ब्राह्मी, शंखपुष्पी और अश्वगंधा का मिश्रण ओवरथिंकिंग से लेकर तनाव तक में देता है राहत
नई दिल्ली, 17 जनवरी (आईएएनएस)। आयुर्वेद में ब्राह्मी, अश्वगंधा और शंखपुष्पी का मिश्रण तनाव, चिंता और ओवरथिंकिंग से राहत दिलाने के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है। तनाव, चिंता और ओवरथिंकिंग जैसी मानसिक परेशानियों में आयुर्वेदाचार्य इस मिश्रण के सेवन की सलाह देते हैं।
ब्राह्मी मस्तिष्क को पोषण देती है, याददाश्त और एकाग्रता बढ़ाती है। अश्वगंधा तनाव हार्मोन को नियंत्रित कर शरीर को मजबूत बनाती है। शंखपुष्पी मन को शांत रखती है और बेहतर नींद लाती है। ये तीनों मिलकर मानसिक स्वास्थ्य सुधारती हैं, नकारात्मक विचार कम करती हैं और भावनात्मक संतुलन बनाए रखती हैं। नियमित सेवन से मन शांत रहता है और रोजमर्रा की जिंदगी में सुकून मिलता है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, ब्राह्मी, शंखपुष्पी और अश्वगंधा का मिश्रण सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। ये तीनों आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल वेलनेस) को मजबूत बनाने में विशेष रूप से कारगर साबित होती हैं। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में ओवरथिंकिंग, तनाव, चिंता और मानसिक थकान आम समस्या बन गई है। इस मिश्रण का नियमित सेवन इन समस्याओं से राहत दिला सकता है।
ब्राह्मी मस्तिष्क का टॉनिक है। यह याददाश्त, एकाग्रता और बुद्धि को बढ़ाती है। ब्राह्मी में मौजूद बैकोसाइड्स मस्तिष्क की कोशिकाओं की रक्षा करते हैं और न्यूरोट्रांसमीटर को संतुलित रखते हैं, जिससे चिंता और तनाव कम होता है। शंखपुष्पी मन को शांत करने वाली जड़ी-बूटी है। यह प्राकृतिक ट्रैंक्विलाइजर की तरह काम करती है, जो घबराहट, बेचैनी और ओवरथिंकिंग को दूर करती है। यह नींद की गुणवत्ता सुधारती है और भावनात्मक संतुलन बनाए रखती है। अश्वगंधा एक शक्तिशाली एडाप्टोजेन है। यह कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) को नियंत्रित करती है, जिससे शरीर और मन तनाव से बेहतर ढंग से निपट पाते हैं। यह ऊर्जा बढ़ाती है, थकान कम करती है और नींद में सुधार लाती है। तीनों का मिश्रण एक साथ मिलकर बेहतर काम करता है।
कई आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन में ये तीनों साथ में इस्तेमाल होती हैं, जैसे चूर्ण या सिरप। आमतौर पर चूर्ण के रूप में समान अनुपात (1:1:1) में लिया जाता है। मिश्रण दिन में 2 बार गुनगुने दूध या पानी के साथ ले सकते हैं। अश्वगंधा का मिश्रण गुनगुने दूध या शहद के साथ सुझाया जाता है, लेकिन सही मात्रा और तरीका व्यक्ति की प्रकृति (वात, पित्त, कफ) पर निर्भर करता है, इसलिए आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लेकर ही लें।
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