भारत औसत वैश्विक लागत के मुकाबले 40 प्रतिशत कम दाम पर ग्रीन जेट ईंधन का कर सकता है उत्पादन: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 21 जुलाई (आईएएनएस)। भारत सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (एसएएफ) के उत्पादन के लिए एक विशिष्ट स्थिति में है और मजबूत रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता के दम पर ग्लोबल बेंचमार्क के मुकाबले 40 प्रतिशत तक की कम लागत पर एसएफ का उत्पादन कर सकता है। यह जानकारी यूसी बर्कले के आईईसीसी और एनर्जी इनोवेशन के संयुक्त अध्ययन में दी गई।
ऑयलप्राइस डॉट कॉम पर दी गई इस रिपोर्ट में बताया गया कि भारत कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता की अपनी कमजोरी को पावर-एंड-बायोमास-टू-लिक्विड्स (पीबीटीएल) तकनीक के जरिए अरबों डॉलर के निर्यात के अवसर में बदल सकता है, जिसमें एसएएफ में 2030 तक 9 अरब डॉलर और 2040 तक 30 अरब डॉलर के निर्यात अवसर मौजूद होंगे।
रिपोर्ट में आगे बताया गया कि भारत में हर साल बड़ी मात्रा में अतिरिक्त फसल अवशेष पैदा होता है, जिसे किसान अकसर जला देते हैं। यदि इस अतिरिक्त फसल अवशेष का सिर्फ 4 प्रतिशत एकत्र कर लिया जाए, तो उससे दुनिया की एसएएफ की कुल जरूरत का 25 प्रतिशत पूरा किया जा सकता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और स्थानीय समुदायों के लिए आय के नए स्रोत भी बनेंगे।
पीबीटीएल तकनीक खाद्यान्न फसलों के बजाय फसल अवशेष और वानिकी अपशिष्ट का उपयोग करती है। इससे पारंपरिक जैव ईंधनों (बायोफ्यूल) पर लगने वाली उस प्रमुख आलोचना से बचा जा सकता है कि वे खाद्य फसलों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं। यदि इस तकनीक को कार्बन कैप्चर एंड स्टोरेज (सीसीएस) के साथ जोड़ा जाए, तो यह अपने पूरे जीवनचक्र में जितनी कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित करती है, उससे अधिक मात्रा वातावरण से हटाने की क्षमता भी रख सकती है।
भारत सरकार ने 2030 तक विमान ईंधन में 5 प्रतिशत एसएएफ मिश्रण का लक्ष्य तय किया है। इससे देश में एसएएफ के लिए एक सुनिश्चित और विनियमित घरेलू बाजार तैयार होगा, साथ ही वैश्विक निर्यात की संभावनाओं को भी मजबूती मिलेगी। एसएएफ में निवेश का उद्देश्य भारत की जेट ईंधन की अस्थिर अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर निर्भरता को भी कम करना है।
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