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बड़े लेनदेन पर एमडीआर से बढ़ेगा निवेश; डिजिटल पेमेंट का अगला चरण होगा और मजबूत: बिलडेस्क को-फाउंडर

मुंबई, 16 सितंबर (आईएएनएस)। डिजिटल पेमेंट और फिनटेक क्षेत्र की प्रमुख कंपनी बिलडेस्क के निदेशक एवं सह-संस्थापक श्रीनिवासु एमएन ने बुधवार को कहा कि सरकार का यूपीआई से जुड़े 2,000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने का कदम डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में मदद करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था आम उपभोक्ताओं या छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ डालने के लिए नहीं है, बल्कि पेमेंट नेटवर्क को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से की गई है।

मुंबई, 16 सितंबर (आईएएनएस)। डिजिटल पेमेंट और फिनटेक क्षेत्र की प्रमुख कंपनी बिलडेस्क के निदेशक एवं सह-संस्थापक श्रीनिवासु एमएन ने बुधवार को कहा कि सरकार का यूपीआई से जुड़े 2,000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने का कदम डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में मदद करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था आम उपभोक्ताओं या छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ डालने के लिए नहीं है, बल्कि पेमेंट नेटवर्क को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से की गई है।

न्यूज एजेंसी आईएएनएस से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई पेमेंट पूरी तरह निःशुल्क रहेगा और छोटे व्यापारियों के अधिकांश ट्रांजैक्शन पर भी कोई शुल्क नहीं लगेगा। एमडीआर केवल कुछ चुनिंदा 2,000 रुपए से अधिक मूल्य के ट्रांजैक्शन पर लागू होगा, जिससे प्राप्त संसाधनों का उपयोग यूपीआई नेटवर्क के विस्तार और तकनीकी निवेश के लिए किया जा सकेगा।

बिलडेस्क के सह-संस्थापक ने आगे कहा कि यूपीआई को लेकर किसी प्रकार की गलतफहमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने दोहराया, "सामान्य उपभोक्ता के लिए यूपीआई पूरी तरह मुफ्त रहेगा और छोटे मूल्य के व्यापारिक लेनदेन पर भी कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा।"

उन्होंने बताया कि कुछ नियमित भुगतानों जैसे यूटिलिटी बिल, सरकारी कर भुगतान, बीमा प्रीमियम और ईंधन भुगतान के लिए भी रियायती शुल्क व्यवस्था रखी गई है। उन्होंने कहा कि इस संतुलित मॉडल से एक ओर डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन मिलेगा और दूसरी ओर भुगतान सेवाएं उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं को आवश्यक निवेश के लिए संसाधन भी प्राप्त होंगे।

श्रीनिवासु एमएन ने आईएएनएस से कहा कि यूपीआई आज करोड़ों भारतीयों के दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। लोग खरीदारी से लेकर बिल भुगतान, धन हस्तांतरण और अन्य वित्तीय गतिविधियों के लिए बड़े पैमाने पर यूपीआई का उपयोग कर रहे हैं।

उन्होंने आईएएनएस को बताया कि इस सफलता के पीछे बैंकों, वित्तीय संस्थानों और पूरे डिजिटल भुगतान उद्योग द्वारा किया गया व्यापक निवेश है। अब जबकि यूपीआई को देश के और अधिक क्षेत्रों तथा नए उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाने का लक्ष्य है, तब नई तकनीकों, साइबर सुरक्षा और ग्राहक जागरूकता पर और अधिक निवेश की आवश्यकता होगी।

उन्होंने कहा, "डिजिटल भुगतान का अगला चरण केवल उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं होगा। इसके लिए साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकथाम तंत्र, ग्राहक शिक्षा और उन्नत तकनीकी ढांचे पर भी लगातार निवेश करना होगा।"

श्रीनिवासु एमएन ने आगे कहा, "एमडीआर से प्राप्त संसाधनों का एक हिस्सा ऐसे विशेष कोष के निर्माण में भी लगाया जाएगा, जिसका उद्देश्य छोटे व्यापारियों के बीच डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देना और यूपीआई को देश के अधिक से अधिक हिस्सों तक पहुंचाना होगा।"

भारत आज रिटेल डिजिटल भुगतान के मामले में दुनिया का अग्रणी देश बन चुका है। उन्होंने कहा कि दुनिया के 50 प्रतिशत से अधिक रिटेल डिजिटल लेनदेन भारत में हो रहे हैं, जो देश की डिजिटल भुगतान क्रांति की सफलता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि भारत में अभी भी डिजिटल भुगतान के विस्तार की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। वर्तमान में यूपीआई लगभग 50 करोड़ उपयोगकर्ताओं तक पहुंच चुका है, लेकिन यह देश की कुल आबादी का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है। ऐसे में आने वाले वर्षों में करोड़ों नए उपभोक्ताओं और कारोबारियों को डिजिटल भुगतान प्रणाली से जोड़ने की गुंजाइश बनी हुई है।

--आईएएनएस

डीबीपी

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