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कंप के खतरे से बचाने के लिए जापान का बड़ा आविष्कार, झटके महसूस होते ही हवा में उठ जाएगा घर 

कंप के खतरे से बचाने के लिए जापान का बड़ा आविष्कार, झटके महसूस होते ही हवा में उठ जाएगा घर 

भूकंप हर साल भारी नुकसान पहुंचाते हैं। हाल ही में आए भूकंपों में हजारों लोगों की जान गई है और बड़ी-बड़ी इमारतें मलबे में बदल गई हैं - पहले तुर्की में और अब वेनेजुएला में। भूकंप के दौरान इमारतों का गिरना ही नुकसान का मुख्य कारण है। जापान में, जहां भूकंप आम बात है, ऐसी तबाही से बचने के लिए घरों के नए और अनोखे डिज़ाइन विकसित किए जा रहे हैं। एक जापानी कंपनी ऐसे घर बना रही है जो भूकंप आने पर हवा में तैर सकते हैं। इससे भूकंप के दौरान घर के गिरने का खतरा काफी कम हो जाता है। आइए जानते हैं कि यह तकनीक क्या है और यह कैसे काम करती है।

**कंपनी ने हवा में तैरने वाले घर विकसित किए**

एयर डैनशिन सिस्टम्स इंक. (Air Danshin Systems Inc.) नाम की एक कंपनी ने एक नई तकनीक विकसित की है जो भूकंप के दौरान घर को हवा में उठा देती है। हालांकि यह किसी साइंस-फिक्शन फिल्म की कहानी जैसा लग सकता है, लेकिन यह हकीकत है। इस तकनीक में, घर को एक खास एयर-चेंबर सिस्टम के ऊपर बनाया जाता है। जैसे ही लगे हुए भूकंप-मापी सेंसर (seismic sensors) हलचल का पता लगाते हैं, चैंबर में कंप्रेस्ड एयर (दबाव वाली हवा) भर जाती है, जिससे घर लगभग 3 सेंटीमीटर ऊपर उठ जाता है और झटकों के असर से सुरक्षित हो जाता है। झटके थमने के बाद, सिस्टम धीरे-धीरे घर को उसकी मूल स्थिति में वापस ले आता है।

**तकनीक का इस्तेमाल पहले से ही हो रहा है**

एयर डैनशिन का सिस्टम सिर्फ कागजों पर बना कोई कॉन्सेप्ट नहीं है; इसका इस्तेमाल जापान में लगभग 90 घरों और इमारतों में पहले से ही हो रहा है। भूकंपीय तरंगों का पता चलने के एक सेकंड से भी कम समय में यह सिस्टम एक्टिवेट हो जाता है। इसमें एक इमरजेंसी बैटरी पैक लगा होता है, जो बिजली जाने पर भी इसके काम करते रहने को सुनिश्चित करता है। इसके अलावा, इसमें बहुत ज्यादा खर्च भी नहीं आता है। कंपनी ने इस सिस्टम के ऐसे वर्शन भी विकसित किए हैं जो रिहायशी घरों के साथ-साथ बड़ी प्रयोगशालाओं और कारखानों के लिए भी उपयुक्त हैं।

**सिस्टम को बेहतर बनाने पर काम चल रहा है**

एयर डैनशिन अभी इस सिस्टम को और बेहतर बनाने पर काम कर रही है। इसके डिज़ाइन में सुधार किया जा रहा है और इसे वैश्विक स्तर पर ले जाने की तैयारी चल रही है। हालांकि ट्रायल के दौरान अच्छे नतीजे मिले, लेकिन सिस्टम की कुछ कमियां भी सामने आई हैं। यह भूकंप के हल्के झटकों को तो झेल सकता है, लेकिन अलग-अलग दिशाओं से आने वाली बड़ी भूकंपीय तरंगों के खिलाफ उतना असरदार नहीं है।

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