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सेमीकॉन 2.0 के तहत नीति से क्रियान्वयन की ओर बढ़ा भारत, 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मिली मंजूरी: सरकार

नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। भारत का सेमीकंडक्टर उद्योग अब नीतिगत घोषणाओं के चरण से आगे बढ़कर वास्तविक क्रियान्वयन और इकोसिस्टम निर्माण के दौर में प्रवेश कर चुका है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के अतिरिक्त सचिव और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आीएसएम) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमितेश कुमार सिन्हा ने कहा कि देश में सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 12 विनिर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनमें से 5 ने पहले ही व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है।

नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। भारत का सेमीकंडक्टर उद्योग अब नीतिगत घोषणाओं के चरण से आगे बढ़कर वास्तविक क्रियान्वयन और इकोसिस्टम निर्माण के दौर में प्रवेश कर चुका है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के अतिरिक्त सचिव और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आीएसएम) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमितेश कुमार सिन्हा ने कहा कि देश में सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 12 विनिर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनमें से 5 ने पहले ही व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है।

उन्होंने आईएसआईजी एग्जीक्यूटिव समिट इंडिया 2026 के दूसरे और अंतिम दिन कहा कि सेमीकॉन 2.0 का उद्देश्य केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण करना है। इसमें डिजाइन कंपनियां, कच्चा माल, रसायन, गैस, उपकरण निर्माता, अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) और प्रतिभा विकास जैसे सभी महत्वपूर्ण घटक शामिल हैं।

सिन्हा ने कहा कि भारत के पास बड़ा घरेलू बाजार, विशाल प्रतिभा आधार और सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं जैसे महत्वपूर्ण लाभ मौजूद हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक तकनीकी साझेदारियां और मजबूत आपूर्ति शृंखलाएं भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग की दीर्घकालिक सफलता के लिए आवश्यक होंगी।

'इंटेलिजेंट फ्यूचर को सक्षम बनाना : एडवांस्ड सेमीकंडक्टर्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स' विषय पर आयोजित यह सम्मेलन भारत में आयोजित पहला आईएसआईजी एक्जीक्यूटिव समिट था, जिसमें वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी, निवेशक, शोधकर्ता, उद्योग विशेषज्ञ और सरकारी प्रतिनिधि शामिल हुए।

इस समिट में उन्नत पैकेजिंग, आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग (ओएसएटी), पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, सिलिकॉन कार्बाइड और गैलियम नाइट्राइड जैसी वाइड-बैंडगैप तकनीकों, एआई और डेटा सेंटरों की बढ़ती मांग, तथा भारत में डिजाइन, उपकरण और आपूर्ति शृंखला इकोसिस्टम के विकास जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।

इस अवसर पर आईएसआईजी ने बिहार सरकार के साथ राज्य में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के विकास के लिए एक रणनीतिक सहयोग समझौते पर भी हस्ताक्षर किए।

आईएसआईजी की भारत प्रमुख और पावर सेमीकंडक्टर विभाग की प्रमुख डॉ. शालु अग्रवाल ने कहा कि इस सम्मेलन ने यह दिखाया है कि जब वैश्विक उद्योग, निवेशक और सरकार एक मंच पर आते हैं तो नई संभावनाएं पैदा होती हैं। उन्होंने कहा कि उन्नत पैकेजिंग और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में भारत के पास वास्तविक अवसर मौजूद हैं और आईएसआईजी का उद्देश्य इन अवसरों को प्रौद्योगिकी, पूंजी और साझेदारियों से जोड़ना है।

उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला में महत्वपूर्ण स्थान दिलाने के लिए निवेश, तकनीकी सहयोग और अनुसंधान क्षमताओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

इस शिखर सम्मेलन का अगला संस्करण 30 नवंबर और 1 दिसंबर 2027 को भारत में आयोजित किया जाएगा।

--आईएएनएस

डीबीपी

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