विश्व ओजोन परत संरक्षण दिवस : लोगों को जागरूक करना और बचाव के उपाय खोजना भी मकसद
नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। वर्तमान में इस पूरे ब्रह्मांड में पृथ्वी ही एकमात्र ऐसा ज्ञात ग्रह है, जहां जीवन मौजूद है। इसके पीछे कई कारण हैं, जिनमें से प्रमुख है कि पृथ्वी, सूर्य से न तो अत्यधिक नजदीक है और न ही बहुत दूर, जिसकी वजह से यहां तापमान संतुलित रहता है। यह सौर मंडल का एकमात्र ऐसा ग्रह है, जिसकी सतह पर पानी तरल अवस्था में उपलब्ध है। यहां जीवन के लिए जरूरी ऑक्सीजन, कार्बन और अन्य रासायनिक तत्व मौजूद हैं।
इन सभी के अतिरिक्त, पृथ्वी पर जीवन होने के पीछे एक और बड़ी वजह वायुमंडल में मौजूद ओजोन परत है। ओजोन परत पृथ्वी के वायुमंडल के समताप मंडल (स्ट्रैटोस्फियर) में मौजूद एक सुरक्षात्मक ढाल है, जो सूर्य से निकलने वाली अधिकांश हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट (यूवी) किरणों को पृथ्वी की सतह तक आने से पहले सोख लेती है। अगर स्ट्रैटोस्फियर में ओजोन परत नहीं होती, तो संभवतः पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं होता।
हालांकि, 1970 के दशक में कुछ वैज्ञानिकों ने पाया कि मानव जाति द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे उपकरण और मशीनें जैसे गाड़ियां, फ्रिज, एसी, आदि से निकलने वाली हानिकारक गैसों, जैसे क्लोरोफ्लोरोकार्बन (सीएफसी), हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (एचएफसी), कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2), कार्बन मोनोऑक्साइड (सीओ) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओ2), आदि ओजोन लेयर में एक छेद बना रही हैं, जिसकी वजह से त्वचा संबंधित कई प्रकार की बीमारी और मोतियाबिंद के मामलों में वृद्धि हो रही है। इसी के साथ पौधों, फसलों और इकोसिस्टम को नुकसान पहुंचने का खतरा पैदा हो रहा है।
इसके बाद 16 सितंबर 1987 को मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए गए। यह एक ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय संधि थी, जिसका मकसद ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक रसायनों के उत्पादन और इस्तेमाल को धीरे-धीरे खत्म करना था। वहीं, संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) ने दिसंबर 1994 में एक प्रस्ताव पारित करके हर वर्ष 16 सितंबर को विश्व ओजोन परत संरक्षण दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी।
विश्व ओजोन परत संरक्षण दिवस पहली बार 16 सितंबर 1995 को मनाया गया था। इसके बाद से प्रत्येक वर्ष इस दिन को मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य ओजोन परत के नुकसान के बारे में लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना और इसके बचाव के उपाय खोजना है।
ओजोन ऑक्सीजन के 3 परमाणु से मिलकर बना हुआ एक प्रकार की गैस है, जो वायुमंडल में बहुत कम मात्रा में पाई जाती है। यह पृथ्वी की सतह से लगभग 10 से 50 किलोमीटर ऊपर एक सुरक्षात्मक परत बनाती है, जिसे ओजोन परत कहते हैं, जो सूर्य से आने वाली हानिकारक यूवी किरणों को रोकती है और पृथ्वी पर इंसानों, पौधों व जीवों की रक्षा करती है।
--आईएएनएस
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