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दिल्ली की नई ईवी पॉलिसी से निवेश बढ़ेगा, मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगी रफ्तार और ग्रीन जॉब्स का होगा सृजन: पीएचडीसीसीआई

नई दिल्ली, 30 जून (आईएएनएस)। उद्योग जगत के नेताओं ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) पॉलिसी 2026 को मंजूरी मिलना एक दूरदर्शी कदम है, जो राजधानी में टिकाऊ शहरी परिवहन को बढ़ावा देने के साथ-साथ निवेश, विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और नवाचार को नई गति देगा। उनका मानना है कि यह नीति भारत के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी।

नई दिल्ली, 30 जून (आईएएनएस)। उद्योग जगत के नेताओं ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) पॉलिसी 2026 को मंजूरी मिलना एक दूरदर्शी कदम है, जो राजधानी में टिकाऊ शहरी परिवहन को बढ़ावा देने के साथ-साथ निवेश, विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और नवाचार को नई गति देगा। उनका मानना है कि यह नीति भारत के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी।

प्रमुख उद्योग संगठन पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) ने कहा कि वह नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरकार और उद्योग जगत के साथ मिलकर काम करेगा। संगठन का उद्देश्य एक मजबूत, प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम विकसित करना है, जो आर्थिक विकास, औद्योगिक बदलाव और पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सके।

पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने कहा कि यह नीति स्वच्छ परिवहन को दिल्ली के भविष्य के आर्थिक विकास और टिकाऊ शहरी विकास का महत्वपूर्ण आधार बनाती है। उन्होंने कहा कि नीति से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तकनीकों में नवाचार को बढ़ावा मिलेगा, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार होगा और ईवी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर यह नीति 'मेक इन इंडिया' अभियान के तहत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण को मजबूत करने के भारत के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है।

नई नीति में इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर वित्तीय प्रोत्साहन, पात्र वाहनों के लिए रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में पूरी छूट, पुराने वाहनों को स्क्रैप करने पर प्रोत्साहन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़े पैमाने पर विस्तार और विभिन्न श्रेणी के वाहनों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बनाने की योजना शामिल है।

सरकार ने पॉलिसी की अवधि के दौरान ईवी इकोसिस्टम के विकास के लिए लगभग 15,000 करोड़ रुपए के निवेश का भी प्रस्ताव रखा है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह नीति केवल इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे बैटरी निर्माण, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, नवीकरणीय ऊर्जा, बिजली वितरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स, सॉफ्टवेयर समाधान, फ्लीट मैनेजमेंट, फाइनेंसिंग, रीसाइक्लिंग और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे कई क्षेत्रों में निवेश बढ़ने की संभावना है।

दिल्ली ईवी पॉलिसी 2.0, जो वर्ष 2030 तक लागू रहेगी, में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े प्रोत्साहन और सख्त प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके तहत 30 लाख रुपए (एक्स-शोरूम) तक की कीमत वाले इलेक्ट्रिक वाहनों पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में 100 प्रतिशत छूट मिलेगी। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर 30,000 रुपए तक, तीनपहिया वाहनों पर 50,000 रुपए तक और पुराने बीएस-IV या उससे पुराने वाहनों को स्क्रैप करने पर 1 लाख रुपए तक का प्रोत्साहन दिया जाएगा।

इस नीति के अनुसार, 31 मार्च 2028 के बाद दिल्ली में नए पेट्रोल से चलने वाले मोटरसाइकिल और स्कूटर का पंजीकरण नहीं किया जाएगा। वहीं, 2026 के अंत के बाद नए सीएनजी ऑटो-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन भी बंद कर दिया जाएगा।

पीएचडीसीसीआई के सीईओ और महासचिव जनरल डॉ. रंजीत मेहता ने कहा कि जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ेगा, वैसे-वैसे उन्नत बैटरी तकनीक, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, चार्जिंग उपकरण, डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म, प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस और स्मार्ट एनर्जी मैनेजमेंट जैसी तकनीकों की मांग भी तेजी से बढ़ेगी। इससे पूरे ईवी उद्योग और उससे जुड़े क्षेत्रों में नए निवेश और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

--आईएएनएस

डीबीपी

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