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केंद्र ने कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण योजना को मंजूरी दी; 37,500 करोड़ रुपए होंगे खर्च

नई दिल्ली, 13 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने की योजना को मंजूरी दी। इसका वित्तीय परिव्यय 37,500 करोड़ रुपए निर्धारित किया गया।
केंद्र ने कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण योजना को मंजूरी दी; 37,500 करोड़ रुपए होंगे खर्च

नई दिल्ली, 13 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने की योजना को मंजूरी दी। इसका वित्तीय परिव्यय 37,500 करोड़ रुपए निर्धारित किया गया।

आधिकारिक बयान के अनुसार, इस योजना से कोयला उत्पादक क्षेत्रों में 25 परियोजनाओं में लगभग 50,000 (प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष) रोजगार सृजित होने का अनुमान है।

इस योजना के तहत, सरकार ने गैर-विनियमित क्षेत्र (एनआरएस) लिंकेज नीलामी ढांचे के अंतर्गत "कोयला गैसीकरण की ओर ले जाने वाली सिंथेटिक गैस का उत्पादन" उप-क्षेत्र में कोयला लिंकेज की अवधि को 30 वर्ष तक बढ़ा दिया है, जिससे कोयला गैसीकरण परियोजनाओं में निवेश के लिए दीर्घकालिक नीतिगत निश्चितता सुनिश्चित हो सकेगी।

यह योजना भारत के कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण कार्यक्रम को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे 2030 तक 10 करोड़ टन कोयले के गैसीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और एलएनजी (आयात 50 प्रतिशत से अधिक), यूरिया (आयत करीब 20 प्रतिशत ), अमोनिया (100 प्रतिशत आयातित) और मेथनॉल (80-90 प्रतिशत आयातित) जैसे प्रमुख उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम होगी।

इस योजना का उद्देश्य सिंथेटिक गैस और इसके उत्पादों के उत्पादन के लिए नई कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को प्रोत्साहित करना है, जिसका लक्ष्य लगभग 7 करोड़ टन कोयला/लिग्नाइट का गैसीकरण करना है।

योजना की अन्य विशेषताओं में संयंत्र और मशीनरी की लागत के अधिकतम 20 प्रतिशत तक वित्तीय प्रोत्साहन; परियोजना लागत, कोयला इनपुट और सिंथेटिक गैस आउटपुट को बेंचमार्क करने वाले मूल्यांकन ढांचे के साथ एक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से चयन; और परियोजना के लक्ष्यों से जुड़े चार समान किस्तों में प्रोत्साहन का वितरण शामिल है।

आधिकारिक बयान में कहा गया है, “किसी एक परियोजना के लिए वित्तीय प्रोत्साहन की अधिकतम सीमा 5,000 करोड़ रुपए है; किसी एक उत्पाद (सिंथेटिक प्राकृतिक गैस और यूरिया को छोड़कर) के लिए अधिकतम सीमा 9,000 करोड़ रुपए है; और किसी एक इकाई समूह के लिए सभी परियोजनाओं पर अधिकतम सीमा 12,000 करोड़ रुपए है।”

इस योजना के तहत परिकल्पित 75 मिलियन टन गैसीकरण से कोयला/लिग्नाइट के उपयोग से सालाना 6,300 करोड़ रुपए की आय होने की उम्मीद है, साथ ही जीएसटी और अन्य करों से भी राजस्व प्राप्त होगा।

भारत के पास विश्व के सबसे बड़े कोयला भंडार (401 अरब टन) और लिग्नाइट भंडार (47 अरब टन) में से एक है। देश के ऊर्जा मिश्रण में कोयले का हिस्सा 55 प्रतिशत से अधिक है।

बयान के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में प्रमुख प्रतिस्थापन योग्य उत्पादों - एलएनजी, यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट, अमोनिया, कोकिंग कोल, मेथनॉल, डीएमई और अन्य - के लिए भारत का आयात बिल लगभग 2.77 लाख करोड़ रुपए था।

--आईएएनएस

एबीएस/

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