गूगल ने एक्सेलरेटर इंडिया 2026 के लिए 20 एआई-केंद्रित भारतीय स्टार्टअप्स का किया चयन
नई दिल्ली, 8 जुलाई (आईएएनएस)। गूगल ने बुधवार को गूगल फॉर स्टार्टअप्स एक्सेलरेटर: इंडिया कार्यक्रम के 2026 बैच की घोषणा करते हुए लगभग 2,500 आवेदनों में से 20 एआई-फर्स्ट भारतीय स्टार्टअप्स का चयन किया। यह घोषणा भारत में कंपनी के एक्सेलरेटर कार्यक्रमों के 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर की गई।
नया स्टार्टअप समूह इस बात का संकेत है कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम अब केवल बड़े भाषा मॉडल (लार्ज लैंग्वेज मॉडल-एलएलएम) आधारित एप्लिकेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि एजेंटिक और मल्टीमॉडल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रणालियों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। चयनित स्टार्टअप्स स्वास्थ्य सेवा, जलवायु प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाओं, कानूनी सेवाओं, विनिर्माण, साइबर सुरक्षा और डेवलपर टूल्स जैसे क्षेत्रों के लिए समाधान विकसित कर रहे हैं।
गूगल के अनुसार, चुने गए स्टार्टअप्स ऐसी अगली पीढ़ी के एआई-आधारित प्रोडक्ट तैयार कर रहे हैं, जो वास्तविक जीवन की जटिल समस्याओं का समाधान करने के साथ-साथ एआई को भौतिक वातावरण और एंटरप्राइज वर्कफ्लो का हिस्सा बना रहे हैं।
एक्सेलरेटर कार्यक्रम के तहत इन स्टार्टअप्स को गूगल की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी, तकनीकी मार्गदर्शन, उत्पाद विकास में सहयोग और वैश्विक स्तर पर कारोबार विस्तार के लिए गो-टू-मार्केट मेंटरशिप उपलब्ध कराई जाएगी।
इस घोषणा पर गूगल इंडिया की उपाध्यक्ष एवं कंट्री मैनेजर प्रीति लोबाना ने कहा कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम अब ऐसे नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां एजेंटिक वर्कफ्लो और भौतिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रणालियां वास्तविक दुनिया की महत्वपूर्ण चुनौतियों का समाधान करने में सक्षम हैं।
उन्होंने कहा, "भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम एजेंटिक वर्कफ्लो और भौतिक एआई प्रणालियों के नए युग में प्रवेश कर रहा है, जिन्हें वास्तविक और महत्वपूर्ण चुनौतियों के समाधान के लिए विकसित किया गया है। गूगल एक्सेलरेटर कार्यक्रमों के 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 2026 का भारतीय बैच इस तकनीकी बदलाव का अग्रदूत है।"
2026 बैच में कई क्षेत्रों के स्टार्टअप्स को शामिल किया गया है।
अदालत एआई नामक लीगल टेक स्टार्टअप अदालतों की क्लेरिकल प्रक्रियाओं को स्वचालित करने और मामलों के निपटारे की गति बढ़ाने के लिए एंड-टू-एंड एआई आधारित न्याय मंच विकसित कर रहा है।
हेल्थकेयर स्टार्टअप कंपनियां ऐकेनिस्ट और फ्लेक्सिफाईमी क्रमशः रेडियोलॉजी वर्कफ्लो को बेहतर बनाने और पुराने दर्द (क्रॉनिक पेन) से उबरने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर रहे हैं।
जलवायु क्षेत्र के स्टार्टअप ऑराश्योर और फिटसोल हाइपरलोकल जलवायु निगरानी, कार्बन ट्रैकिंग और एंटरप्राइज सस्टेनेबिलिटी के लिए एआई-आधारित समाधान विकसित कर रहे हैं।
फैशन टेक्नोलॉजी स्टार्टअप आयना ब्रांड्स को एआई-आधारित प्रोडक्ट कैटलॉग तैयार करने में मदद कर रहा है, जबकि वित्तीय क्षेत्र की कंपनियां बाइनॉक्स, डोडो पेमेंट्स और ऑनफाइनेंसएआई ड्यू डिलिजेंस, मर्चेंट सेवाओं, अनुपालन (कॉम्प्लायंस) और जोखिम प्रबंधन को स्वचालित करने के लिए एआई का उपयोग कर रही हैं।
डेवलपर्स के लिए काम करने वाले स्टार्टअप क्राफ्टिफएआई, एच2लूप एआई, क्रिएटओएस बाय नोडऑप्स, पाइपशिफ्ट और टार्टनएचक्यू आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर, कोडिंग मॉडल, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म और एंटरप्राइज इंटीग्रेशन समाधान विकसित कर रहे हैं।
विनिर्माण क्षेत्र का स्टार्टअप जिडोका स्वचालित निरीक्षण के लिए एआई-आधारित कंप्यूटर विजन सिस्टम तैयार कर रहा है, जबकि प्रॉक्सजी नामक वियरेबल टेक्नोलॉजी कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और सॉफ्टवेयर ऐज ए सर्विस (सास) को जोड़कर एंटरप्राइज संचालन को डिजिटाइज कर रही है।
इस बैच में साउंडवर्स एआई भी शामिल है, जो संगीत निर्माण के लिए एआई-आधारित टूल विकसित कर रहा है। वहीं सुपरब्रिन वॉयस एआई सिस्टम की विश्वसनीयता बढ़ाने पर काम कर रहा है, जबकि साइबर सुरक्षा स्टार्टअप जेरॉन सॉफ्टवेयर और क्लाउड सिस्टम की कमजोरियों की पहचान कर उन्हें दूर करने के लिए एआई-आधारित सुरक्षा एजेंट विकसित कर रहा है।
--आईएएनएस
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