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बीते एक दशक में बने मजबूत एनर्जी इन्फ्रा से भारत को मध्य पूर्व तनाव से निपटने में मिली मदद

नई दिल्ली, 29 जून (आईएएनएस)। मध्य पूर्व तनाव से निपटने की भारत की प्रक्रिया कई अन्य देशों की तुलना में बेहतर थी। इसकी वजह देश में पिछले एक दशक में बनाया गया इन्फ्रास्ट्रक्चर था, जिससे हॉर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद भी पेट्रोल पंप और एलपीजी की आपूर्ति सामान्य बनी रही। यह जानकारी सरकार की ओर से दी गई।

नई दिल्ली, 29 जून (आईएएनएस)। मध्य पूर्व तनाव से निपटने की भारत की प्रक्रिया कई अन्य देशों की तुलना में बेहतर थी। इसकी वजह देश में पिछले एक दशक में बनाया गया इन्फ्रास्ट्रक्चर था, जिससे हॉर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद भी पेट्रोल पंप और एलपीजी की आपूर्ति सामान्य बनी रही। यह जानकारी सरकार की ओर से दी गई।

पेट्रोलियम मंत्रालय के कहा, भारत कच्चे तेल की अपनी स्थिति को सिर्फ स्टॉक के भरोसे नहीं, बल्कि अलग-अलग स्रोतों से तेल मंगाकर सुरक्षित रखता है। देश को तेल आपूर्ति करने वाले देशों की संख्या 27 से बढ़कर 41 हो गई है; इसमें लीबिया, गैबॉन, इक्वेटोरियल गिनी और गुयाना जैसे नए देश शामिल हुए हैं, साथ ही अमेरिका और रूस से भी तेल की आपूर्ति बढ़ाई गई है।

मंत्रालय ने बताया कि इसके साथ ही रूटिंग भी बदल गई है, जिससे अब भारत का बहुत कम कच्चा तेल होर्मुज से होकर गुजरता है। आईएसपीआरएल के तहत स्ट्रैटेजिक रिजर्व में लगभग 5.33 मिलियन टन तेल है, जो लगभग तीन हफ्ते की जरूरत को पूरी कर सकता है।

भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल था जो इस हॉर्मुज स्ट्रेट से अपने कार्गो की आवाजाही जारी रख पाए और किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद की कोई कमी नहीं हुई।

इसके अलावा, एथेनॉल ब्लेंडिंग का 20 प्रतिशत तक पहुंचना एक और संरचनात्मक राहत देता है, जिससे हर साल कच्चे तेल के आयात की भारी मात्रा की बचत होती है।

कच्चे तेल की कीमत गिरकर लगभग 74 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है, जो मध्य पूर्व संकट के पहले के स्तर के करीब है। स्ट्रेट से टैंकरों की आवाजाही फिर से शुरू होने के साथ कीमतें और कम हो रही हैं।

मंत्रालय ने कहा कि आवाजाही के पूरी तरह सामान्य होने में समय लगेगा, क्योंकि अभी भी बारूदी सुरंगों को हटाने और बड़े जहाजों के जमावड़े को निपटाने का काम बाकी है, लेकिन आपूर्ति में रुकावट का सबसे बुरा दौर अब बीत चुका है।

पेट्रोल और डीजल के मामले में, झटके का असर ग्राहकों पर नहीं डाला गया, बल्कि उसे खुद संभाला गया। केंद्र सरकार ने 27 मार्च, 2026 को पेट्रोल और डीजल पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती की। इसके तहत पेट्रोल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज को 13 रुपए से घटाकर 3 रुपए और डीजल पर 10 रुपए से घटाकर शून्य कर दिया गया। इस कदम से सरकार को लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ।

इसके बाद मार्केटिंग कंपनियों ने दो महीने से अधिक समय तक रिटेल कीमतें नहीं बढ़ाईं, जबकि कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर से भी ऊपर चली गई थीं और उन्हें रोजाना लगभग एक हजार करोड़ रुपए का नुकसान (अंडर-रिकवरी) हो रहा था।

जब कीमतों में बदलाव करना जरूरी हो गया, तो 15 मई को प्रति लीटर 3 रुपए की एक ही बार बढ़ोतरी की गई, जो किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था के मुकाबले सबसे कम थी।

संकट शुरू होने के समय से तुलना करें तो, भारत में पेट्रोल पंप की कीमतों में हुई बढ़ोतरी किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था के मुकाबले सबसे कम रही है। भारत में पेट्रोल की कीमतों में कुल मिलाकर लगभग 7.5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई।

एलपीजी का मामला सबसे बड़ी चुनौती और सबसे बड़ी कामयाबी थी। भारतीय रसोई तक पहुंचने वाली आधी से अधिक कुकिंग गैस खाड़ी देशों से आती थी, और आपूर्ति में रुकावट के कारण इसका एक बड़ा हिस्सा लगभग रातों-रात बंद हो गया।

आपूर्ति में रुकावट के आठ दिनों के भीतर ही एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर जारी किया गया। इसमें सभी रिफाइनरियों को प्रोपेन, ब्यूटेन, प्रोपलीन और ब्यूटीन स्ट्रीम्स का इस्तेमाल करके अधिक से अधिक प्रोडक्शन करने का निर्देश दिया गया।

मंत्रालय ने बताया, "सात दिनों के भीतर, घरेलू प्रोडक्शन 35,000 टन से बढ़कर 54,000 टन प्रतिदिन हो गया। यह मात्रा लगभग 30,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन की बची हुई आयात की जरूरत से कहीं अधिक थी, जिससे कमी को काफी हद तक घरेलू प्रोडक्शन से ही पूरा कर लिया गया। जिन रिफाइनरियों में पहले कभी एलपीजी का प्रोडक्शन नहीं होता था, उन्हें इसके प्रोडक्शन के लिए तैयार किया गया।"

कीमत के मामले में भी ग्राहकों का ध्यान रखा गया। 14.2 किलो वाले सिलेंडर की इंपोर्ट-लिंक्ड लागत 1,600 रुपए से अधिक होने के बावजूद, किसी भी घर के लिए तय कीमत 942 रुपए ही रखी गई। वहीं, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए रिफिल पर 300 रुपए का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर मिलने के बाद प्रभावी कीमत 642 रुपए रही। इस योजना के तहत 10.58 करोड़ से अधिक कनेक्शन दिए गए हैं और यह एक आम घर की सालाना जरूरत को पूरा करती है।

7 जून को घरेलू कुकिंग गैस (एलपीजी) की कीमतों में प्रति सिलेंडर सिर्फ 29 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी।

आपूर्ति की स्थिति बेहतर होने पर, सरकार ने 25 जून को कमर्शियल और बल्क एलपीजी पर लगी पाबंदियां हटा लीं और नॉन-डोमेस्टिक सप्लाई को संकट से पहले के स्तर पर बहाल कर दिया।

--आईएएनएस

एबीएस

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