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यूरोपीय यूनियन का चीन को बड़ा झटका, सस्ते सामानों पर लगाई 3 यूरो की एक समान कस्टम ड्यूटी

नई दिल्ली, 6 जुलाई (आईएएनएस)। यूरोपीय यूनियन (ईयू) ने सस्ते सामानों पर 3 यूरो की एक समान कस्टम ड्यूटी लगाकर चीन को बड़ा झटका दिया है। इस कदम के जरिए ईयू की कोशिश चीन जैसे देशों से हो रहे आयात को संतुलित करना और पारदर्शिता को बढ़ाना है। यह जानकारी ग्रीक सिटी टाइम्स के आर्टिकल में दी गई।

नई दिल्ली, 6 जुलाई (आईएएनएस)। यूरोपीय यूनियन (ईयू) ने सस्ते सामानों पर 3 यूरो की एक समान कस्टम ड्यूटी लगाकर चीन को बड़ा झटका दिया है। इस कदम के जरिए ईयू की कोशिश चीन जैसे देशों से हो रहे आयात को संतुलित करना और पारदर्शिता को बढ़ाना है। यह जानकारी ग्रीक सिटी टाइम्स के आर्टिकल में दी गई।

ईयू की एएडीई (पब्लिक रेवेन्यू के लिए इंडिपेंडेंट अथॉरिटी) ने घोषणा की है कि 150 यूरो तक की कम कीमत वाले आयातित सामान पर कस्टम ड्यूटी से मिलने वाली छूट खत्म की जा रही है, जिसका सीधा असर विदेश से ऑनलाइन शॉपिंग पर पड़ेगा। अगले बुधवार से, ग्रीस और यूरोपियन यूनियन में कस्टम्स पर, बी2सी डिस्टेंस सेल्स के लिए हर डिक्लेरेशन लाइन पर 3 यूरो की एक खास एक समान शुल्क लगाया जाएगा।

इस उपाय का असर पहले से ही लोगों की दिख रहा है, क्योंकि कई ग्राहक कुल लागत में भारी बढ़ोतरी देखकर अपनी खरीदारी रद्द कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, तीन अलग-अलग उत्पादों पर लगने वाली एक समान शुल्क के कारण 6 यूरो के ऑर्डर पर 9 यूरो का अतिरिक्त खर्च जुड़ सकता है। इस तरह कुल खर्च 15 यूरो तक पहुंच जाता है, जिससे चीन या अमेरिका जैसे देशों से खरीदारी करना पहले के मुकाबले कम आकर्षक हो गया है।

यह नई स्पेशल ड्यूटी अस्थाई है और एक जुलाई, 2028 तक लागू रहेगी। उसके बाद सभी ई-कॉमर्स गुड्स पर स्टैंडर्ड टैरिफ रेट के मुताबिक ही शुल्क लगेगा,चाहे वैल्यू कुछ भी हो।

कस्टम अधिकारी और इकोनॉमिक ऑपरेटर पहले से ही नए फ्रेमवर्क को लागू कर रहे हैं। यह ध्यान रखना जरूरी है कि अगर कोई ऑर्डर 1 जुलाई के बाद कस्टम से गुजरता है, तो कूरियर डिलीवरी के लिए अतिरिक्त शुल्क मांग सकता है, भले ही मूल खरीदारी करते समय इस खर्च का अंदाजा न लगाया गया हो। रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि हर पार्सल को एक अलग शिपमेंट माना जाता है।

ड्यूटी के सही भुगतान की जिम्मेदारी डिक्लेरेंट (घोषणा करने वाले) की होती है, जो आमतौर पर प्लेटफॉर्म, सेलर या कस्टम प्रतिनिधि होता है। कूरियर कंपनियां सीधे या अप्रत्यक्ष प्रतिनिधि के तौर पर काम करते हुए यह राशि अंतिम उपभोक्ता से वसूल सकती हैं। हालांकि, जब खरीदारी के समय वैट कलेक्शन के लिए आईओएसएस सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है, तो प्रक्रिया आसान हो जाती है, क्योंकि डिलीवरी के समय कोई नई देनदारी नहीं बनती।

पार्सल में मौजूद सामान के बारे में गलत घोषणाओं से निपटने के लिए, प्रोडक्ट आइडेंटिफायर (पीआईडी) पेश किए जा रहे हैं। ये कोड कस्टम अधिकारियों को ज्यादा सटीक जांच करने और सामान की ट्रेसिबिलिटी (पता लगाने की क्षमता) सुनिश्चित करने में मदद करेंगे।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि यह सिस्टम प्लेटफॉर्म और स्टोर के गोदामों में लिस्टेड कोड को स्कैन करेगा।

--आईएएनएस

एबीएस

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