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वैश्विक महंगाई की आशंकाओं और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से शेयर बाजार पर दबाव, हफ्ते भर में सेंसेक्स 2.68 प्रतिशत और निफ्टी 2.33 प्रतिशत टूटा

मुंबई, 25 जुलाई (आईएएनएस)। वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने की आशंकाओं, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार इस सप्ताह दबाव में रहा। पूरे सप्ताह के दौरान निफ्टी में 2.33 प्रतिशत और सेंसेक्स में 2.68 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन निफ्टी50 0.43 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,767 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 331 अंक यानी 0.43 प्रतिशत फिसलकर 76,059 के स्तर पर आ गया।

मुंबई, 25 जुलाई (आईएएनएस)। वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने की आशंकाओं, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार इस सप्ताह दबाव में रहा। पूरे सप्ताह के दौरान निफ्टी में 2.33 प्रतिशत और सेंसेक्स में 2.68 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन निफ्टी50 0.43 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,767 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 331 अंक यानी 0.43 प्रतिशत फिसलकर 76,059 के स्तर पर आ गया।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और रेड सी में नाकेबंदी के कारण कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंकाएं तेज हो गईं। इसके चलते अमेरिका और भारत दोनों में बॉन्ड यील्ड बढ़ी हैं और अब सितंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना भी मजबूत होती दिख रही है।

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताओं की वापसी ने भी घरेलू निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है, जिसका सबसे अधिक असर निर्यात आधारित कंपनियों पर देखने को मिला।

पूरे सप्ताह निवेशकों का रुख सतर्क बना रहा। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, एशियाई बाजारों में कमजोरी और अमेरिकी व्यापार शुल्क को लेकर बढ़ती चिंताओं ने बाजार पर दबाव बनाए रखा।

विशेषज्ञों के मुताबिक, जुलाई के पीएमआई आंकड़ों से कारोबारी गतिविधियों में नरमी और आर्थिक माहौल कमजोर होने के संकेत मिले। इसका असर पूरे सप्ताह बाजार पर दिखाई दिया और सबसे ज्यादा बिकवाली लार्ज-कैप शेयरों में रही, जिनका प्रदर्शन व्यापक बाजार की तुलना में कमजोर रहा।

सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो बैंकिंग और रियल एस्टेट शेयरों में सबसे अधिक बिकवाली देखने को मिली। वहीं, मजबूत तिमाही नतीजों के दम पर एफएमसीजी और ऑटो सेक्टर के शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया।

विश्लेषकों का मानना है कि कंपनियों की आय में उल्लेखनीय सुधार वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही से देखने को मिल सकता है। हालांकि, इसके लिए कच्चे तेल की कीमतों का स्थिर होना और पश्चिम एशिया में तनाव कम होना जरूरी होगा।

इस दौरान, व्यापक बाजार भी दबाव में रहा। सप्ताह के दौरान निफ्टी मिडकैप-100 में 1.90 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप-100 में 2.18 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी के लिए 23,800 से 24,000 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस रहेगा, जबकि 23,700 से 23,600 का दायरा मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। वहीं बैंक निफ्टी के लिए 56,000 से 56,100 का स्तर तत्काल सपोर्ट है, जबकि 56,800 से 56,900 के बीच रेजिस्टेंस देखने को मिल सकता है।

आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक मौद्रिक नीति से जुड़े संकेतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले पर रहेगी। इसके अलावा महंगाई के आंकड़े, जीडीपी ग्रोथ और भारत के आईआईपी (औद्योगिक उत्पादन सूचकांक) के आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

--आईएएनएस

डीबीपी

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