'सुधार का वर्ष' रहा बीता साल; ट्रस्ट, ट्रांसपेरेंसी, टीमवर्क और टेक्नोलॉजी पर जोर: सेबी चेयरमैन
मुंबई, 2 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने अपने एक वर्ष के कार्यकाल के पूरा होने पर कहा कि यह साल काफी चुनौतीपूर्ण रहा। उन्होंने बताया कि इस दौरान वित्तीय और भू-राजनीतिक स्तर पर कई बड़े बदलाव हुए। चुनौतियां केवल नीतियों या टैरिफ से ही नहीं आईं, बल्कि तकनीक के क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों ने भी बाजार के लिए नई मुश्किलें खड़ी कीं।
न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए उन्होंने इस साल को बाजार के लिए 'सुधार का वर्ष' बताया। उन्होंने कहा कि सभी हितधारकों ने मिलकर इसे सुधारों का साल बनाने की कोशिश की। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, ईज ऑफ इन्वेस्टमेंट, मार्केट डेवलपमेंट, मार्केट रेगुलेटरी इंफ्रास्ट्रक्चर और इक्विटी मार्केट के विकास जैसे सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण काम किया गया। उन्होंने कहा कि यह साल चुनौतियों के साथ-साथ काफी दिलचस्प और उपलब्धियों से भरा रहा।
सेबी के चेयरमैन ने आगे कहा कि हमने चार प्रमुख सिद्धांतों - ट्रस्ट (विश्वास), ट्रांसपेरेंसी (पारदर्शिता), टीमवर्क और टेक्नोलॉजी - को आधार बनाकर काम करने का लक्ष्य रखा था। इन चारों को साथ लेकर सेबी संतुलित और प्रभावी नियमन की दिशा में आगे बढ़ा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सेबी का उद्देश्य ऐसा 'ऑप्टिमम रेगुलेशन' लागू करना है जो न तो जरूरत से ज्यादा सख्त हो और न ही ढीला। यानी न अत्यधिक नियंत्रण हो और न ही कम नियंत्रण, बल्कि संतुलित व्यवस्था हो। साथ ही, प्रवर्तन (एनफोर्समेंट) और निगरानी (सर्विलांस) को और मजबूत बनाया गया है ताकि नियमों का बेहतर तरीके से पालन हो सके।
सेबी चेयरमैन ने कहा कि मुझे संतोष है कि पूरी टीम ने मिलकर कड़ी मेहनत की और इन लक्ष्यों को हासिल करने में काफी सफलता प्राप्त की।
निवेशक सुरक्षा को प्राथमिकता बताते हुए पांडेय ने कहा कि सेबी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल शुरू किया है। इसके तहत 'सुदर्शन' नाम का एक एआई टूल विकसित किया गया है, जिसकी मदद से सेबी उन फिनफ्लुएंसर्स की पहचान कर पा रहा है, जो नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और जरूरत पड़ने पर उन्हें साइबर स्पेस से हटाया भी जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सेबी का काम तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित है-निवेशक संरक्षण, बाजार का विकास और बाजार का नियमन। ये जिम्मेदारियां संसद द्वारा तय की गई हैं और सेबी इन्हें पूरा करने के लिए जरूरी सभी कदम उठाता रहेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में प्रक्रियाओं को और सरल बनाया जाएगा और बाजार के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
आईएएनएस से बात करते हुए आगे तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि बहुत छोटे उद्यम सीधे पूंजी बाजार में नहीं आ पाते, लेकिन जो छोटे और मध्यम उद्यम तेजी से बढ़ने की क्षमता रखते हैं, वे पूंजी बाजार से धन जुटा सकते हैं। उन्होंने बताया कि दोनों प्रमुख स्टॉक एक्सचेंजों में एसएमई बोर्ड की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन इन कंपनियों को सही मार्गदर्शन और सहयोग की जरूरत है।
सेबी चेयरमैन ने बताया कि असाधारण रिटर्न आसानी से नहीं मिलते। यदि पूंजी बाजार ने पिछले कुछ वर्षों में 12 से 14 प्रतिशत का रिटर्न दिया है, तो यह मान लेना गलत होगा कि हर साल इतना ही रिटर्न मिलेगा। उन्होंने निवेशकों को समझदारी और दीर्घकालिक सोच के साथ निवेश करने की सलाह दी।
--आईएएनएस
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