Google का बड़ा अपडेट! अब 200 से ज्यादा देशों में मिलेगा भूकंप का अलर्ट, आपका Android फोन ऐसे बचा सकता है जान
प्राकृतिक आपदाओं के दौरान समय पर मिलने वाली चेतावनी कई लोगों की जान बचा सकती है। इसी दिशा में टेक दिग्गज Google ने अपने Android Earthquake Alerts System को लेकर बड़ा विस्तार किया है। कंपनी की यह तकनीक अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा देशों और क्षेत्रों में उपलब्ध है। इसकी मदद से Android स्मार्टफोन भूकंप से जुड़ी हलचल को पहचानने और लोगों तक चेतावनी पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।इस सिस्टम की खास बात यह है कि इसके लिए हर जगह अलग से महंगे भूकंप मापने वाले उपकरण लगाना जरूरी नहीं है। Android फोन में मौजूद एक्सेलेरोमीटर सेंसर की मदद से भी भूकंप से जुड़ी शुरुआती गतिविधियों का पता लगाने में सहायता मिलती है। हालांकि, यह सिस्टम भूकंप की भविष्यवाणी नहीं करता, बल्कि भूकंप शुरू होने के बाद उसके झटकों को पहचानकर चेतावनी देने की कोशिश करता है।
200 से ज्यादा देशों तक पहुंचा Google का Earthquake Alerts System
Google ने अपने Android Earthquake Alerts System का दायरा बढ़ाकर 200 से अधिक देशों और क्षेत्रों तक पहुंचा दिया है। इससे पहले यह सेवा करीब 98 देशों में उपलब्ध थी। रिपोर्ट के मुताबिक, पनामा और ग्वाटेमाला जैसे भूकंप के जोखिम वाले देशों को भी इस विस्तार में शामिल किया गया है।
Google के अनुसार, वर्ष 2021 में इस सेवा की शुरुआत के बाद से दुनिया भर के Android यूजर्स को एक अरब से ज्यादा बार भूकंप संबंधी अलर्ट भेजे जा चुके हैं। इस तकनीक का मकसद लोगों को संभावित झटकों से पहले कुछ कीमती सेकंड का समय देना है, ताकि वे खुद को सुरक्षित रखने के लिए तुरंत कदम उठा सकें।
कंपनी के मुताबिक, यह सिस्टम स्मार्टफोन के नेटवर्क का इस्तेमाल करके भूकंप से जुड़ी गतिविधियों का पता लगाने में मदद करता है। हालांकि, अलर्ट की उपलब्धता और उसकी सटीकता भूकंप की स्थिति, फोन की कनेक्टिविटी और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर कर सकती है।
आपका स्मार्टफोन कैसे बन जाता है मिनी सिस्मोमीटर?
आपके मन में भी सवाल उठ सकता है कि आखिर जेब में रखा एक सामान्य स्मार्टफोन भूकंप का पता कैसे लगा सकता है? इसका जवाब फोन में मौजूद एक छोटे से सेंसर में छिपा है, जिसे एक्सेलेरोमीटर (Accelerometer) कहा जाता है।
यह सेंसर फोन की गति और उसकी स्थिति में होने वाले बदलावों को पहचानता है। इसी की मदद से फोन की स्क्रीन अपने आप घूमती है, जब आप मोबाइल को सीधा या आड़ा करते हैं।
Google इसी सेंसर का इस्तेमाल भूकंप से जुड़ी हलचल को पहचानने के लिए करता है। जब जमीन में झटके आते हैं, तो फोन का एक्सेलेरोमीटर उन कंपन से जुड़े संकेतों को दर्ज कर सकता है।
इसके बाद सिस्टम कई Android फोन से मिलने वाले संकेतों का विश्लेषण करता है। यदि किसी इलाके में बड़ी संख्या में फोन एक जैसी गतिविधि दर्ज करते हैं, तो Google का सिस्टम यह अनुमान लगाने की कोशिश करता है कि वहां भूकंप आया है या नहीं और उसका संभावित केंद्र कहां हो सकता है।
भूकंप का अलर्ट कैसे पहुंचता है फोन तक?
Google का यह सिस्टम भूकंप की पहचान के लिए नेटवर्क आधारित तकनीक का इस्तेमाल करता है। इसकी प्रक्रिया को आसान भाषा में समझें:
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फोन कंपन को पहचानता है: एक्सेलेरोमीटर जमीन के झटकों से जुड़ी गतिविधि दर्ज कर सकता है।
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सिग्नल भेजे जाते हैं: संबंधित सेटिंग्स और कनेक्टिविटी उपलब्ध होने पर फोन भूकंप से जुड़े संकेत और अनुमानित स्थान की जानकारी सिस्टम तक पहुंचा सकता है।
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कई फोन के संकेतों का विश्लेषण होता है: सिस्टम अलग-अलग डिवाइस से मिले डेटा के आधार पर भूकंप की संभावना का आकलन करता है।
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यूजर्स को चेतावनी भेजी जाती है: भूकंप की स्थिति और अनुमानित जोखिम के आधार पर प्रभावित क्षेत्र के लोगों तक अलर्ट पहुंचाया जा सकता है।
भूकंप से निकलने वाली अलग-अलग तरंगें अलग-अलग गति से आगे बढ़ती हैं। ऐसे में कुछ परिस्थितियों में नुकसान पहुंचाने वाले तेज झटकों के आने से पहले चेतावनी मिल सकती है। लेकिन हर भूकंप में पर्याप्त समय मिलना जरूरी नहीं है। भूकंप के केंद्र के बेहद करीब मौजूद लोगों को अलर्ट बहुत कम समय पहले मिल सकता है या चेतावनी मिलने से पहले ही झटके शुरू हो सकते हैं।
Google के भूकंप अलर्ट के तीन स्तर क्या हैं?
भूकंप के संभावित खतरे के अनुसार Android पर अलग-अलग तरह की चेतावनियां दिखाई जा सकती हैं। इनके नाम और व्यवहार डिवाइस, Android वर्जन और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकते हैं।
1. Be Aware: सावधान रहें
यह अलर्ट हल्के स्तर के संभावित झटकों की जानकारी देने के लिए होता है। इसके जरिए यूजर को बताया जा सकता है कि उसके आसपास के इलाके में भूकंप से संबंधित गतिविधि हुई है और झटके महसूस हो सकते हैं।
2. Be Ready: तैयार रहें
इस स्तर का अलर्ट अपेक्षाकृत तेज झटकों की आशंका होने पर लोगों को सतर्क करने के लिए दिया जा सकता है। यूजर को भूकंप से जुड़ी जानकारी और सुरक्षित रहने के उपायों पर ध्यान देना चाहिए।
हालांकि, इस अलर्ट के साथ मैप या अतिरिक्त जानकारी दिखने जैसी सुविधाएं हर डिवाइस और क्षेत्र में एक जैसी हों, यह जरूरी नहीं है। किसी नए फीचर के सभी यूजर्स तक पहुंचने की पुष्टि के लिए Google की आधिकारिक जानकारी देखना जरूरी है।
3. Take Action: तुरंत कदम उठाएं
यह सबसे गंभीर स्थिति के लिए इस्तेमाल होने वाली चेतावनी का नाम है। तेज झटकों की आशंका होने पर यूजर को तुरंत सुरक्षा संबंधी कदम उठाने की जरूरत हो सकती है।
कुछ गंभीर अलर्ट सामान्य नोटिफिकेशन की तुलना में ज्यादा ध्यान खींचने वाले हो सकते हैं। हालांकि, अलर्ट का स्क्रीन पर दिखाई देने का तरीका, आवाज और Do Not Disturb मोड पर उसका प्रभाव फोन की सेटिंग्स तथा उपलब्ध सुविधा पर निर्भर करता है।
Android फोन में भूकंप अलर्ट कैसे चालू करें?
अगर आप Android स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं, तो अपने फोन में भूकंप संबंधी अलर्ट की सेटिंग जांच सकते हैं। आमतौर पर इसके लिए ये कदम अपनाएं:
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फोन की Settings खोलें।
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Safety & emergency विकल्प खोजें। कुछ फोन में यह विकल्प दूसरे नाम या मेन्यू में हो सकता है।
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Earthquake alerts पर जाएं।
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यदि यह सुविधा उपलब्ध है, तो इसे चालू कर दें।
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फोन की लोकेशन और इंटरनेट कनेक्टिविटी की सेटिंग भी जांच लें।
कुछ Android डिवाइस में यह विकल्प Location → Location services → Earthquake alerts के अंदर मिल सकता है। मेन्यू का नाम फोन के मॉडल और Android वर्जन के अनुसार बदल सकता है।
ध्यान रखें कि यह सुविधा हर डिवाइस या हर क्षेत्र में उपलब्ध होना जरूरी नहीं है। अलर्ट पाने के लिए फोन का संगत होना और संबंधित सेटिंग्स का सक्रिय होना महत्वपूर्ण है।
भूकंप के समय क्या करें?
फोन पर चेतावनी मिलने या झटके महसूस होने पर केवल मोबाइल अलर्ट पर निर्भर न रहें। अपनी सुरक्षा के लिए तुरंत सही कदम उठाएं।
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अगर आप घर के अंदर हैं, तो जमीन पर झुकें, किसी मजबूत मेज के नीचे शरण लें और सिर व गर्दन को ढकें।
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खिड़कियों, कांच और भारी फर्नीचर से दूर रहें।
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झटके चल रहे हों, तो लिफ्ट का इस्तेमाल न करें।
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अगर आप बाहर हैं, तो इमारतों, बिजली के खंभों और दूसरी संभावित खतरनाक वस्तुओं से दूर खुले स्थान पर जाएं।
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झटके रुकने के बाद स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग के निर्देशों का पालन करें।
क्या Google का यह सिस्टम भूकंप की भविष्यवाणी करता है?
नहीं। यह समझना बेहद जरूरी है कि Google का Android Earthquake Alerts System भूकंप आने से पहले उसकी भविष्यवाणी करने वाला सिस्टम नहीं है। यह भूकंप शुरू होने के बाद फोन और अन्य उपलब्ध संकेतों से उसकी गतिविधि पहचानने की कोशिश करता है।कुछ स्थितियों में तेज झटकों के पहुंचने से पहले अलर्ट मिल सकता है, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है। इसलिए इसे सुरक्षा के लिए एक अतिरिक्त माध्यम समझना चाहिए, न कि आपदा से बचाव की एकमात्र व्यवस्था।
कुल मिलाकर, Google की यह तकनीक स्मार्टफोन को आपदा संबंधी चेतावनी के नेटवर्क का हिस्सा बनाती है। अगर समय पर अलर्ट मिल जाए, तो लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचने या खुद को बचाने के लिए कुछ अहम सेकंड मिल सकते हैं। यही कुछ सेकंड आपात स्थिति में बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

