सिंगापुर हाई कोर्ट ने बायजू रवींद्रन के खिलाफ अवमानना आदेश पर रोक लगाई
सिंगापुर, 12 जून (आईएएनएस)। सिंगापुर के हाई कोर्ट के जनरल डिवीजन ने बायजू के फाउंडर बायजू रवींद्रन के खिलाफ जारी सिविल अवमानना आदेश के कुछ हिस्सों पर रोक लगा दी है। इससे उन्हें अपील के जरिए इस फैसले को चुनौती देने के दौरान अस्थायी राहत मिली है।
बयान के मुताबिक, सिंगापुर की अदालत ने रवींद्रन की ओर से दायर अर्जी पर विचार करने के बाद, 25 मई के अपने सिविल अवमानना आदेश के तहत उन्हें हिरासत में लेने और सरेंडर करने के प्रावधानों पर रोक लगा दी है।
इसके चलते, उन्हें सरेंडर करने की जरूरत नहीं है और अपील की प्रक्रिया चलने तक उन्हें जेल नहीं भेजा जाएगा।
यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि अदालत के मूल आदेश के बाद रवींद्रन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था।
बयान में ऐसी रिपोर्ट्स को गलत बताया गया और स्पष्ट किया गया कि किसी भी अदालत ने उनके खिलाफ कभी कोई गिरफ्तारी वारंट जारी नहीं किया था।
इसमें यह भी कहा गया कि 25 मई के आदेश में रवींद्रन को सिर्फ 15 जून को अदालत में पेश होने के लिए कहा गया था।
अदालत की अवमानना का यह मामला दस्तावेजों का खुलासा करने और मध्यस्थता की कार्यवाही से जुड़ी अन्य जिम्मेदारियों को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ा है।
बयान के अनुसार, मध्यस्थता से जुड़े इन आदेशों को अलग कानूनी कार्यवाही में चुनौती दी जा रही है और उन्हें रद्द करवाने की कोशिशें चल रही हैं।
इस मामले पर टिप्पणी करते हुए, रवींद्रन और लाजारेफ ले बार्स के संस्थापकों के सीनियर लिटिगेशन एडवाइजर जे. माइकल मैकनट ने कहा कि इस मामले को लेकर जनता के बीच जो बातें फैलाई गईं, वे गुमराह करने वाली थीं।
मैकनट ने कहा, "सिंगापुर कोर्ट के पिछले आदेश की कुछ चुनिंदा बातों को ज़ुबानी तौर पर लीक किए जाने के बाद जनता के बीच एक बिल्कुल गलत बात फैलाई गई कि रवींद्रन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है।"
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस मामले में रवींद्रन के खिलाफ कोई आपराधिक आरोप नहीं हैं और किसी भी अदालत ने उन्हें धोखाधड़ी, बेईमानी, फंड के गलत इस्तेमाल या किसी भी तरह की निजी गड़बड़ी का दोषी नहीं पाया है।
रवींद्रन ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि वह कानूनी तरीकों से उस गलत नैरेटिव (धारणा) को ठीक करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसे उन्होंने गुमराह करने वाला बताया।
उन्होंने कहा, "ऐसे समय में जब पार्टियां समझौते पर बातचीत कर रही हैं, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि गड़बड़ी की गलत धारणा बनाई जा रही है। मैं सही कानूनी प्रक्रिया के जरिए इस नैरेटिव को ठीक करने के लिए प्रतिबद्ध हूं।"
रवींद्रन ने बताया, "न तो मुझे और न ही किसी फाउंडर को विवादित फंड का कोई हिस्सा निजी तौर पर मिला। इसके उलट, मैंने और मेरे परिवार ने अपनी निजी संपत्ति में से 5,000 करोड़ रुपए से ज्यादा कंपनी में वापस लगाए हैं।"
--आईएएनएस
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