हर 2 में से 1 कर्मचारी नई नौकरी की तलाश में, कार्यबल में जेन-जी की हिस्सेदारी दोगुनी हुई : रिपोर्ट
नई दिल्ली, 25 अगस्त (आईएएनएस)। भारत के प्रोफेशनल सर्विसेज क्षेत्र में जेन जी की हिस्सेदारी दोगुनी हो गई है, लेकिन कर्मचारियों को बनाए रखने का संकट बढ़ रहा है और हर दो में से एक कर्मचारी नई नौकरी की तलाश में है। यह जानकारी मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।
'ग्रेट प्लेस टू वर्क' की रिपोर्ट में पाया गया कि करीब हर दो में से एक कर्मचारी सक्रिय रूप से नई नौकरी की तलाश कर रहा है, जबकि चार में से तीन कर्मचारी अगले 12 महीनों के भीतर अपनी मौजूदा कंपनी छोड़ने की योजना बना रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कर्मचारियों द्वारा अपनी औपचारिक रूप से तय जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर काम करने की इच्छा लगातार घट रही है, जबकि कार्यस्थल की बुनियादी स्थितियों में सुधार हो रहा है।
कंपनी ने 1.1 लाख से अधिक कर्मचारियों वाले 130 से ज्यादा संगठनों के अध्ययन के बाद कहा, “यह गिरावट दर्शाती है कि कर्मचारी कार्यस्थल की भौतिक या बुनियादी सुविधाओं में मामूली सुधार को तो स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन लंबे समय तक कंपनी के प्रति वफादारी और अतिरिक्त प्रयास के लिए जरूरी व्यापक प्रणालीगत और सांस्कृतिक बदलाव उन्हें अभी तक महसूस नहीं हुए हैं।”
अब जेन जी कुल कार्यबल का 34 प्रतिशत है, जो 2023 में 17 प्रतिशत था। इस पीढ़ी में वेतन, पहचान और पदोन्नति के मानदंडों को लेकर अस्पष्टता के प्रति सहनशीलता कम है और उम्मीदें पूरी नहीं होने पर वे नौकरी छोड़ने में तेजी दिखाते हैं।
ग्रेट प्लेस टू वर्क इंडिया के प्रबंध निदेशक अक्षत शाह ने कहा, “प्रोफेशनल सर्विसेज क्षेत्र के लीडर्स को अपने कर्मचारियों की भागीदारी और उन्हें बनाए रखने के तरीकों को नए सिरे से परिभाषित करना होगा और विविध कार्यबल की व्यक्तिगत अपेक्षाओं के अनुरूप बनाना होगा।”
आंकड़े के अनुसार, 86 प्रतिशत फ्रंटलाइन मैनेजर और सुपरवाइजर सक्रिय रूप से नई नौकरी की तलाश कर रहे हैं, जबकि व्यक्तिगत योगदान देने वाले कर्मचारियों में यह आंकड़ा 53 प्रतिशत है।
रिपोर्ट में कहा गया, “ये मैनेजर पूरे उद्योग के लिए शॉक एब्जॉर्बर की तरह काम कर रहे हैं। वे प्रोजेक्ट पूरा करने का दबाव, ग्राहकों की मांगों और टीम की देखभाल का संयुक्त बोझ उठा रहे हैं, जबकि उनसे यह भी उम्मीद की जाती है कि वे संगठन में होने वाले हर बदलाव को बिना किसी व्यवधान के कर्मचारियों तक पहुंचाएं।”
लगभग 10 में से 6 संगठन अपने रोजमर्रा के कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग कर रहे हैं। हालांकि, केवल 10 में से 2 कर्मचारियों ने पूरी तरह सहमति जताई कि उन्हें इन एआई टूल्स से जुड़े जोखिमों और फायदों के बारे में पर्याप्त जानकारी दी गई है।
--आईएएनएस
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