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'सेमिकॉन 2.0' से भारतीय कंपनियों को मिलेगी नई रफ्तार, स्वदेशी चिप डिजाइन और बौद्धिक संपदा को मिलेगा बढ़ावा: आईटी सचिव

नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। आईटी सचिव एस. कृष्णन ने शुक्रवार को कहा कि भारत सरकार का 'सेमिकॉन 2.0' कार्यक्रम भारतीय सेमीकंडक्टर कंपनियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने, स्वदेशी बौद्धिक संपदा (आईपी) विकसित करने और निजी निवेश को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 1.0 के तहत देश ने सेमीकंडक्टर डिजाइन के क्षेत्र में मजबूत आधार तैयार किया है और अब अगला चरण भारतीय कंपनियों को वैश्विक उत्पाद निर्माता बनाने पर केंद्रित होगा।

नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। आईटी सचिव एस. कृष्णन ने शुक्रवार को कहा कि भारत सरकार का 'सेमिकॉन 2.0' कार्यक्रम भारतीय सेमीकंडक्टर कंपनियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने, स्वदेशी बौद्धिक संपदा (आईपी) विकसित करने और निजी निवेश को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 1.0 के तहत देश ने सेमीकंडक्टर डिजाइन के क्षेत्र में मजबूत आधार तैयार किया है और अब अगला चरण भारतीय कंपनियों को वैश्विक उत्पाद निर्माता बनाने पर केंद्रित होगा।

आईटी सचिव ने आगे कहा कि सेमिकॉन 2.0 का उद्देश्य भारतीय कंपनियों को विस्तार देने, स्वदेशी तकनीक और बौद्धिक संपदा को मजबूत करने, अधिक निजी निवेश आकर्षित करने और विश्वस्तरीय चिप डिजाइन को वैश्विक स्तर के व्यावसायिक उत्पादों में बदलने का है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने इसी महीने 1.27 लाख करोड़ रुपए के बजट के साथ 'सेमिकॉन 2.0' योजना को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) का मजबूत घरेलू इकोसिस्टम तैयार करना है। अब तक 12 सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें 1.64 लाख करोड़ रुपए से अधिक के कुल निवेश को स्वीकृति मिली है।

राष्ट्रीय राजधानी स्थित आईआईटी दिल्ली में आयोजित दूसरे 'इंडिया फैबलेस सेमीकंडक्टर डिजाइन एक्सेलरेशन वर्कशॉप' को संबोधित करते हुए एस. कृष्णन ने कहा कि सरकार अत्याधुनिक डिजाइन इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच बढ़ाने, स्वदेशी बौद्धिक संपदा को मजबूत करने और उद्योग तथा शिक्षण संस्थानों के लिए नवाचार को बढ़ावा देने वाला अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसकी सेमीकंडक्टर क्षमताएं ऐसे उत्पादों में बदलें, जिनका डिजाइन, स्वामित्व और व्यावसायीकरण भारत में ही हो। इससे भारत वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर उत्पादों का प्रमुख केंद्र बन सकेगा।

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमितेश कुमार सिन्हा ने कहा कि सेमिकॉन 2.0 भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा का अगला चरण है, जिसका उद्देश्य अधिक समावेशी और नवाचार-आधारित इकोसिस्टम तैयार करना है। उनके अनुसार, इस विस्तारित ढांचे से स्टार्टअप, स्थापित कंपनियां, विदेशी सहयोगी और निवेशक सभी भारत की सेमीकंडक्टर क्षमता विकसित करने में भागीदारी कर सकेंगे।

उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक वित्तपोषण को मजबूत करने, स्वदेशी बौद्धिक संपदा को बढ़ावा देने, बाजार तक पहुंच आसान बनाने और चिप डिजाइन से व्यावसायिक उत्पाद तक की प्रक्रिया को समर्थन देने के जरिए भारत वैश्विक स्तर की सेमीकंडक्टर कंपनियों की मजबूत नींव तैयार कर रहा है।

कार्यशाला में मोबाइल फोन और वियरेबल्स, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीविजन, एयर कंडीशनर एवं घरेलू उपकरण, आईटी हार्डवेयर और डेटा सेंटर, ऑटोमोबाइल एवं इलेक्ट्रिक वाहन सहित कई तेज़ी से बढ़ते क्षेत्रों के लिए स्वदेशी सेमीकंडक्टर उत्पाद विकसित करने पर विस्तार से चर्चा की गई।

इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) के अध्यक्ष पंकज मोहिंदरू ने कहा कि भारत ने अपना सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में शुरुआती सफलता हासिल कर ली है। अब अगला लक्ष्य भारतीय स्वामित्व वाले सेमीकंडक्टर उत्पाद, स्वदेशी बौद्धिक संपदा और वैश्विक स्तर की तकनीकी कंपनियां तैयार करना होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और अब सेमीकंडक्टर विकास को मोबाइल फोन, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, आईटी हार्डवेयर, दूरसंचार, औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों की जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ाना होगा।

--आईएएनएस

डीबीपी

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