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भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में 440 स्टार्टअप सक्रिय, 18 स्टार्टअप्स को इन-स्पेस से मिली मंजूरी: सरकार

नई दिल्ली, 13 अगस्त (आईएएनएस)। भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और निजी कंपनियों तथा स्टार्टअप्स की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। केंद्र सरकार ने गुरुवार को संसद को बताया कि देश में वर्तमान में लगभग 440 स्पेस टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स पंजीकृत हैं। इसके साथ ही भारतीय निजी अंतरिक्ष कंपनियां अगले दो वर्षों के दौरान आठ से अधिक वाणिज्यिक रॉकेट लॉन्च कर सकती हैं, जो देश के उभरते अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।

नई दिल्ली, 13 अगस्त (आईएएनएस)। भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और निजी कंपनियों तथा स्टार्टअप्स की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। केंद्र सरकार ने गुरुवार को संसद को बताया कि देश में वर्तमान में लगभग 440 स्पेस टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स पंजीकृत हैं। इसके साथ ही भारतीय निजी अंतरिक्ष कंपनियां अगले दो वर्षों के दौरान आठ से अधिक वाणिज्यिक रॉकेट लॉन्च कर सकती हैं, जो देश के उभरते अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।

राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के स्टार्टअप इंडिया पोर्टल पर करीब 440 अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से जुड़े स्टार्टअप्स पंजीकृत हैं। यह संख्या दर्शाती है कि अंतरिक्ष क्षेत्र में नवाचार और निजी निवेश तेजी से बढ़ रहा है।

मंत्री ने कहा कि इन-स्पेस यानी भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (आईएन-एसपीएसीई) ने अब तक 52 गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीई) को विभिन्न अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए 113 अधिकृत मंजूरियां प्रदान की हैं, जिनमें से 18 कंपनियां स्टार्टअप्स हैं, जिन्हें भारत के बढ़ते निजी अंतरिक्ष इकोसिस्टम का अग्रणी माना जा रहा है।

इन स्टार्टअप्स में अग्निकुल कॉसमॉस, बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस, ध्रुवा स्पेस, दिगंतारा रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज, गैलेक्सीआई स्पेस सॉल्यूशंस, मनस्तु स्पेस टेक्नोलॉजीज, पिक्सल स्पेस इंडिया, स्काईरूट एयरोस्पेस और स्पेस किड्ज इंडिया जैसी कंपनियां शामिल हैं। इसके अलावा अक्षत एयरोस्पेस, अजिस्ता बीएसटी, कॉसमोसर्व स्पेस इंडिया, हेक्स20 लैब्स इंडिया, इनऑर्बिट स्पेस टेलीकम्युनिकेशंस, एनस्पेस टेक इंडिया, ऑर्बिटएड एयरोस्पेस, पियरसाइट स्पेस और टेकमी2स्पेस टेक्नोलॉजीज को भी मंजूरी दी गई है।

सरकार ने बताया कि इसरो यानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के बुनियादी ढांचे, विशेष रूप से श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के लॉन्च पैड्स, के उपयोग के लिए आने वाले आवेदनों को निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत मंजूरी दी जाती है। इन-स्पेस के डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्राप्त आवेदनों का विशेषज्ञ समिति द्वारा तकनीकी और परिचालन तैयारी के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है।

निजी क्षेत्र की रॉकेट लॉन्च गतिविधियों के बारे में जानकारी देते हुए मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान दो निजी रॉकेट लॉन्च प्रस्तावित हैं। वहीं वित्त वर्ष 2027-28 के लिए लॉन्च कार्यक्रम को अभी अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है, लेकिन उस वर्ष भारतीय निजी कंपनियों द्वारा छह से अधिक रॉकेट लॉन्च किए जाने की संभावना है।

सरकार का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत ने अपने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए बड़े पैमाने पर खोल दिया है। पिछले कुछ वर्षों में स्टार्टअप्स और निजी कंपनियां उपग्रह निर्माण, लॉन्च सेवाओं, अंतरिक्ष डेटा विश्लेषण, पृथ्वी अवलोकन और अंतरिक्ष आधारित संचार सेवाओं जैसे क्षेत्रों में तेजी से सक्रिय हुई हैं।

--आईएएनएस

डीबीपी

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