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Cyber Security: OTP या Passkey, ऑनलाइन अकाउंट की सुरक्षा के लिए कौन-सा तरीका है बेहतर?

Cyber Security: OTP या Passkey, ऑनलाइन अकाउंट की सुरक्षा के लिए कौन-सा तरीका है बेहतर?

आज के डिजिटल दौर में ईमेल, सोशल मीडिया, बैंकिंग और दूसरे ऑनलाइन अकाउंट में लॉगिन करने के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। पहले जहां यूजर्स को पासवर्ड याद रखने पड़ते थे, वहीं अब OTP और Passkey जैसे विकल्प भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य लॉगिन की प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ अकाउंट की सुरक्षा मजबूत करना है।

हालांकि, दोनों तरीकों के काम करने का तरीका अलग है। साइबर अपराधी फिशिंग और दूसरी तकनीकों के जरिए लोगों की लॉगिन जानकारी चुराने की कोशिश करते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि OTP और Passkey में क्या अंतर है और ऑनलाइन अकाउंट को सुरक्षित रखने के लिए किस विकल्प को प्राथमिकता देनी चाहिए।

OTP कैसे करता है काम?

OTP यानी वन टाइम पासवर्ड एक अस्थायी कोड होता है, जिसका इस्तेमाल लॉगिन या किसी ट्रांजैक्शन की पुष्टि के लिए किया जाता है। यह कोड आमतौर पर SMS, ईमेल या ऑथेंटिकेटर ऐप के जरिए मिलता है। कई सेवाओं में OTP का इस्तेमाल पासवर्ड के साथ सुरक्षा की अतिरिक्त परत के तौर पर भी किया जाता है।

हालांकि, OTP पूरी तरह जोखिम-मुक्त नहीं है। अगर कोई यूजर किसी फर्जी वेबसाइट पर अपना कोड दर्ज कर देता है, तो साइबर अपराधी उसका फायदा उठाकर असली अकाउंट में लॉगिन करने की कोशिश कर सकते हैं। SMS के जरिए मिलने वाले OTP पर SIM स्वैपिंग और मोबाइल नेटवर्क से जुड़ी कमजोरियों का भी असर पड़ सकता है।

इसलिए OTP मिलने पर उसे किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए और किसी अनजान लिंक पर लॉगिन जानकारी दर्ज करने से बचना चाहिए।

Passkey क्या है और कैसे काम करती है?

Passkey पासवर्ड के बिना लॉगिन करने की आधुनिक तकनीक है। इसमें यूजर फिंगरप्रिंट, फेस रिकग्निशन या डिवाइस PIN के जरिए अपनी पहचान की पुष्टि कर सकता है। Apple, Google और Microsoft जैसे प्रमुख टेक प्लेटफॉर्म पर Passkey का सपोर्ट उपलब्ध है।

Passkey बनाते समय दो क्रिप्टोग्राफिक की तैयार होती हैं। इनमें पब्लिक की संबंधित वेबसाइट या सेवा के पास रहती है, जबकि प्राइवेट की यूजर के डिवाइस या सुरक्षित सिंक सिस्टम में रहती है। लॉगिन के दौरान इसी व्यवस्था के जरिए पहचान की पुष्टि होती है।

इस तकनीक की खासियत यह है कि यूजर को वेबसाइट पर पासवर्ड या OTP टाइप करने की जरूरत नहीं पड़ती। Passkey वेबसाइट और डोमेन से जुड़ी होती है, इसलिए किसी नकली वेबसाइट पर इसका इस्तेमाल कर असली वेबसाइट में लॉगिन करना सामान्य फिशिंग तरीकों की तुलना में काफी मुश्किल होता है।

OTP और Passkey में क्या है अंतर?

OTP में यूजर को प्राप्त कोड दर्ज करना पड़ता है, जबकि Passkey में डिवाइस पर पहचान की पुष्टि करके लॉगिन किया जाता है। OTP को धोखे से हासिल किया जा सकता है, लेकिन Passkey की तकनीक इस तरह की फिशिंग के खिलाफ बेहतर सुरक्षा देती है।

दोनों तरीकों के बीच प्रमुख अंतर इस प्रकार हैं:

  • लॉगिन का तरीका: OTP में कोड दर्ज करना होता है, जबकि Passkey में फिंगरप्रिंट, फेस रिकग्निशन या डिवाइस PIN से पुष्टि की जा सकती है।
  • फिशिंग से सुरक्षा: OTP फर्जी वेबसाइट पर दर्ज करने से जोखिम में पड़ सकता है। Passkey डोमेन से जुड़ी होने के कारण फिशिंग के खिलाफ अधिक मजबूत सुरक्षा देती है।
  • इंटरनेट और नेटवर्क: SMS OTP के लिए मोबाइल नेटवर्क जरूरी हो सकता है। Passkey में SMS कोड का इंतजार नहीं करना पड़ता, हालांकि डिवाइस और सेवा के अनुसार इंटरनेट या सिंक की जरूरत हो सकती है।
  • डिवाइस खोने की स्थिति: Passkey वाले डिवाइस के खोने पर अकाउंट रिकवरी के लिए बैकअप डिवाइस, सिंक सुविधा या वैकल्पिक रिकवरी तरीका काम आ सकता है।

ऑनलाइन अकाउंट को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें?

डिजिटल अकाउंट की सुरक्षा बढ़ाने के लिए कुछ सावधानियां अपनाना जरूरी है।

  1. Passkey उपलब्ध हो तो इस्तेमाल करें: खासकर उन अकाउंट में जहां व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी मौजूद है।
  2. OTP किसी से साझा न करें: बैंक या दूसरी सेवाओं के नाम पर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे कोड मांग सकता है। ऐसे अनुरोधों से सावधान रहें।
  3. लिंक की जांच करें: लॉगिन करने से पहले वेबसाइट का सही डोमेन जरूर देखें।
  4. रिकवरी विकल्प सुरक्षित रखें: बैकअप ईमेल, फोन नंबर और अन्य रिकवरी तरीकों को अपडेट रखें।
  5. डिवाइस सुरक्षित रखें: मोबाइल और लैपटॉप पर स्क्रीन लॉक लगाएं तथा सॉफ्टवेयर अपडेट करते रहें।

ऑनलाइन सुरक्षा के लिए कौन-सा विकल्प चुनें?

फिशिंग से बचाव के लिहाज से Passkey आमतौर पर SMS OTP से बेहतर विकल्प है। इसकी वजह यह है कि इसमें कोड को किसी वेबसाइट पर दर्ज करने की जरूरत नहीं होती और इसकी तकनीक फर्जी वेबसाइट पर लॉगिन के जोखिम को कम करती है।

हालांकि, सुरक्षा केवल लॉगिन के तरीके पर निर्भर नहीं करती। डिवाइस की सुरक्षा, अकाउंट रिकवरी की व्यवस्था और यूजर की सावधानी भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए जहां Passkey उपलब्ध हो, वहां इसे प्राथमिकता दें और अन्य अकाउंट के लिए मजबूत पासवर्ड तथा भरोसेमंद मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करें।

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