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भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद 'नेगेटिव' से 'स्टेबल' हुआ भारतीय वस्त्र क्षेत्र का आउटलुक

नई दिल्ली, 11 फरवरी (आईएएनएस)। अमेरिका द्वारा भारतीय सामान पर लगाए गए टैरिफ (आयात शुल्क) को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने के बाद भारतीय वस्त्र (निर्यात) क्षेत्र को बड़ी राहत मिली है। बुधवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, अब इस सेक्टर का आउटलुक 'नेगेटिव' से बढ़ाकर 'स्टेबल' कर दिया गया है।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद 'नेगेटिव' से 'स्टेबल' हुआ भारतीय वस्त्र क्षेत्र का आउटलुक

नई दिल्ली, 11 फरवरी (आईएएनएस)। अमेरिका द्वारा भारतीय सामान पर लगाए गए टैरिफ (आयात शुल्क) को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने के बाद भारतीय वस्त्र (निर्यात) क्षेत्र को बड़ी राहत मिली है। बुधवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, अब इस सेक्टर का आउटलुक 'नेगेटिव' से बढ़ाकर 'स्टेबल' कर दिया गया है।

रेटिंग एजेंसी आईसीआरए की रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले वित्त वर्ष 2026-27 में वस्त्र निर्यात से होने वाली कमाई में 8 से 11 प्रतिशत तक की बढ़त हो सकती है। हालांकि वित्त वर्ष 2025-26 में निर्यात में 3 से 5 प्रतिशत तक की गिरावट का अनुमान है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत और अमेरिका के बीच हाल की व्यापार बातचीत से इस सेक्टर को राहत मिली है। हालांकि वित्त वर्ष 2026 में कंपनियों का मुनाफा घटकर करीब 7.7 प्रतिशत तक आ सकता है, लेकिन वित्त वर्ष 2027 में यह फिर से बढ़कर लगभग 9.5 प्रतिशत होने की उम्मीद है।

वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का वस्त्र निर्यात 16 अरब डॉलर रहा, जिसमें से लगभग एक-तिहाई हिस्सा अमेरिका को गया।

आईसीआरए लिमिटेड के कॉरपोरेट रेटिंग्स के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और ग्रुप हेड जितिन मक्कड़ ने कहा कि पिछले साल अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ाने से कपड़ा, हीरा और चमड़ा जैसे निर्यात-आधारित उद्योगों को काफी नुकसान हुआ था।

उन्होंने बताया कि कपड़ा निर्यातकों को पिछले कुछ महीनों में अपने अमेरिकी ग्राहकों को छूट देनी पड़ी, जिससे उनका मुनाफा लगभग 2 प्रतिशत तक घट गया।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका द्वारा टैरिफ में कटौती, भारत-यूरोप मुक्त व्यापार समझौते और अन्य द्विपक्षीय समझौते आने वाले समय में भारत के मैन्युफैक्चरिंग निर्यात को मजबूत करेंगे।

टैरिफ में कमी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक व्यापार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इससे भारतीय निर्यातकों को राहत मिलेगी और उनकी लागत प्रतिस्पर्धा बेहतर होगी।

इसका फायदा खासकर श्रम-आधारित उद्योगों जैसे कपड़ा, कट और पॉलिश किए गए हीरे, समुद्री उत्पाद और फुटवियर सेक्टर को मिलेगा।

हालांकि आईसीआरए का मानना है कि लंबी अवधि में भारतीय कंपनियां जोखिम कम करने के लिए अलग-अलग देशों में अपने बाजार बढ़ाने की रणनीति अपनाएंगी, ताकि वे किसी एक देश पर ज्यादा निर्भर न रहें।

--आईएएनएस

डीबीपी/

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