Samachar Nama
×

ब्रिक्स देशों के साथ भारत का व्यापार 5 साल में दोगुना होकर 417 अरब डॉलर पहुंचा, 2030 तक निर्यात 200 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना

नई दिल्ली, 11 सितंबर (आईएएनएस)। ब्रिक्स देशों के साथ भारत का व्यापार पिछले 5 वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। एसोचैम ग्लोबल रिसर्च एंड स्ट्रेटेजी सेंटर की रिपोर्ट "द राइज ऑफ ब्रिक्स नेशंस: एन अपॉर्च्युनिटी टू स्केल इंडियन एक्सपोर्ट्स टू 200 बिलियन डॉलर टू ब्रिक्स बाय 2030" के अनुसार, भारत का ब्रिक्स देशों के साथ कुल व्यापार 2020-21 के 203 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 417 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, जो यह दर्शाती है कि ब्रिक्स समूह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक और व्यापारिक साझेदार के रूप में उभर रहा है।

नई दिल्ली, 11 सितंबर (आईएएनएस)। ब्रिक्स देशों के साथ भारत का व्यापार पिछले 5 वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। एसोचैम ग्लोबल रिसर्च एंड स्ट्रेटेजी सेंटर की रिपोर्ट "द राइज ऑफ ब्रिक्स नेशंस: एन अपॉर्च्युनिटी टू स्केल इंडियन एक्सपोर्ट्स टू 200 बिलियन डॉलर टू ब्रिक्स बाय 2030" के अनुसार, भारत का ब्रिक्स देशों के साथ कुल व्यापार 2020-21 के 203 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 417 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, जो यह दर्शाती है कि ब्रिक्स समूह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक और व्यापारिक साझेदार के रूप में उभर रहा है।

एसोचैम की रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में ब्रिक्स सदस्य देशों को भारत का निर्यात 96 अरब डॉलर रहा। एसोचैम का अनुमान है कि अगर भारत दक्षिण-दक्षिण सहयोग को और मजबूत करता है तथा पारंपरिक निर्यात बाजारों से आगे बढ़कर नए अवसरों का लाभ उठाता है, तो वर्ष 2030 तक ब्रिक्स देशों को उसका निर्यात 200 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि विस्तार कर रहे ब्रिक्स प्लस आर्थिक परिदृश्य से भारतीय उद्योगों को व्यापक अवसर मिल सकते हैं, जिनमें इंजीनियरिंग उत्पाद, दवा उद्योग, रसायन, वस्त्र एवं परिधान, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, खनिज एवं धातु उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, कृषि एवं समुद्री उत्पाद, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवाएं और डिजिटल सेवाएं जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं।

एसोचैम का कहना है कि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार की दिशा सदस्य देशों की आर्थिक वृद्धि, व्यापार नीतियों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों से प्रभावित होती रहेगी। भारत के लिए अवसर केवल माल निर्यात बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उत्पादन नेटवर्क, सोर्सिंग शृंखलाओं, मूल्य संवर्धन तंत्र, प्रौद्योगिकी सहयोग और वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों को मजबूत करने तक भी फैले हुए हैं। इसके साथ ही भारत अन्य सदस्य देशों द्वारा विकसित सफल आर्थिक मॉडलों और सर्वोत्तम प्रक्रियाओं से भी सीख सकता है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत ने वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान लगातार 7 प्रतिशत से अधिक की औसत आर्थिक वृद्धि दर बनाए रखी है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जिससे भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति बनाए हुए है।

एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा कि ब्रिक्स के भीतर विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं का बढ़ता महत्व इस बात का संकेत है कि लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के आधार पर दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि हासिल की जा सकती है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स ढांचे के अंतर्गत व्यापार और सीमा-पार निवेश को बढ़ावा देने वाली हालिया पहलें कई उच्च-विकास क्षेत्रों के लिए उत्प्रेरक का काम कर सकती हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक परिवर्तनों के दौर में ब्रिक्स देशों के बीच मजबूत आर्थिक सहयोग और अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है। गहरी आर्थिक भागीदारी से भारत को महत्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा संसाधनों, प्रौद्योगिकी और पूंजी तक बेहतर पहुंच मिल सकती है। साथ ही इससे विनिर्माण क्षेत्र के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं और लचीली आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत किया जा सकता है।

--आईएएनएस

डीबीपी

Share this story

Tags