पीरियड्स के बाद कमजोरी दूर करने का नया तरीका? महिलायें ले रही कच्चे मांस वाले सप्लीमेंट, जाने इनके फायदे
मेनोपॉज़ एक ऐसी स्थिति है जब किसी महिला के पीरियड्स हमेशा के लिए बंद हो जाते हैं, और वह अब प्रेग्नेंट नहीं हो सकती। मेनोपॉज़ तब शुरू माना जाता है जब किसी महिला को लगातार 12 महीनों तक पीरियड न आए हों। यह आमतौर पर 45 से 55 साल की उम्र के बीच होता है। न्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार, कई महिलाएं मेनोपॉज़ के दौरान कच्चे जानवरों के अंगों (लिवर, दिल, किडनी) से बने फ्रीज-ड्राइड सप्लीमेंट्स ले रही हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये कुछ महिलाओं के लिए फायदेमंद हो सकते हैं, लेकिन ये कोई जादुई इलाज नहीं हैं और इन्हें सिर्फ डॉक्टर की देखरेख में ही लेना चाहिए।
ये 'कच्चे मांस' के सप्लीमेंट्स क्या हैं?
कच्चे जानवरों के अंगों से बने सप्लीमेंट्स में लिवर, दिल और किडनी जैसे अंगों को फ्रीज-ड्राई किया जाता है, उन्हें पीसकर पाउडर बनाया जाता है, और फिर कैप्सूल में पैक किया जाता है ताकि महिलाएं कच्चा मांस खाए बिना पोषक तत्व प्राप्त कर सकें। इन्हें आमतौर पर 'ऑर्गन मीट' या 'बीफ ऑर्गन कॉम्प्लेक्स' कहा जाता है और इनमें कई अंगों का मिश्रण होता है जिससे एक पोषक तत्वों से भरपूर सप्लीमेंट बनता है।
मेनोपॉज़ वाली महिलाओं को क्या फायदे हो रहे हैं?
मेडिकल न्यूज़ टुडे के अनुसार, ऑर्गन सप्लीमेंट्स का न्यूट्रिएंट प्रोफाइल उन महिलाओं के लिए खास तौर पर मददगार हो सकता है जिनमें B12, आयरन जैसे पोषक तत्वों की कमी होती है, या जो एनीमिया से पीड़ित हैं, और जिन्हें अपने रेगुलर डाइट से पर्याप्त एनिमल प्रोटीन नहीं मिलता है। "ये सप्लीमेंट्स एनर्जी लेवल, खून की सेहत और इम्यून फंक्शन को सपोर्ट करने में मदद कर सकते हैं, जिससे मेनोपॉज़ से जुड़े कुछ लक्षणों, जैसे थकान, कमजोरी और इन्फेक्शन के बढ़ते जोखिम को कम किया जा सकता है।"
लिवर से मिलने वाले पोषक तत्व
लिवर को अक्सर "प्रकृति का मल्टीविटामिन" कहा जाता है क्योंकि यह कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जिसमें B12, B6, विटामिन A, आयरन, फोलेट और जिंक शामिल हैं। न्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार, लिवर-आधारित सप्लीमेंट्स कम B12 लेवल वाली महिलाओं में थकान, मूड में बदलाव और ब्रेन फॉग जैसे मेनोपॉज़ के लक्षणों को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। सेरोटोनिन (अच्छा महसूस कराने वाला न्यूरोट्रांसमीटर) के उत्पादन के लिए B6 का पर्याप्त स्तर ज़रूरी है, जो मेनोपॉज़ के दौरान कम हो जाता है, जिससे मूड स्विंग और चिंता बढ़ जाती है।
रिसर्च क्या कहती है?
रिसर्च चेतावनी देती है कि फिलहाल ऐसा कोई मजबूत क्लिनिकल सबूत नहीं है जो यह साबित करे कि ऑर्गन सप्लीमेंट्स संतुलित आहार की तुलना में मेनोपॉज़ के लक्षणों के लिए ज़्यादा फायदेमंद हैं। महिलाओं को जो फायदे होते हैं, वे ज़्यादातर पोषक तत्वों की कमी को दूर करने के कारण होते हैं, न कि किसी खास हार्मोनल प्रभाव के कारण। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट में यह भी साफ़ तौर पर कहा गया है कि हालांकि ये सप्लीमेंट्स कुछ महिलाओं के लिए फ़ायदेमंद हो सकते हैं, लेकिन इन्हें "चमत्कारी सप्लीमेंट्स" के तौर पर बेचना और मार्केटिंग करना गलत है।
ज़रूरी सावधानियां
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, जिन महिलाओं को हाई कोलेस्ट्रॉल, लिवर की बीमारी, विटामिन A की ओवरडोज़ का खतरा है, या जो प्रेग्नेंट होने की प्लानिंग कर रही हैं, उन्हें ऐसे सप्लीमेंट्स लेते समय सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि ऑर्गन मीट में कोलेस्ट्रॉल और विटामिन A बहुत ज़्यादा हो सकता है। इसके अलावा, सप्लीमेंट इंडस्ट्री पर FDA जैसी एजेंसियों की निगरानी बहुत कम होती है, इसलिए क्वालिटी, सोर्स और डोज़ हमेशा डॉक्टर या रजिस्टर्ड डायटीशियन से सलाह लेकर ही तय करनी चाहिए।

