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पुराना पेट्रोल स्कूटर बेचने की जरूरत नहीं! अब बन जाएगा इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड, जानें कैसे होगा कन्वर्जन
 

पुराना पेट्रोल स्कूटर बेचने की जरूरत नहीं! अब बन जाएगा इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड, जानें कैसे होगा कन्वर्जन


नई दिल्ली: अगर आपके घर में कई साल पुराना पेट्रोल स्कूटर खड़ा है और सिर्फ इसलिए नया स्कूटर खरीदने का मन नहीं है क्योंकि मौजूदा स्कूटर पुराना हो चुका है, तो अब एक नया विकल्प सामने आया है। पुराने पेट्रोल स्कूटर को अब इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड स्कूटर में रेट्रोफिट कराया जा सकता है।पुराने पेट्रोल स्कूटरों को नए पावरट्रेन में बदलने का काम कर रही है। कंपनी का दावा है कि उसके कन्वर्जन सिस्टम को ARAI की मंजूरी मिली हुई है।

इस तकनीक की खासियत यह है कि ग्राहक को अपना पुराना स्कूटर पूरी तरह हटाने की जरूरत नहीं पड़ती। उसके मौजूदा वाहन को ही नए पावरट्रेन के साथ दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।

पहले होती है स्कूटर की पूरी जांच

पुराने स्कूटर को इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड में बदलने से पहले उसकी तकनीकी स्थिति की जांच की जाती है।

कंपनी के मुताबिक, बेंगलुरु के Bommanahalli स्थित उसके रेट्रोफिट सेंटर पर स्कूटर को करीब 130 अलग-अलग मानकों पर जांचा जाता है। इसके बाद वाहन की स्थिति और ग्राहक की जरूरत के हिसाब से कन्वर्जन का विकल्प चुना जाता है।

यानी हर पुराने स्कूटर को सीधे इलेक्ट्रिक में बदलना जरूरी नहीं है। पहले यह देखा जाता है कि वाहन रेट्रोफिटिंग के लिए उपयुक्त स्थिति में है या नहीं।

पेट्रोल और इलेक्ट्रिक दोनों का विकल्प

Green Tiger पुराने स्कूटर को बाई-मोड हाइब्रिड में बदलने का विकल्प भी देती है।

इस सिस्टम में स्कूटर में पेट्रोल और इलेक्ट्रिक, दोनों पावरट्रेन मौजूद रहते हैं। जरूरत के मुताबिक चालक एक बटन के जरिए दोनों मोड के बीच स्विच कर सकता है।

शहर में छोटी दूरी तय करते समय इलेक्ट्रिक मोड का इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि लंबी दूरी या बैटरी चार्ज कम होने पर पेट्रोल मोड का सहारा लिया जा सकता है।

यह विकल्प खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जिन्हें इलेक्ट्रिक स्कूटर की रेंज को लेकर चिंता रहती है।

पूरी तरह इलेक्ट्रिक भी बन सकता है पुराना स्कूटर

अगर ग्राहक पेट्रोल इंजन को पूरी तरह हटाकर स्कूटर को इलेक्ट्रिक बनाना चाहता है, तो फुल-EV कन्वर्जन का विकल्प भी मौजूद है।

इसमें पेट्रोल इंजन की जगह बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर का इस्तेमाल किया जाता है। कंपनी के अनुसार, कन्वर्ट किए गए स्कूटर को घर के सामान्य 5-एम्पियर सॉकेट से भी चार्ज किया जा सकता है।

इसका मतलब है कि हर ग्राहक को अलग से महंगा चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर लगाने की जरूरत नहीं होगी।

डिलीवरी राइडर्स के लिए स्वैपेबल बैटरी

जो लोग स्कूटर का इस्तेमाल रोजाना लंबी दूरी के लिए करते हैं, उनके लिए कंपनी ने स्वैपेबल बैटरी का विकल्प भी दिया है।

मान लीजिए कोई डिलीवरी राइडर दिनभर में 100 से 150 किलोमीटर तक स्कूटर चलाता है। ऐसे में बैटरी खत्म होने के बाद उसे कई घंटे चार्जिंग के लिए रुकना नहीं पड़ेगा।

खाली बैटरी निकालकर पहले से चार्ज की गई दूसरी बैटरी लगाई जा सकती है। इससे वाहन का डाउनटाइम कम होता है और राइडर जल्दी से दोबारा काम शुरू कर सकता है।

बैटरी स्वैपिंग के लिए कई कंपनियों के साथ साझेदारी

Green Tiger ने बैटरी स्वैपिंग से जुड़े समाधान के लिए Indofast Energy, Indian Oil, Sun Mobility और Battery Smart जैसी कंपनियों के साथ काम किया है।

इसका मुख्य फोकस उन कमर्शियल और डिलीवरी वाहनों पर है, जिन्हें रोजाना ज्यादा किलोमीटर चलाया जाता है।

निजी वाहन मालिक के लिए घर पर चार्जिंग ज्यादा सुविधाजनक हो सकती है, जबकि कमर्शियल राइडर के लिए बैटरी स्वैपिंग समय बचाने वाला विकल्प साबित हो सकता है।

ARAI की मंजूरी क्यों है अहम?

वाहन को पेट्रोल से इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड में बदलने के मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक ARAI यानी Automotive Research Association of India से जुड़ा प्रमाणन है।

ARAI वाहनों और ऑटोमोटिव तकनीकों की टेस्टिंग और प्रमाणन से जुड़ी प्रमुख भारतीय संस्था है।

Green Tiger का कहना है कि उसका रेट्रोफिट समाधान ARAI-अप्रूव्ड है। हालांकि, सिर्फ रेट्रोफिट किट लगवा लेना ही पर्याप्त नहीं है। वाहन को सड़क पर चलाने से पहले उसके रजिस्ट्रेशन, दस्तावेज और लागू स्थानीय नियमों का पालन करना जरूरी है।

1.5 लाख किलोमीटर से ज्यादा चल चुके हैं कन्वर्टेड वाहन

कंपनी के मुताबिक, उसके इलेक्ट्रिक में बदले गए वाहनों ने अब तक कुल मिलाकर 1.5 लाख किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय की है।

Green Tiger का यह भी कहना है कि उसके पास रेट्रोफिट और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स तकनीक से जुड़े छह स्वीकृत पेटेंट हैं।

पुराने स्कूटर मालिकों के लिए क्या बदल सकता है?

इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि पुराने लेकिन अच्छी कंडीशन वाले स्कूटर को सीधे कबाड़ में भेजने के बजाय उसका दोबारा इस्तेमाल किया जा सके।

ग्राहक के पास अपनी जरूरत के मुताबिक तीन तरह के विकल्प हो सकते हैं—पेट्रोल + इलेक्ट्रिक हाइब्रिड, फुल इलेक्ट्रिक या ज्यादा चलने वाले वाहनों के लिए स्वैपेबल बैटरी सिस्टम।

हालांकि, कन्वर्जन कराने से पहले वाहन की उम्र, तकनीकी स्थिति, कन्वर्जन की लागत, बैटरी क्षमता, रजिस्ट्रेशन और स्थानीय नियमों की जांच करना जरूरी है।

यानी आने वाले समय में पुराने पेट्रोल स्कूटर को बदलने का मतलब जरूरी नहीं कि नया स्कूटर खरीदना ही हो। पुरानी गाड़ी को नई तकनीक देकर सड़क पर उतारना भी एक विकल्प बन सकता है।
 

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