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एआई युग की तैयारी में गुजरात, नई डेटा सेंटर नीति से 17 लाख करोड़ निवेश की उम्मीद

गांधीनगर, 11 सितंबर (आईएएनएस)। गुजरात ने अपनी नई डेटा सेंटर नीति के तहत 7.5 गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह देश की मौजूदा 1.5 गीगावाट क्षमता से लगभग पांच गुना अधिक है। यह जानकारी राज्य के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने शुक्रवार को विधानसभा में दी।

गांधीनगर, 11 सितंबर (आईएएनएस)। गुजरात ने अपनी नई डेटा सेंटर नीति के तहत 7.5 गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह देश की मौजूदा 1.5 गीगावाट क्षमता से लगभग पांच गुना अधिक है। यह जानकारी राज्य के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने शुक्रवार को विधानसभा में दी।

उन्होंने बताया कि नई नीति का उद्देश्य गुजरात को देश का प्रमुख डेटा सेंटर हब बनाना है और इसके माध्यम से बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।

मोढवाडिया ने 'विकसित गुजरात-डाटा सेंटर पॉलिसी 2026-2029' के तहत मिलने वाले प्रोत्साहन और फायदों से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि राज्य डाटा स्टोरेज और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करके उभरते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इकोसिस्टम में अहम भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है।

उन्होंने कहा, "आज के दौर में डाटा सेंटर तेल के कुओं की तरह हैं और गुजरात इस दिशा में आगे बढ़ रहा है।"

मोढवाडिया ने बताया कि अभी दुनियाभर में 122 गीगावाट क्षमता वाले डाटा सेंटर काम कर रहे हैं। अमेरिका में 4,423 डाटा सेंटर हैं जिनकी कुल क्षमता 53 गीगावाट है, जो दुनिया की कुल क्षमता का 44 प्रतिशत है।

यूनाइटेड किंगडम में 2.5 गीगावाट क्षमता वाले 555 डाटा सेंटर हैं, जबकि चीन में 31 गीगावाट क्षमता वाले 369 डाटा सेंटर हैं, जो दुनिया की कुल क्षमता का 26 प्रतिशत है। यूरोप की क्षमता 11.9 गीगावाट है, जबकि जापान और दक्षिण कोरिया की कुल क्षमता 6.6 गीगावाट है।

जर्मनी में 523 डाटा सेंटर हैं। उन्होंने कहा, "भारत दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत डाटा बनाता है, लेकिन अभी इसका केवल 2 से 2.5 प्रतिशत ही स्टोर करता है। दुनिया की कुल डाटा-सेंटर क्षमता में भारत का हिस्सा लगभग 2 प्रतिशत है। अमेरिका की 53 जीडब्‍ल्‍यू क्षमता के मुकाबले भारत की क्षमता 1.5 जीडब्‍ल्‍यू है।"

उन्होंने कहा कि गुजरात की नई पॉलिसी का मकसद बड़े पैमाने पर निवेश को बढ़ावा देकर इस अंतर को कम करना है। राज्य को पहले ही 17 पार्टियों से 19 प्रोजेक्ट्स के लिए लगभग 17 जीडब्‍ल्‍यू की क्षमता के लिए दिलचस्पी दिखाने वाले प्रस्ताव (ईओआई) मिल चुके हैं।

मोढवाडिया ने कहा, "हमने 7.5 जीडब्‍ल्‍यू क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। भारत की मौजूदा क्षमता 1.5 जीडब्‍ल्‍यू है, जबकि अकेले गुजरात ने ही 7.5 जीडब्‍ल्‍यू का लक्ष्य तय किया है।"

उन्होंने कहा कि सरकार की योजना इस पॉलिसी के तहत खास प्रोत्साहन देने की है और शुरुआत में एक ही चरण में 7.5 गीगावाट क्षमता वाले प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने का इरादा है, जिसके बाद जरूरत और उपलब्ध क्षमता के आधार पर आगे के फैसले किए जाएंगे।

उन्होंने कहा, "अगर सभी आवेदन असल में प्रोजेक्ट्स में बदल जाते हैं, तो प्रस्तावित निवेश 17 लाख करोड़ रुपए से ज्‍यादा हो सकता है। आवेदकों में देश और विदेश, दोनों तरह की कंपनियां शामिल हैं।"

उन्होंने बताया कि सरकार ने गिफ्ट सिटी में इकोसिस्टम को बढ़ाने का काम शुरू कर दिया है और लगभग छह महीने पहले, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में योटा टेक्नोलॉजी और शारजाह सरकार के साथ मिलकर एक डाटा सेंटर बनाने की योजना बनाई गई थी।

मंत्री ने डाटा सेंटर्स के विकास को धोलेरा से भी जोड़ा, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि इसे लगभग 900 वर्ग किलोमीटर के इलाके में एक बड़े हाई-टेक इंडस्ट्रियल हब के तौर पर विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "हमारा धोलेरा न सिर्फ गुजरात का, बल्कि देश का एक बड़ा स्मार्ट शहर बनने जा रहा है।"

मोढवाडिया ने कहा कि धोलेरा चीन और ताइवान के कई हाई-टेक शहरों से बड़ा और दिल्ली के आकार से तीन गुना बड़ा होगा। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि साल 2000 में इस इलाके में जमीन की कीमत लगभग 1,500 रुपए प्रति एकड़ थी।

उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट को स्थानीय लोगों और नेताओं का समर्थन मिला, जिन्होंने इसकी भविष्य की संभावनाओं को समझा और जमीन अधिग्रहण व विकास में सहयोग किया।

मंत्री के अनुसार, धोलेरा में प्रोजेक्ट लगाने वाले डाटा-सेंटर निवेशकों को 2.5 प्रतिशत की अतिरिक्त कैपिटल सब्सिडी भी मिलेगी।

मोढवाडिया ने कहा कि राज्य में बिजली की उपलब्धता और रिन्यूएबल एनर्जी की क्षमता डाटा-सेंटर सेक्टर के लिए बड़े फायदे हैं, क्योंकि इस सेक्टर को बहुत ज्‍यादा बिजली की जरूरत होती है।

उन्होंने कहा, "गुजरात और राजस्थान ग्रीन-एनर्जी बनाने में आगे हैं, और गुजरात अभी देश में ग्रीन-एनर्जी प्रोडक्शन में नंबर वन है। नई पॉलिसी के तहत, डाटा सेंटर्स को 51 प्रतिशत ग्रीन-एनर्जी बिजली मिल सकेगी।"

पानी की जरूरतें पूरी करने के लिए डिसेलिनेशन प्लांट लगाए जाएंगे और डिसेलिनेटेड पानी के इस्तेमाल के लिए इंसेंटिव दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि नई टेक्नोलॉजी से पानी को रीसायकल किया जा सकेगा, जिससे पानी के स्रोतों पर दबाव कम होगा।

उन्होंने कहा, "भारत में यह इकलौती ऐसी पॉलिसी है जो यूजर्स, प्रोड्यूसर्स और पर्यावरण, तीनों के लिए फायदेमंद है।"

मंत्री ने कहा कि डाटा सेंटर्स की क्षमता आम तौर पर 50-100 मेगावॉट से लेकर 2 गीगावाट तक होती है, खासकर इंटरनेशनल कंपनियों के मामले में, जबकि गुजरात ने कम से कम 150 मेगावॉट क्षमता की शर्त रखी है।

उन्होंने कहा कि सबमरीन केबल कनेक्टिविटी इस इकोसिस्टम के विकास के लिए बहुत जरूरी होगी, क्योंकि ज्‍यादातर ग्लोबल कम्युनिकेशन ट्रैफ‍िक समुद्र के नीचे बिछी केबलों के जरिए ही होता है। इसलिए केबल लैंडिंग स्टेशन बनाए जाएंगे और इसके इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक अलग पॉलिसी भी लाई जाएगी।

उन्होंने कहा, "गिफ्ट सिटी में डाटा सेंटरों को सपोर्ट करने के लिए दीव या चोरवाड़ में केबल लैंडिंग स्टेशन बनाए जा सकते हैं। साथ ही पोरबंदर, सूरत और धोलेरा जैसी जगहों पर भी विचार किया जा रहा है।"

मोढवाडिया ने कहा कि यह उभरता हुआ सेक्टर सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से हाई-टेक रोजगार पैदा कर सकता है और विदेशों में काम कर रहे भारतीय प्रोफेशनल्स को वापस लाकर 'रिवर्स माइग्रेशन' (वापसी) में योगदान दे सकता है।

उन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन किए गए तीन सेमीकंडक्टर प्लांट का ज‍िक्र करते हुए कहा कि उन प्रोजेक्ट्स से जुड़े कई सीईओ और सीनियर एग्जीक्यूटिव विदेशों से भारत लौट आए हैं।

उन्होंने कहा, "इससे रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा मिलेगा और यह क्रांति नई पीढ़ी के लिए नए मौके पैदा करेगी।"

मोढवाडिया ने कहा कि राज्य की कोशिशों का मकसद यह पक्का करना है कि जब भारत एआई के दौर में प्रवेश करे, तो गुजरात उसमें अहम भूमिका निभाए।

उन्होंने कहा, "पहले, जब कंप्यूटर क्रांति और आईटी क्रांति आई थी, तो भारत के पास उन दौरों में नेतृत्व करने का मौका था। हमारे युवाओं ने उस मौके का फायदा उठाया और आज वे ग्लोबल मंच पर सबसे आगे हैं, लेकिन अफसोस की बात है कि उस समय राज्य सरकारों और केंद्र सरकार को जो नेतृत्व करना चाहिए था, वह नहीं किया गया।"

--आईएएनएस

एएसएच/वीसी

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