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वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारत की आर्थिक वृद्धि दर लगातार मजबूत बनी हुई है: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। वैश्विक स्तर पर आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ने की आशंकाओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव, व्यापारिक अनिश्चितताओं और सख्त वित्तीय परिस्थितियों के बावजूद भारत ने मजबूत आर्थिक वृद्धि बनाए रखी है और वह दुनिया की प्रमुख विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में सबसे आगे बना हुआ है।

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। वैश्विक स्तर पर आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ने की आशंकाओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव, व्यापारिक अनिश्चितताओं और सख्त वित्तीय परिस्थितियों के बावजूद भारत ने मजबूत आर्थिक वृद्धि बनाए रखी है और वह दुनिया की प्रमुख विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में सबसे आगे बना हुआ है।

तंजानिया के समाचार प्रकाशन द गार्जियन (आईपीपी मीडिया) में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, प्रमुख वैश्विक संस्थानों द्वारा भारत की जीडीपी वृद्धि दर के अनुमानों में लगातार ऊपर की ओर संशोधन किया जाना इस बात का संकेत है कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण ग्रोथ इंजन बन चुका है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्यात विविधीकरण, डिजिटल परिवर्तन, राजकोषीय अनुशासन और ऊर्जा सुरक्षा जैसे कारक भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत कर रहे हैं और दीर्घकालिक तथा समावेशी आर्थिक विकास को समर्थन दे रहे हैं।

हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत की विकास दर का अनुमान 2026 और 2027 दोनों वर्षों के लिए बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। इससे भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करता दिखाई देता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह प्रदर्शन मजबूत घरेलू मांग और बाहरी झटकों से निपटने की क्षमता का परिणाम है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत उसका विशाल और विविधतापूर्ण घरेलू बाजार है। घरेलू उपभोग, निजी निवेश और बुनियादी ढांचे पर सार्वजनिक खर्च मिलकर आर्थिक गतिविधियों का व्यापक आधार तैयार करते हैं। यही कारण है कि जब वैश्विक मांग कमजोर होती है या अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ती है, तब भी भारतीय अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत सुरक्षित बनी रहती है।

निजी उपभोग ऑटोमोबाइल, आवास, पर्यटन, स्वास्थ्य सेवा और वित्तीय सेवाओं जैसे कई क्षेत्रों को गति दे रहा है। बढ़ती आय, शहरीकरण, डिजिटल पहुंच और बेहतर कनेक्टिविटी मांग बढ़ाने के साथ-साथ निवेश एवं नवाचार को भी प्रोत्साहित कर रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के तेजी से विस्तार ने देश की आर्थिक गतिविधियों की प्रकृति बदल दी है। डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और प्रौद्योगिकी आधारित सरकारी सेवाओं ने लेन-देन की लागत घटाई है और बाजार तक पहुंच को आसान बनाया है। इससे छोटे व्यवसायों को भी अपने पारंपरिक भौगोलिक दायरे से बाहर ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिला है।

इसके अलावा परिवहन, लॉजिस्टिक्स, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी से जुड़े बुनियादी ढांचे में निवेश भारत की आर्थिक मजबूती को और बढ़ा रहा है। इससे लागत कम हो रही है, बाजारों तक पहुंच का विस्तार हो रहा है और वस्तुओं तथा सेवाओं की आवाजाही अधिक कुशल बन रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026-27 में भारत का निर्यात 1 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। साथ ही 2030 तक इसे 2 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। विनिर्माण क्षेत्र ने भी वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 9.2 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने अपनी मजबूत घरेलू आर्थिक बुनियाद और सक्रिय नीतिगत प्रबंधन के दम पर वैश्विक अस्थिरता का सफलतापूर्वक सामना किया है। यही अनुकूलन क्षमता और संरचनात्मक मजबूती आने वाले वर्षों में भारत को वैश्विक विकास की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

--आईएएनएस

डीबीपी

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