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खाड़ी मार्गों पर जहाजों के लिए अमेरिका-ईरान युद्ध से बढ़ा जोखिम, बीमा प्रीमियम में 1,000 प्रतिशत तक का उछाल: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 23 जुलाई (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच खाड़ी क्षेत्र के शिपिंग मार्गों पर संचालित जहाजों के लिए बीमा प्रीमियम में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। यह जानकारी गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।

नई दिल्ली, 23 जुलाई (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच खाड़ी क्षेत्र के शिपिंग मार्गों पर संचालित जहाजों के लिए बीमा प्रीमियम में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। यह जानकारी गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।

इक्विरस रैगनॉल इंश्योरेंस ब्रोकिंग के विश्लेषण के अनुसार, उच्च जोखिम वाले शिपिंग मार्गों पर युद्ध-जोखिम बीमा प्रीमियम पिछले कुछ महीनों में 200-300 प्रतिशत तक बढ़ गया है और कुछ मामलों में इसमें 1,000 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी देखी गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे अधिक जोखिम वाले समुद्री मार्गों के लिए बीमा प्रीमियम जहाज के मूल्य के लगभग 0.2-0.5 प्रतिशत से बढ़कर 3-5 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिससे समुद्री यात्रा की लागत में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है।

रिपोर्ट में बताया गया कि यदि मौजूदा व्यवधान लंबे समय तक जारी रहते हैं, तो भारत के कच्चे तेल के आयात की लागत बढ़ सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि बीमा कुल लॉजिस्टिक्स लागत का केवल एक हिस्सा है, लेकिन युद्ध-जोखिम बीमा की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी भारत में आयातित कच्चे तेल की अंतिम लागत को काफी बढ़ा सकती है, खासकर उन खेपों के लिए जो पश्चिम एशिया से आती हैं या वहां से होकर गुजरती हैं।

इक्विरस रैगनॉल इंश्योरेंस ब्रोकिंग के निदेशक अमित गोयल ने कहा, "युद्ध-जोखिम बीमा प्रीमियम में वृद्धि के साथ-साथ जहाज के ढांचे (हुल), मशीनरी जोखिम और सुरक्षा से जुड़े अतिरिक्त खर्च भारत में कच्चे तेल के आयात की लागत बढ़ा देंगे।"

उन्होंने कहा कि भले ही प्रमुख समुद्री मार्गों को औपचारिक रूप से बंद न किया जाए, फिर भी बीमा और पुनर्बीमा कंपनियां जोखिम का दोबारा आकलन करेंगी। इसके परिणामस्वरूप बीमा प्रीमियम बढ़ेंगे, अंडरराइटिंग के नियम सख्त होंगे और कुछ मामलों में बीमा उपलब्धता भी घट सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका असर केवल मध्य पूर्व से आने वाले कच्चे तेल तक सीमित नहीं रहेगा। यदि व्यवधान लंबे समय तक बना रहता है, तो वैश्विक समुद्री बीमा क्षमता पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे भारत आने वाले रूसी कच्चे तेल के शिपमेंट का बीमा भी महंगा हो सकता है, खासकर यदि टैंकरों की उपलब्धता घटती है या जहाजों को अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में संचालन करना पड़ता है।

गोयल के अनुसार, भारत का समुद्री बीमा बाजार लगभग 5,500 करोड़ रुपए से 5,800 करोड़ रुपए के बीच आंका जाता है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि निकट भविष्य में समुद्री बीमा की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहेंगी, क्योंकि भू-राजनीतिक घटनाक्रम युद्ध-जोखिम बीमा प्रीमियम को प्रभावित करते रहेंगे। हालांकि, यदि क्षेत्रीय तनाव में लगातार कमी आती है, तो समय के साथ बीमा प्रीमियम पर दबाव कम हो सकता है।

--आईएएनएस

एबीएस

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