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जुलाई में भारत का औद्योगिक उत्पादन 6.7 प्रतिशत बढ़ा, विनिर्माण क्षेत्र की मजबूत प्रदर्शन से मिली रफ्तार

नई दिल्ली, 28 अगस्त (आईएएनएस)। भारत की औद्योगिक गतिविधियों ने जुलाई 2026 में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में जुलाई के दौरान 6.7 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई। इस वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान विनिर्माण क्षेत्र का रहा, जिसने देश के औद्योगिक उत्पादन को मजबूती प्रदान की।

नई दिल्ली, 28 अगस्त (आईएएनएस)। भारत की औद्योगिक गतिविधियों ने जुलाई 2026 में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में जुलाई के दौरान 6.7 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई। इस वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान विनिर्माण क्षेत्र का रहा, जिसने देश के औद्योगिक उत्पादन को मजबूती प्रदान की।

देश के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में तीन-चौथाई से अधिक हिस्सेदारी रखने वाले विनिर्माण क्षेत्र ने जुलाई में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। यह क्षेत्र रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास का प्रमुख आधार माना जाता है और इंजीनियरिंग एवं तकनीकी संस्थानों से निकलने वाले युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार अवसर उपलब्ध कराता है।

विनिर्माण क्षेत्र के भीतर 23 उद्योग समूहों में से 19 उद्योग समूहों ने सकारात्मक वृद्धि दर्ज की, जिनमें सबसे बेहतर प्रदर्शन मोटर वाहन निर्माण, विद्युत उपकरण निर्माण और मशीनरी एवं उपकरण निर्माण क्षेत्र का रहा। मोटर वाहन निर्माण में 22.2 प्रतिशत, विद्युत उपकरणों में 28.3 प्रतिशत और मशीनरी एवं उपकरण निर्माण में 12.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

इस दौरान, ऊर्जा क्षेत्र का प्रदर्शन भी मजबूत रहा। बिजली और गैस आपूर्ति क्षेत्र में जुलाई के दौरान 8.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि जल आपूर्ति, सीवरेज एवं अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र में 7.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

हालांकि, खनन क्षेत्र अपेक्षाकृत कमजोर रहा और इसमें 0.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह जुलाई के दौरान औद्योगिक क्षेत्र का एकमात्र प्रमुख कमजोर क्षेत्र रहा।

उपयोग-आधारित वर्गीकरण के अनुसार, पूंजीगत वस्तुओं (कैपिटल गुड्स) का उत्पादन जुलाई में 16.1 प्रतिशत बढ़ा। पूंजीगत वस्तुओं में फैक्ट्रियों में उपयोग होने वाली मशीनें और उपकरण शामिल होते हैं। इस श्रेणी में वृद्धि को अर्थव्यवस्था में बढ़ते निवेश का संकेत माना जाता है, जो भविष्य में रोजगार और आय सृजन को बढ़ावा देता है।

उपभोक्ता मांग में भी मजबूती देखने को मिली। उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं (कंज्यूमर ड्यूरेबल्स) जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान, रेफ्रिजरेटर और टेलीविजन के उत्पादन में 10.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसे बढ़ती आय और बेहतर उपभोक्ता विश्वास ने समर्थन दिया।

हालांकि, उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुओं (कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स) जैसे साबुन, सौंदर्य प्रसाधन और दैनिक उपयोग की वस्तुओं के उत्पादन में 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

सरकारी निवेश की बदौलत बुनियादी ढांचा एवं निर्माण सामग्री क्षेत्र ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। इस श्रेणी में उत्पादन 6.9 प्रतिशत बढ़ा। राजमार्ग, बंदरगाह और रेलवे परियोजनाओं पर सरकार के बड़े निवेश का लाभ इस क्षेत्र को मिला है। ये परियोजनाएं बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के साथ समग्र आर्थिक विकास को भी गति देती हैं।

इस बीच, सांख्यिकी मंत्रालय ने औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की गणना पद्धति में एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है। मंत्रालय ने कुछ वस्तु समूहों के लिए थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) के स्थान पर आउटपुट उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) को डिफ्लेटर के रूप में अपनाने का निर्णय लिया है। यह बदलाव आईआईपी बास्केट की 463 वस्तु समूहों में से 234 समूहों पर लागू होगा, जो कुल सूचकांक भार का 36.02 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करती हैं।

मंत्रालय ने इस नए मानक के आधार पर 2022-23 आधार वर्ष वाली अखिल भारतीय औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) सीरीज को संशोधित कर पुनः जारी किया है, जो पहले 1 जून 2026 को जारी की गई डब्ल्यूपीआई-आधारित सीरीज का स्थान लेगी।

--आईएएनएस

डीबीपी

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