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Moon AI Supercomputer: अब चांद पर भी दौड़ेगा AI सुपरकंप्यूटर, बिना GPS के रास्ता खोजेगा रोवर; जानें कैसे करेगा काम

Moon AI Supercomputer: अब चांद पर भी दौड़ेगा AI सुपरकंप्यूटर, बिना GPS के रास्ता खोजेगा रोवर; जानें कैसे करेगा काम

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल अब तक स्मार्टफोन, लैपटॉप और कंप्यूटर जैसे उपकरणों में देखा गया है, लेकिन आने वाले समय में यही तकनीक चांद पर भी काम करती नजर आ सकती है। अंतरिक्ष में लंबे समय तक चलने वाले मिशनों को आसान बनाने के लिए अमेरिका की टेक्नोलॉजी कंपनी Hewlett Packard Enterprise (HPE) एक खास कंप्यूटिंग सिस्टम चांद पर भेजने की तैयारी कर रही है।

इस सिस्टम को Astrolab के FLIP नाम के रोवर में लगाया जाएगा। इसके जरिए चांद की सतह पर GPU और AI तकनीक से जुड़े प्रयोग किए जाएंगे। वैज्ञानिकों का उद्देश्य यह समझना है कि भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों की लंबे समय तक मौजूदगी और रोबोटिक मिशनों के संचालन में ऐसी तकनीक कितनी मददगार हो सकती है।

Griffin-1 मिशन के तहत चांद पर पहुंचेगा कंप्यूटर

कैलिफोर्निया की स्पेस कंपनी Astrolab अपने FLIP रोवर को Griffin Mission 1 (Griffin-1) के तहत चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास उतारने की योजना बना रही है। इस रोवर में HPE का Spaceborne Computer-4 लगाया जाएगा। कंपनी के मुताबिक, यह चांद पर भेजा जाने वाला उसका पहला सुपरकंप्यूटिंग सिस्टम होगा।

इस मिशन में पहली बार चंद्रमा की सतह पर GPU और AI से जुड़े प्रयोग किए जाएंगे। इससे यह जांचने में मदद मिलेगी कि अंतरिक्ष के कठिन वातावरण में कंप्यूटिंग सिस्टम किस तरह काम कर सकता है।

GPS के बिना रास्ता कैसे पहचानेगा रोवर?

चांद पर पृथ्वी की तरह GPS नेटवर्क उपलब्ध नहीं है। ऐसे में रोवर के सामने अपनी लोकेशन पहचानने और सुरक्षित रास्ता चुनने की चुनौती होगी। इसके लिए Astrolab नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) में विकसित नेविगेशन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करेगी।

यह तकनीक मशीन लर्निंग की मदद से रोवर के कैमरों से मिलने वाली तस्वीरों की तुलना पहले से तैयार मैप से करेगी। इसके आधार पर रोवर अपनी स्थिति का अनुमान लगा सकेगा और गड्ढों या दूसरे खतरनाक रास्तों से बचने में मदद मिलेगी। इस तरह रोवर को हर कदम पर पृथ्वी से निर्देश मिलने की जरूरत कम हो सकती है।

150 घंटे से ज्यादा अंधेरे में काम करने की चुनौती

चांद पर कंप्यूटर भेजना जितना चुनौतीपूर्ण है, उससे बड़ी परीक्षा उसे वहां लंबे समय तक चालू रखना होगा। इस सिस्टम को करीब एक साल तक काम करने की क्षमता के हिसाब से तैयार किया जा रहा है।

चंद्रमा पर रात के दौरान कई बार 150 घंटे से अधिक समय तक सूरज की रोशनी नहीं मिलती। ऐसे में कंप्यूटर और रोवर के लिए ऊर्जा और तापमान को नियंत्रित रखना बड़ी चुनौती होगी। मिशन के दौरान यह भी परखा जाएगा कि सिस्टम इन कठिन परिस्थितियों में कितनी मजबूती से काम कर सकता है।

भविष्य के चंद्र अभियानों में मिलेगी मदद

यह कंप्यूटर रोवर के कैमरों से मिलने वाली तस्वीरों का विश्लेषण करने, जमीन की स्थिति समझने और चंद्रमा की मैपिंग में मदद करेगा। इसके अलावा, इस पर AI एप्लिकेशन चलाकर उनकी क्षमता का परीक्षण भी किया जाएगा।

भविष्य में ऐसी तकनीक चांद पर पानी की बर्फ और अन्य संसाधनों की पहचान, सुरक्षित रास्ते तलाशने और रोबोटिक अभियानों को लंबे समय तक संचालित करने में उपयोगी साबित हो सकती है। अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो चंद्रमा पर भविष्य के मानव मिशनों के लिए स्थानीय स्तर पर डेटा प्रोसेसिंग और स्वचालित फैसले लेने की दिशा में महत्वपूर्ण रास्ता खुल सकता है।

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