी या दूसरे बाहरी कारणों की वजह से तो नतीजे प्रभावित नहीं हुए.

इसके लिए कोरोना महामारी के दौर को हटाकर भी डेटा का विश्लेषण किया गया. इसके अलावा मृत्यु से जुड़े आंकड़ों को शामिल करके भी दोबारा विश्लेषण किया गया. इन अतिरिक्त जांचों के बाद भी मुख्य नतीजों में बहुत बड़ा बदलाव नहीं आया.

क्या अब शिंगल्स वैक्सीन को हार्ट अटैक से बचाने वाली वैक्सीन मानें?

नहीं. इस स्टडी के आधार पर ऐसा कहना जल्दबाजी होगी.

रिसर्च में लोगों के पहले से मौजूद हेल्थ रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया है. इस तरह की स्टडी किसी वैक्सीन और स्वास्थ्य परिणाम के बीच संबंध तो दिखा सकती है, लेकिन यह हमेशा साबित नहीं करती कि एक चीज दूसरी की सीधी वजह है.

शोधकर्ताओं के पास धूम्रपान, खान-पान, शराब का सेवन, शिक्षा, नौकरी और आय जैसे कुछ संभावित प्रभाव डालने वाले कारकों की पूरी जानकारी नहीं थी. इसलिए यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि दिल से जुड़ी बीमारियों में कमी केवल नई शिंगल्स वैक्सीन की वजह से आई.

स्टडी से क्या समझना चाहिए?

नई रिसर्च शिंगल्स वैक्सीन के संभावित अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभों को लेकर एक दिलचस्प संकेत जरूर देती है. खासतौर पर हार्ट डिजीज, हार्ट फेल्योर और एट्रियल फिब्रिलेशन के जोखिम में कमी का संबंध आगे की रिसर्च के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है.

लेकिन फिलहाल शिंगल्स वैक्सीन को हार्ट अटैक या स्ट्रोक से बचाव की दवा समझना सही नहीं होगा. इसके लिए ज्यादा नियंत्रित और लंबे समय तक चलने वाली रिसर्च की जरूरत है.

फिलहाल इस स्टडी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि शिंगल्स से बचाव के लिए विकसित वैक्सीन के शरीर पर असर को लेकर वैज्ञानिकों को एक नया संभावित पहलू मिला है, जिसकी आगे गहराई से जांच की जाएगी.
 

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