क्या डायबिटीज पेशेंट्स के लिए जानलेवा हो सकता है स्वाइन फ्लू? जानिए ब्लड शुगर लेवल और इम्युनिटी पर इसका असर
स्वाइन फ्लू, जिसे H1N1 इन्फ्लुएंजा भी कहा जाता है, सांस से जुड़ा एक वायरल संक्रमण है। इसके प्रमुख लक्षणों में अचानक बुखार आना, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द और थकान शामिल हैं। आमतौर पर स्वस्थ लोगों में फ्लू कुछ दिनों में ठीक हो सकता है, लेकिन डायबिटीज जैसी पुरानी बीमारी से जूझ रहे लोगों में इसके गंभीर होने का जोखिम अधिक रहता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों के साथ गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं को भी फ्लू की गंभीर जटिलताओं का अधिक खतरा हो सकता है। इनमें निमोनिया, ब्रोंकाइटिस और अस्पताल में भर्ती होने की नौबत शामिल है। ऐसे में डायबिटीज के मरीजों के लिए फ्लू से बचाव और ब्लड शुगर की निगरानी बेहद जरूरी है।
डायबिटीज और इम्यून सिस्टम के बीच क्या संबंध है?
डायबिटीज का असर केवल ब्लड शुगर के स्तर तक सीमित नहीं रहता। लंबे समय तक ब्लड ग्लूकोज बढ़ा रहने पर शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के अनुसार, डायबिटीज से पीड़ित लोगों में फ्लू और निमोनिया जैसे संक्रमण गंभीर रूप ले सकते हैं। बीमारी से उबरने में भी अधिक समय लग सकता है।जब शरीर में इन्फ्लुएंजा वायरस प्रवेश करता है, तो इम्यून सिस्टम उससे लड़ने के लिए प्रतिक्रिया शुरू करता है। इस दौरान शरीर में कुछ हार्मोन और अन्य रासायनिक प्रक्रियाएं सक्रिय होती हैं, जो संक्रमण से निपटने में मदद करती हैं। हालांकि, इन प्रक्रियाओं के कारण ब्लड शुगर का स्तर भी बढ़ सकता है।
स्वाइन फ्लू से क्यों बढ़ सकता है ब्लड शुगर?
फ्लू या किसी अन्य संक्रमण के दौरान डायबिटीज के मरीजों का ब्लड शुगर बढ़ सकता है। इसके पीछे शरीर की प्राकृतिक तनाव प्रतिक्रिया एक प्रमुख कारण है।
बीमारी के दौरान शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है। ये हार्मोन संक्रमण और शारीरिक तनाव से निपटने में मदद करते हैं, लेकिन साथ ही ब्लड ग्लूकोज को भी बढ़ा सकते हैं।
अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के अनुसार, सर्दी-जुकाम और फ्लू जैसी बीमारियों के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव ब्लड शुगर को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को बीमारी के दौरान अपने ग्लूकोज स्तर पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
बीमारी के दौरान शुगर बढ़ने के पीछे ये कारण भी जिम्मेदार
1. शरीर में संक्रमण और तनाव
वायरल संक्रमण के दौरान शरीर को बीमारी से लड़ने के लिए अतिरिक्त प्रयास करना पड़ता है। इससे ब्लड शुगर सामान्य से अधिक हो सकता है।
2. डिहाइड्रेशन का खतरा
बुखार और पसीने के कारण शरीर में पानी की कमी हो सकती है। यदि ब्लड शुगर भी अधिक हो, तो बार-बार पेशाब आने से डिहाइड्रेशन की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना महत्वपूर्ण है, बशर्ते डॉक्टर ने किसी कारण से तरल पदार्थ सीमित करने की सलाह न दी हो।
3. दवाओं का असर
फ्लू के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं, खासकर स्टेरॉयड, ब्लड शुगर को बढ़ा सकती हैं। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के कोई नई दवा शुरू नहीं करनी चाहिए।
डायबिटीज के मरीज स्वाइन फ्लू से बचने के लिए क्या करें?
डायबिटीज के मरीज कुछ सावधानियां अपनाकर फ्लू से संक्रमित होने और गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम कर सकते हैं।
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फ्लू वैक्सीन लगवाएं: सालाना इन्फ्लुएंजा वैक्सीनेशन के बारे में डॉक्टर से सलाह लें।
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हाथों की सफाई रखें: साबुन और पानी से नियमित रूप से हाथ धोएं।
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संक्रमित लोगों से दूरी रखें: खांसी, छींक या बुखार से पीड़ित लोगों के निकट संपर्क से बचें।
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ब्लड शुगर की नियमित जांच करें: बीमारी के दौरान जरूरत के अनुसार ग्लूकोज की जांच बढ़ाएं।
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पर्याप्त तरल पदार्थ लें: शरीर में पानी की कमी न होने दें और डॉक्टर की सलाह का पालन करें।
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दवाएं अपने मन से बंद न करें: बीमारी के दौरान डायबिटीज की दवाओं या इंसुलिन में बदलाव करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
फ्लू के लक्षण दिखने पर कब डॉक्टर से संपर्क करें?
डायबिटीज के मरीजों को बुखार, खांसी और शरीर में दर्द जैसे फ्लू के लक्षण दिखने पर जल्द डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर जरूरत के अनुसार जांच और एंटीवायरल उपचार की सलाह दे सकते हैं। ऐसे उपचार का लाभ जल्दी शुरू करने पर अधिक हो सकता है।अगर सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, भ्रम, अत्यधिक कमजोरी, लगातार उल्टी या पानी पीने में असमर्थता हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। ब्लड शुगर लगातार बहुत अधिक या बहुत कम होने पर भी तत्काल चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।

