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हफ्ते भर में सोने की कीमतों में 1.17 प्रतिशत तो चांदी में 3.4 प्रतिशत की उछाल, कच्चे तेल में नरमी से मिला सपोर्ट

नई दिल्ली, 19 सितंबर (आईएएनएस)। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से सोने की कीमतों को सपोर्ट मिला और साप्ताहिक आधार पर पीली धातु में 1.17 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। वहीं सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन सोने और चांदी दोनों की कीमतों में उछाल देखने को मिली।

नई दिल्ली, 19 सितंबर (आईएएनएस)। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से सोने की कीमतों को सपोर्ट मिला और साप्ताहिक आधार पर पीली धातु में 1.17 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। वहीं सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन सोने और चांदी दोनों की कीमतों में उछाल देखने को मिली।

शुक्रवार को एमसीएक्स पर अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट वाला गोल्ड 0.84 प्रतिशत यानी 1,282 रुपए की बढ़त के साथ 1,54,263 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। दिन के कारोबार में एक समय इसने 1,54,600 रुपए का हाई टच किया, जबकि 1,52,171 रुपए का लो छुआ।

वहीं, दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी 0.16 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,42,000 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। दिन के कारोबार में एक समय इसने 2,43,047 रुपए का हाई टच किया, जबकि 2,38,173 रुपए का लो बनाया।

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने के 10 ग्राम की कीमत शुक्रवार को 1,53,727 रुपए रही, जो पिछले शुक्रवार (11 सितंबर) के 1,51,938 रुपए के स्तर से 1.17 प्रतिशत यानी 1,789 रुपए अधिक है। इससे सप्ताहभर में करीब 1.17 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई।

वहीं आईबीजेए के अनुसार, चांदी गुरुवार के 2,29,642 रुपए से 3.16 प्रतिशत यानी 7,266 रुपए चढ़कर 2,36,908 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई, जो पिछले शुक्रवार के 2,28,920 रुपए से 3.48 प्रतिशत यानी 7,988 रुपए की बढ़त को दर्शाता है।

विश्लेषकों के अनुसार, सप्ताह की शुरुआत में मध्य पूर्व में आपूर्ति से जुड़े जोखिमों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के संकेतों के कारण कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा। इस दौरान ब्याज दरों में वृद्धि की आशंका के चलते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ी, जिससे बिना ब्याज वाली परिसंपत्तियों जैसे सोने पर दबाव आया।

हालांकि, सप्ताह के दौरान कच्चे तेल की कीमतें लगातार तीन सत्रों तक गिरकर 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं। बाजार को यह महसूस हुआ कि सऊदी अरब की प्रमुख पाइपलाइन बंद होने का असर शुरुआती आशंकाओं की तुलना में आपूर्ति पर कम पड़ेगा। इससे ऊर्जा महंगाई को लेकर चिंताएं घटीं और सोने को समर्थन मिला।

इसके बावजूद यह राहत ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी, क्योंकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अपेक्षा से अधिक सख्त रुख ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया। फेड ने इस सप्ताह 25 बेसिस पॉइंट की ब्याज दर वृद्धि करते हुए फेडरल फंड्स दर को 3.75 प्रतिशत से 4 प्रतिशत के दायरे में पहुंचा दिया।

फेड अधिकारियों के अधिकांश संकेत यह बताते हैं कि इस वर्ष आगे भी मौद्रिक सख्ती जारी रह सकती है। इसके बाद बाजार ने अक्टूबर में एक और दर वृद्धि की संभावना लगभग 55 प्रतिशत तक आंकी। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत से ऊपर पहुंचने के बाद सोना और चांदी दोनों में मुनाफावसूली देखी गई।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी ने सोने की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। चांदी को लगातार छठे वर्ष संभावित आपूर्ति घाटे का समर्थन मिला। वर्ष 2026 में चांदी की आपूर्ति में लगभग 4.63 करोड़ औंस की कमी रहने का अनुमान लगाया जा रहा है।

तकनीकी दृष्टि से विश्लेषकों का मानना है कि कॉमेक्स गोल्ड के लिए 4,470-4,500 डॉलर का क्षेत्र निकट अवधि का प्रमुख प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) है, जबकि 4,300-4,340 डॉलर का क्षेत्र महत्वपूर्ण समर्थन (सपोर्ट) माना जा रहा है।

वहीं एमसीएक्स गोल्ड के लिए 1,54,000 से 1,54,700 रुपए का दायरा तत्काल प्रतिरोध क्षेत्र है, जबकि 1,50,000 से 1,50,700 रुपए का स्तर मजबूत समर्थन प्रदान कर सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी ब्याज दरों, बॉन्ड यील्ड और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर बनी रहेगी, जो सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

--आईएएनएस

डीबीपी

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