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पीआईबी फैक्ट चेक ने वित्त मंत्री सीतारमण के फर्जी वायरल वीडियो का किया खंडन, सतर्क रहने की दी सलाह

नई दिल्ली, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। सरकार की फैक्ट चेक ब्रांच पीआईबी फैक्ट चेक ने गुरुवार को एक वायरल वीडियो को फर्जी करार दिया, जिसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक हाई-रिटर्न निवेश योजना का समर्थन करते हुए गलत तरीके से दिखाया गया था। एजेंसी ने लोगों को ऐसी भ्रामक जानकारी से सावधान रहने की चेतावनी दी है।
पीआईबी फैक्ट चेक ने वित्त मंत्री सीतारमण के फर्जी वायरल वीडियो का किया खंडन, सतर्क रहने की दी सलाह

नई दिल्ली, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। सरकार की फैक्ट चेक ब्रांच पीआईबी फैक्ट चेक ने गुरुवार को एक वायरल वीडियो को फर्जी करार दिया, जिसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक हाई-रिटर्न निवेश योजना का समर्थन करते हुए गलत तरीके से दिखाया गया था। एजेंसी ने लोगों को ऐसी भ्रामक जानकारी से सावधान रहने की चेतावनी दी है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए पीआईबी फैक्ट चेक ने कहा, "वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का एक वायरल वीडियो सामने आया है जिसमें दावा किया गया है कि 22,000 रुपए के शुरुआती निवेश के बदले एक सप्ताह में 5,50,000 रुपए मिलेंगे। यह वीडियो फर्जी है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से बनाया गया है।"

एजेंसी ने आगे कहा कि न तो भारत सरकार और न ही वित्त मंत्री ऐसी किसी निवेश योजना का समर्थन कर रही हैं। सतर्क रहें। ऐसे दावों की पुष्टि केवल सरकारी स्रोतों से ही करें।

पीआईबी फैक्ट चेक ने कहा, "गलत सूचना को रोकने में मदद करें। संदिग्ध कंटेंट की सूचना दें।"

एजेंसी ने लोगों से अपील की गई है कि किसी भी निवेश से पहले जानकारी को आधिकारिक सरकारी स्रोतों से जरूर जांच लें और बिना पुष्टि के ऐसे दावों पर भरोसा न करें।

पीआईबी फैक्ट चेक ने लोगों से यह भी कहा कि संदिग्ध या फर्जी कंटेंट को रिपोर्ट करें ताकि गलत जानकारी के प्रसार को रोका जा सके।

इससे पहले पिछले महीने भी पीआईबी फैक्ट चेक ने सोशल मीडिया पर वायरल एक फर्जी मैसेज को चिन्हित किया था, जिसमें दावा किया गया था कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के योनो ऐप अकाउंट बंद हो जाएंगे यदि यूजर्स तुरंत आधार अपडेट नहीं करते।

इस मैसेज में यूजर्स को "एसबीआई केवाईसी आधार अपडेट" नाम की एपीके फाइल डाउनलोड करने को कहा गया था, जो दरअसल एक फिशिंग प्रयास था।

एजेंसी के अनुसार, इस तरह के मैसेज लोगों को धोखा देकर उनकी बैंकिंग और व्यक्तिगत जानकारी हासिल करने के लिए बनाए जाते हैं।

--आईएएनएस

डीबीपी

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