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चीन तेजी से बदलते वैश्विक हालातों में लगातार खरीद रहा गोल्ड; रिजर्व 2,400 टन के पार

मुंबई, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। चीन वैश्विक स्तर पर तेजी से बदलते आर्थिक ढांचे के बीच लगातार सोना खरीद रहा है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (पीबीओसी) ने सितंबर में करीब 23 टन सोना खरीदा है, यह लगातार 23वां महीना था, जब सरकारी बैंक ने खरीद जारी रखी है। इससे चीन का गोल्ड रिजर्व बढ़कर 2,410 टन के करीब पहुंच गया है। यह जानकारी नाइल पोस्ट के एक आर्टिकल में दी गई।

मुंबई, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। चीन वैश्विक स्तर पर तेजी से बदलते आर्थिक ढांचे के बीच लगातार सोना खरीद रहा है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (पीबीओसी) ने सितंबर में करीब 23 टन सोना खरीदा है, यह लगातार 23वां महीना था, जब सरकारी बैंक ने खरीद जारी रखी है। इससे चीन का गोल्ड रिजर्व बढ़कर 2,410 टन के करीब पहुंच गया है। यह जानकारी नाइल पोस्ट के एक आर्टिकल में दी गई।

आर्टिकल में बताया गया है कि 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद, पश्चिमी देशों की सरकारों द्वारा रूस के विदेशी मुद्रा भंडार को फ्रीज किए जाने से बीजिंग ने सबक लिया है, क्योंकि विदेशों में रखी डॉलर और यूरो वाली संपत्तियां प्रतिबंधों की चपेट में आ सकती हैं। इसके विपरीत, देश के भीतर रखा गया सोना किसी विदेशी जारीकर्ता की देनदारी के दायरे में नहीं आता और इस तरह के प्रतिबंधों का उस पर सीधा असर पड़ने की संभावना कम होती है।

साथ ही, इसका मतलब यह नहीं है कि चीन डॉलर का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करने की तैयारी कर रहा है, बल्कि बीजिंग का इरादा उस वित्तीय प्रणाली पर अपनी निर्भरता कम करने का है, जिसमें वाशिंगटन और उसके सहयोगियों का काफी प्रभाव है।

आर्टिकल में कहा गया कि केवल चीन ही सोने की खरीदारी नहीं कर रहा, बल्कि कई अन्य देश भी हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के केंद्रीय बैंकों ने जुलाई में 23 टन और अगस्त में लगभग 39 टन गोल्ड की शुद्ध खरीदारी की है। यह दिखाता है कि गोल्ड को देश एक अधिक बहुध्रुवीय मौद्रिक प्रणाली और अपने निवेश में विविधता लाने के एक साधन के रूप में देख रहे हैं।

आर्टिकल में यह भी बताया गया है कि रिजर्व एसेट के तौर पर सोने की कुछ सीमाएं हैं। इससे कोई ब्याज नहीं मिलता, इसकी कीमतों में भारी गिरावट आ सकती है, और यह डॉलर की लिक्विडिटी या अमेरिकी ट्रेजरी बाजारों की गहराई की बराबरी नहीं कर सकता। डॉलर के मजबूत होने या वास्तविक ब्याज दरों के बढ़ने से सोने की कीमतें कम हो सकती हैं, इसलिए सोने पर बहुत ज्यादा निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है।

--आईएएनएस

एबीएस

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