आईआईटी रुड़की और डब्ल्यूआरआई इंडिया ने टिकाऊ बैटरी और स्वच्छ ऊर्जा अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए साइन किया एमओयू
नई दिल्ली, 20 जून (आईएएनएस)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की और डब्ल्यूआरआई इंडिया ने शनिवार को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी का उद्देश्य टिकाऊ बैटरी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, संसाधन दक्षता, बैटरी रीसाइक्लिंग, स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन और नीति अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करना है।
इस साझेदारी के तहत दोनों संस्थान संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, शैक्षणिक सहयोग, नीति अध्ययन, ज्ञान-साझाकरण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, सम्मेलनों तथा छात्रों और शिक्षकों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देंगे। दोनों संस्थान टिकाऊ परिवहन, बैटरी तकनीक, महत्वपूर्ण खनिज मूल्य शृंखला और सर्कुलर इकोनॉमी से जुड़े विषयों पर मिलकर काम करेंगे।
यह सहयोग ऐसे समय में हुआ है जब भारत में नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और उन्नत विनिर्माण क्षेत्र का तेजी से विस्तार हो रहा है। इसके कारण टिकाऊ बैटरी तकनीकों, मजबूत आपूर्ति शृंखलाओं और संसाधनों के बेहतर उपयोग की मांग लगातार बढ़ रही है।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रोफेसर कमल किशोर पंत ने कहा कि टिकाऊ और आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग, अनुसंधान संगठनों और नीति निर्माताओं के बीच मजबूत सहयोग आवश्यक है।
उन्होंने कहा, "टिकाऊ और आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य की ओर बढ़ने के लिए शिक्षा जगत, उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और नीति निर्माताओं के बीच मजबूत सहयोग जरूरी है।"
उन्होंने आगे कहा, "डब्ल्यूआरआई इंडिया के साथ यह साझेदारी अनुसंधान, नवाचार, क्षमता निर्माण और ज्ञान सृजन के नए अवसर पैदा करेगी। इससे टिकाऊ बैटरियों, सर्कुलर इकोनॉमी, महत्वपूर्ण खनिजों और स्वच्छ परिवहन जैसे क्षेत्रों में भारत की ऊर्जा परिवर्तन यात्रा को मजबूती मिलेगी।"
आईआईटी रुड़की के प्रायोजित अनुसंधान एवं औद्योगिक परामर्श (एसआरआईसी) के डीन प्रोफेसर विवेक कुमार मलिक ने कहा कि यह समझौता संयुक्त अनुसंधान और शैक्षणिक सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण ढांचा प्रदान करता है।
उन्होंने कहा, "यह एमओयू संयुक्त अनुसंधान, शैक्षणिक आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के लिए एक मजबूत आधार उपलब्ध कराता है।"
उन्होंने आगे कहा, "आईआईटी रुड़की की अनुसंधान क्षमताओं और डब्ल्यूआरआई इंडिया की सतत विकास एवं नीति निर्माण संबंधी विशेषज्ञता को मिलाकर हम ऐसे परिणाम हासिल करना चाहते हैं जो तकनीकी प्रगति और तथ्य-आधारित निर्णय लेने में योगदान दें।"
इस समझौते पर आईआईटी रुड़की की ओर से एसआरआईसी के डीन प्रोफेसर विवेक कुमार मलिक और डब्ल्यूआरआई इंडिया की ओर से एकीकृत परिवहन, स्वच्छ वायु और हाइड्रोजन कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक पवन कुमार मुलुकुटला ने हस्ताक्षर किए।
--आईएएनएस
डीबीपी

