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Tech News: फोन में नेटवर्क न होने पर भी क्यों दिखता है ‘Emergency Calls Only’? जानिए SOS फीचर कैसे बचा सकता है जान

Tech News: फोन में नेटवर्क न होने पर भी क्यों दिखता है ‘Emergency Calls Only’? जानिए SOS फीचर कैसे बचा सकता है जान

स्मार्टफोन इस्तेमाल करते समय कई बार इंटरनेट खत्म होने या मोबाइल नेटवर्क गायब होने पर परेशानी होती है। लेकिन आपने गौर किया होगा कि सिग्नल नहीं होने के बावजूद फोन की स्क्रीन पर ‘Emergency Calls Only’ लिखा दिखाई देता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मोबाइल नेटवर्क से जुड़ी कुछ आपातकालीन सुविधाएं सामान्य कॉल और इंटरनेट सेवाओं से अलग तरीके से काम करती हैं। फोन का SOS फीचर भी संकट के समय मदद मांगने में उपयोगी साबित हो सकता है।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि बिना रिचार्ज या इंटरनेट के हर स्थिति में इमरजेंसी कॉल और SOS मैसेज काम करेंगे, इसकी गारंटी नहीं होती। यह सुविधा फोन, उपलब्ध नेटवर्क, देश और डिवाइस के सपोर्ट पर निर्भर करती है।

नेटवर्क न होने पर भी कैसे लग सकती है इमरजेंसी कॉल?

जब फोन पर ‘Emergency Calls Only’ दिखाई देता है, तो इसका मतलब हो सकता है कि आपका फोन सामान्य मोबाइल सेवा के लिए रजिस्टर नहीं है, लेकिन आसपास किसी ऐसे मोबाइल नेटवर्क की उपलब्धता है जिसका इस्तेमाल आपातकालीन कॉल के लिए किया जा सकता है।

कुछ देशों और नेटवर्क व्यवस्थाओं में फोन अपने सिम ऑपरेटर के बजाय दूसरे उपलब्ध नेटवर्क के जरिए भी इमरजेंसी कॉल करने की कोशिश कर सकता है। इसके लिए मोबाइल टावर का उपलब्ध होना जरूरी है।

लेकिन अगर आसपास किसी भी संगत नेटवर्क का सिग्नल नहीं है, तो सामान्य सेलुलर इमरजेंसी कॉल भी कनेक्ट नहीं हो पाएगी। इसी तरह, बिना रिचार्ज कॉल करने की सुविधा ऑपरेटर और स्थानीय नियमों पर निर्भर करती है।

फोन का SOS फीचर कैसे करता है काम?

आजकल कई स्मार्टफोन में इमरजेंसी SOS की सुविधा दी जाती है। इसके जरिए यूजर आपातकालीन सेवाओं या पहले से सेव किए गए इमरजेंसी कॉन्टैक्ट्स तक मदद का संदेश पहुंचाने की कोशिश कर सकता है।

कई फोन में पावर बटन को तेजी से कई बार दबाने या इमरजेंसी स्लाइडर का इस्तेमाल करने से SOS सक्रिय होता है। हालांकि, इसे चालू करने का तरीका अलग-अलग फोन में अलग हो सकता है।

SOS फीचर के जरिए फोन में उपलब्ध सुविधाओं के अनुसार इमरजेंसी कॉल लगाई जा सकती है, चुने हुए कॉन्टैक्ट्स को संदेश भेजा जा सकता है या लोकेशन साझा की जा सकती है। इसके लिए जरूरी है कि फोन की सेटिंग्स सही हों और संबंधित सुविधा आपके डिवाइस पर उपलब्ध हो।

क्या बिना इंटरनेट के भी ट्रैक हो सकती है लोकेशन?

फोन में मौजूद GPS रिसीवर सैटेलाइट से सिग्नल लेकर आपकी भौगोलिक स्थिति का पता लगा सकता है। इसके लिए मोबाइल इंटरनेट जरूरी नहीं है। GPS से अक्षांश और देशांतर यानी Latitude और Longitude की जानकारी मिल सकती है।

हालांकि, लोकेशन पता चलना और उसे किसी दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाना दो अलग-अलग बातें हैं। इंटरनेट के बिना GPS आपकी स्थिति निर्धारित कर सकता है, लेकिन उसे किसी कॉन्टैक्ट या रेस्क्यू टीम तक भेजने के लिए SMS, मोबाइल नेटवर्क या किसी समर्थित सैटेलाइट कनेक्शन जैसे माध्यम की जरूरत होगी।

अगर फोन में नेटवर्क नहीं है, तो सामान्य SMS भी नहीं पहुंच पाएगा। इसलिए केवल GPS चालू होने से किसी दूसरे व्यक्ति को आपकी लाइव लोकेशन अपने आप नहीं मिलती।

जंगल या पहाड़ में नेटवर्क न मिले तो क्या होगा?

घने जंगल, पहाड़ या रेगिस्तान जैसे इलाकों में मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने पर मदद मांगना मुश्किल हो सकता है। ऐसी स्थिति के लिए कुछ आधुनिक स्मार्टफोन में सैटेलाइट के जरिए इमरजेंसी मैसेज भेजने की सुविधा दी जाती है।

इस तकनीक में फोन सीधे समर्थित सैटेलाइट से संपर्क स्थापित करने की कोशिश करता है। कुछ डिवाइस स्क्रीन पर दिशा बताने वाला संकेत या एनिमेशन दिखाते हैं, जिससे यूजर फोन को सही दिशा में रख सके।

मैसेज में लोकेशन और आपातकालीन स्थिति से जुड़ी जानकारी शामिल हो सकती है। इसके बाद सेवा की व्यवस्था के अनुसार सूचना संबंधित इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर या अन्य निर्धारित सहायता प्रणाली तक पहुंचाई जाती है।

हालांकि, यह सुविधा हर स्मार्टफोन में उपलब्ध नहीं है। इसके लिए समर्थित डिवाइस, अनुकूल परिस्थितियां और संबंधित देश में सेवा की उपलब्धता जरूरी है। भारत में भी अपने फोन और क्षेत्र के हिसाब से इस सुविधा की उपलब्धता की पुष्टि करना जरूरी है।

SOS फीचर में मिल सकती हैं ये अतिरिक्त सुविधाएं

कुछ स्मार्टफोन में SOS सक्रिय करने पर अतिरिक्त सुरक्षा सुविधाएं भी काम कर सकती हैं। इनमें शामिल हैं:

  • इमरजेंसी कॉन्टैक्ट्स: पहले से चुने गए लोगों को मदद का संदेश भेजना।
  • लोकेशन शेयरिंग: उपलब्ध नेटवर्क या सैटेलाइट सेवा के जरिए स्थान की जानकारी साझा करना।
  • मेडिकल ID: कुछ फोन में ब्लड ग्रुप, एलर्जी और दूसरी जरूरी मेडिकल जानकारी दिखाना।
  • सायरन और अलर्ट: कुछ डिवाइस या ऐप तेज आवाज में अलर्ट बजा सकते हैं।
  • इमरजेंसी कॉल: उपलब्ध नेटवर्क और स्थानीय व्यवस्था के अनुसार आपातकालीन सेवाओं से संपर्क करना।

इन सभी सुविधाओं का एक साथ उपलब्ध होना जरूरी नहीं है। इनका काम करना फोन के मॉडल, ऑपरेटिंग सिस्टम और सेटिंग्स पर निर्भर करता है।

फोन में आज ही चेक करें ये सेटिंग्स

किसी आपातकालीन स्थिति में परेशानी से बचने के लिए अपने स्मार्टफोन की सेटिंग्स में जाकर Emergency SOS विकल्प जरूर जांचें। इमरजेंसी कॉन्टैक्ट्स जोड़ें, मेडिकल जानकारी उपलब्ध होने पर अपडेट करें और देखें कि SOS सक्रिय करने का सही तरीका क्या है।

ध्यान रखें: SOS फीचर उपयोगी है, लेकिन इसे बिना नेटवर्क हर हाल में काम करने वाली सुविधा न समझें। अगर आपके फोन में सैटेलाइट इमरजेंसी सेवा उपलब्ध है, तो उसकी शर्तों और कवरेज की जानकारी भी पहले से जांच लें।

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