वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और जू जियायी ने भारत-एआईआईबी साझेदारी को और मजबूत करने पर की चर्चा
नई दिल्ली, 12 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) की अध्यक्ष जू जियायी के साथ बैठक कर भारत और एआईआईबी के बीच सहयोग को और गहरा करने के अवसरों पर चर्चा की। बैठक में भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और परिवहन कनेक्टिविटी प्राथमिकताओं को समर्थन देने, स्थानीय मुद्रा में वित्तपोषण बढ़ाने, निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने तथा एआईआईबी की वैश्विक उपस्थिति मजबूत करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत की तेजी से बढ़ती अवसंरचना आवश्यकताओं को पूरा करने और दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों को हासिल करने में एआईआईबी की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है। विशेष रूप से परिवहन कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और सतत विकास से जुड़ी परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
जू जियायी 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंची हैं। विदेश मंत्रालय ने उनके स्वागत में कहा कि यह यात्रा सतत विकास को बढ़ावा देने और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए नए अवसरों का विस्तार करने वाली साझेदारियों को और मजबूत करेगी।
इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रूसी संघ के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव से भी मुलाकात की। इस दौरान, दोनों नेताओं के बीच भारत और रूस के आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा हुई।
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) पर वार्ता को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई, जिसका उद्देश्य निवेश प्रवाह को बढ़ावा देने और दोनों देशों के बीच आर्थिक जुड़ाव को मजबूत करने के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी ढांचा तैयार करना है।
इसके अलावा, वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ। भारत और रूस के बीच बढ़ते व्यापारिक संबंधों को देखते हुए वित्तीय क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने पर जोर दिया गया।
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान 'नई दिल्ली घोषणा पत्र 2026' को सर्वसम्मति से अपनाए जाने की घोषणा की।
'समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत बनाने' विषय पर आयोजित सत्र के समापन संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह घोषणा पत्र सदस्य देशों के साझा संकल्पों को स्पष्ट दिशा प्रदान करता है।
उन्होंने कहा, "आज अपनाया गया नई दिल्ली घोषणा पत्र हमारे साझा संकल्प को स्पष्ट दिशा देता है। अब हमारी जिम्मेदारी है कि इन संकल्पों को ठोस परिणामों में बदला जाए।"
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ब्रिक्स नेताओं के बीच क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों के साथ-साथ संगठन के भीतर सहयोग को और मजबूत बनाने की प्राथमिकताओं पर व्यापक चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री मोदी ने इन चर्चाओं को "सार्थक और रचनात्मक" बताते हुए कहा कि आज की बातचीत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बदलती वैश्विक व्यवस्था को पुरानी संस्थाओं के जरिए प्रभावी ढंग से संचालित नहीं किया जा सकता।
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