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फ्लू को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी, बीमारी में भूलकर भी न करें ये गलतियां

नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। मौसम बदलने के साथ सर्दी, खांसी और बुखार जैसी परेशानियां आम हो जाती हैं। इन्हीं में से एक है फ्लू। यह एक तरह का वायरस से होने वाला संक्रमण है, जो नाक और गले के साथ-साथ फेफड़ों पर भी असर डालता है। कई बार फ्लू के लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि लोग इसे मामूली सर्दी-जुकाम समझ लेते हैं और अपनी मर्जी से दवाएं लेने लगते हैं। यही छोटी-छोटी गलतियां कई बार बीमारी को बढ़ा सकती हैं।

नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। मौसम बदलने के साथ सर्दी, खांसी और बुखार जैसी परेशानियां आम हो जाती हैं। इन्हीं में से एक है फ्लू। यह एक तरह का वायरस से होने वाला संक्रमण है, जो नाक और गले के साथ-साथ फेफड़ों पर भी असर डालता है। कई बार फ्लू के लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि लोग इसे मामूली सर्दी-जुकाम समझ लेते हैं और अपनी मर्जी से दवाएं लेने लगते हैं। यही छोटी-छोटी गलतियां कई बार बीमारी को बढ़ा सकती हैं।

फ्लू होने पर शरीर को वायरस से लड़ने के लिए आराम, पानी और अच्छे खाने की जरूरत होती है। ऐसे में कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

फ्लू में अचानक बुखार आ सकता है। इसके साथ खांसी, गले में दर्द, सिरदर्द, शरीर में दर्द और बहुत ज्यादा थकान महसूस हो सकती है। कुछ लोगों को भूख भी कम लगती है। आम तौर पर कई लोग घर पर आराम करने से ठीक हो जाते हैं, लेकिन हर व्यक्ति की हालत एक जैसी नहीं होती। अगर बुखार बहुत ज्यादा हो, सांस लेने में परेशानी हो, सीने में दर्द हो, बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस हो या तबीयत लगातार बिगड़ती जाए तो डॉक्टर से सलाह लेनी जरूरी है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी बीमारी से परेशान लोगों को फ्लू में खास सावधानी रखनी चाहिए।

फ्लू के दौरान बुखार आने और पसीना निकलने से शरीर में पानी कम हो सकता है। बीमारी में कई लोगों को पानी पीने का मन कम करता है। ऐसे में शरीर में पानी की कमी हो सकती है और कमजोरी ज्यादा महसूस हो सकती है। इसलिए दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें। सूप, नारियल पानी और दूसरे तरल पदार्थ भी लिए जा सकते हैं। अगर उल्टी या दस्त भी हो रहे हैं तो शरीर में पानी और नमक की कमी जल्दी हो सकती है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। चाय और कॉफी को पानी का विकल्प न बनाएं। शरीर को सबसे ज्यादा जरूरत सामान्य पानी और दूसरे सही तरल पदार्थों की होती है।

फ्लू होने पर शरीर अंदर से वायरस से लड़ रहा होता है। इसलिए उस समय ज्यादा काम करने से थकान बढ़ सकती है। अगर बुखार और शरीर में दर्द है तो आराम करना ज्यादा जरूरी है। पर्याप्त नींद लेने से शरीर को खुद को संभालने का समय मिलता है। बीमारी के दौरान दूसरों से थोड़ी दूरी बनाना भी जरूरी है, क्योंकि फ्लू एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैल सकता है। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकें और हाथ साफ रखें।

फ्लू में खाना खाने का मन कम होता है। इसके बावजूद लंबे समय तक खाना छोड़ देना ठीक नहीं है। शरीर को बीमारी से लड़ने के लिए ताकत चाहिए। इसलिए बहुत ज्यादा खाना एक साथ खाने के बजाय थोड़ा-थोड़ा खाना बेहतर होता है। दाल, अंडा, दूध, दही, और पनीर जैसे प्रोटीन वाले खाने के साथ फल और हरी सब्जियां भी डाइट में शामिल करें। खिचड़ी, दलिया या हल्का खाना भी लिया जा सकता है। विटामिन और दूसरे जरूरी पोषक तत्व शरीर को सामान्य तरीके से काम करने में मदद करते हैं। हालांकि किसी एक विटामिन को ज्यादा मात्रा में लेने से फ्लू तुरंत ठीक नहीं होता।

फ्लू वायरस की वजह से होता है, इसलिए हर मरीज को एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। एंटीबायोटिक ऐसी दवाएं हैं, जो बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण में काम आती हैं। वायरस पर इनका सीधा असर नहीं होता। फिर भी कई लोग डॉक्टर से पूछे बिना एंटीबायोटिक लेना शुरू कर देते हैं। ऐसा करना नुकसान पहुंचा सकता है।

--आईएएनएस

पीके/एएस

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