सेमीकॉन 2.0 से आकर्षित हो सकता है 5 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का निजी निवेश: उद्योग संगठन
नई दिल्ली, 31 अगस्त (आईएएनएस)। इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण (ईएसडीएम) उद्योग ने सरकार द्वारा 1.27 लाख करोड़ रुपए के परिव्यय वाली सेमीकॉन 2.0 योजना को अधिसूचित किए जाने का स्वागत किया है। इंडस्ट्री का कहना है कि यह योजना अगले पांच से सात वर्षों में 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक के संचयी निजी निवेश को आकर्षित करने की क्षमता रखती है और भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को नई मजबूती प्रदान करेगी।
इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (आईईएसए) ने कहा कि यह कार्यक्रम पहले से चल रहे सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम का विस्तार है और सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला के 6 प्रमुख स्तंभों को कवर करते हुए भारत की डिजाइन और विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आईईएसए के अध्यक्ष अशोक चंदक ने कहा कि सेमीकॉन 2.0 की आधिकारिक अधिसूचना एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के तुरंत बाद योजना को अधिसूचित करने की सरकार की गति यह दर्शाती है कि सरकार नीति निरंतरता, प्रभावी क्रियान्वयन और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के प्रति गंभीर है।
चंदक ने कहा कि सेमीकंडक्टर उद्योग में निवेश आमतौर पर 10 से 15 वर्षों के लंबे समय को ध्यान में रखकर किया जाता है। ऐसे में नीतिगत स्थिरता निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है। उनका मानना है कि इससे घरेलू और वैश्विक दोनों निवेशकों का भारत पर भरोसा और मजबूत होगा।
उद्योग संगठन के अनुसार, सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के पहले चरण ने पहले ही उद्योग में विश्वास पैदा किया है। अब तक 12 परियोजनाओं को मंजूरी, 100 से अधिक डिजाइन स्टार्टअप को सहयोग और शैक्षणिक संस्थानों में इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन उपकरणों तक पहुंच बढ़ाने जैसे कदमों ने एक मजबूत आधार तैयार किया है।
आईईएसए ने कहा कि सेमीकॉन 2.0 की सबसे बड़ी विशेषता इसकी व्यापकता है। यह योजना चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन इकाइयों, असेंबली, परीक्षण, पैकेजिंग, उपकरण एवं सामग्री निर्माण, अनुसंधान एवं विकास तथा कुशल मानव संसाधन विकास जैसे पूरे मूल्य शृंखला को कवर करती है।
उद्योग ने सरकार के उस निर्णय का भी स्वागत किया है, जिसके तहत प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) की संयुक्त अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति रणनीतिक महत्व वाले सेमीकंडक्टर उत्पादों की पहचान करेगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि प्रोत्साहन उन क्षेत्रों को मिले जो राष्ट्रीय जरूरतों और रणनीतिक प्राथमिकताओं के लिए महत्वपूर्ण हैं।
चंदक ने आगे कहा कि मौजूदा निवेश पाइपलाइन और योजना के विस्तारित दायरे को देखते हुए आईईएसए का अनुमान है कि सेमीकॉन 2.0 के तहत फैब्रिकेशन इकाइयों, एटीएमपी और ओसैट सुविधाओं, उपकरण एवं सामग्री निर्माण, अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी), चिप डिजाइन तथा आपूर्ति शृंखला से जुड़े क्षेत्रों में 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश आकर्षित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार की वित्तीय सहायता को केवल सब्सिडी के रूप में नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर निजी निवेश को आकर्षित करने वाले एक उत्प्रेरक के रूप में देखा जाना चाहिए। सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार से मशीनरी, विशेष रसायन, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और उच्च कौशल वाले मानव संसाधनों की मांग भी बढ़ेगी, जिससे पूरे औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को लाभ होगा।
आईईएसए ने यह भी कहा कि सेमीकॉन 2.0 को इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस), मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (एमपीएमएस) और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स (ईएमसी) जैसी योजनाओं के साथ मिलाकर देखा जाना चाहिए। इन पहलों के संयुक्त प्रभाव से भारत में घरेलू मूल्य संवर्धन, तकनीकी विकास और आत्मनिर्भर विनिर्माण को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिल सकता है।
उद्योग संगठन ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अमितेश कुमार सिन्हा और पूरी मंत्रालयी टीम को इस पहल के सफल क्रियान्वयन के लिए बधाई भी दी।
गौरतलब है कि सरकार ने सोमवार को सेमीकॉन 2.0 योजना को औपचारिक रूप से अधिसूचित किया, जिसके तहत सेमीकंडक्टर डिजाइन, चिप निर्माण, पैकेजिंग, परीक्षण, उपकरण निर्माण, अनुसंधान तथा प्रतिभा विकास को व्यापक वित्तीय और नीतिगत समर्थन प्रदान किया जाएगा।
--आईएएनएस
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