Samachar Nama
×

96 प्रतिशत से अधिक यूपीआई ट्रांजैक्शन पर छोटे व्यापारियों को एमडीआर से छूट: एनपीसीआई

नई दिल्ली, 22 सितंबर (आईएएनएस)। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने मंगलवार को कुछ मीडिया रिपोर्टों में किए गए उन दावों को खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) और उस पर लगने वाला जीएसटी छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ डालेगा और डिजिटल भुगतान को महंगा बना देगा।

नई दिल्ली, 22 सितंबर (आईएएनएस)। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने मंगलवार को कुछ मीडिया रिपोर्टों में किए गए उन दावों को खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) और उस पर लगने वाला जीएसटी छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ डालेगा और डिजिटल भुगतान को महंगा बना देगा।

एनपीसीआई ने स्पष्ट किया कि यह दावा सही नहीं है। एमडीआर केवल 2,000 रुपए से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी (पी2एम) यूपीआई ट्रांजैक्शन पर लागू होगा। 2,000 रुपए तक के सभी यूपीआई व्यापारी ट्रांजैक्शन पर पहले की तरह शून्य एमडीआर रहेगा, इसलिए इन पर जीएसटी का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2,000 रुपए तक के ट्रांजैक्शन यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का 96 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हैं। इसका अर्थ है कि अधिकांश यूपीआई भुगतान एमडीआर और उससे जुड़े किसी भी जीएसटी दायित्व से मुक्त रहेंगे।

एनपीसीआई ने यह भी कहा कि जिन व्यापारियों की मासिक यूपीआई प्राप्तियां 1 लाख रुपए तक हैं, उन्हें एमडीआर का भुगतान नहीं करना होगा। इसलिए ऐसे छोटे व्यापारियों के लिए एमडीआर पर जीएसटी लगने का सवाल ही नहीं उठता।

संस्था के अनुसार, छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने की आशंकाएं तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं, क्योंकि अधिकांश ट्रांजैक्शन और छोटे कारोबारी इस व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे।

एनपीसीआई ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यापारी द्वारा एमडीआर पर जीएसटी का भुगतान किया जाता है, तो इसे अन्य इनपुट टैक्स की तरह उसकी जीएसटी देनदारी के विरुद्ध समायोजित किया जा सकता है। इसलिए जीएसटी की यह राशि अंततः व्यापारी पर अतिरिक्त लागत के रूप में नहीं पड़ती।

इससे पहले वित्त मंत्रालय भी स्पष्ट कर चुका है कि एमडीआर कोई कर नहीं है और न ही यह सरकार या एनपीसीआई द्वारा वसूला जाने वाला शुल्क है। यह राशि भुगतान व्यवस्था से जुड़े विभिन्न भागीदारों, जैसे बैंक, भुगतान सेवा प्रदाता और यूपीआई ऐप प्रदाताओं के बीच वितरित की जाती है, ताकि यूपीआई नेटवर्क का संचालन और विस्तार जारी रखा जा सके।

नई व्यवस्था के तहत 2,000 रुपए से अधिक के पी2एम ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा। हालांकि 75,000 रुपए या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन के लिए एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपए प्रति ट्रांजैक्शन तय की गई है।

वहीं, रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे आवश्यक एवं कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में 2,000 रुपए से अधिक के ट्रांजैक्शन पर केवल 5 रुपए प्रति ट्रांजैक्शन का फ्लैट एमडीआर लागू होगा, जिसका उद्देश्य इन क्षेत्रों के लिए लागत को पूर्वानुमेय और सीमित रखना है।

एनपीसीआई और वित्त मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि व्यक्ति-से-व्यक्ति (पी2पी) यूपीआई ट्रांजैक्शन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे, चाहे ट्रांजैक्शन की राशि कितनी भी हो।

कुल मिलाकर, एनपीसीआई का कहना है कि एमडीआर को लेकर जो आशंकाएं जताई जा रही हैं, उनका प्रभाव बहुत सीमित दायरे में है और 96 प्रतिशत से अधिक यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन तथा अधिकांश छोटे व्यापारी इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे।

--आईएएनएस

डीबीपी

Share this story

Tags