साइकिल से चलते हैं, गांव में बनाया ऑफिस, कंपनी 8,000 करोड़ की, श्रीधर वेम्बू की कहानी सुन हैरान रह जाते हैं लोग
भारत में इस वक्त स्वदेशी इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप Arattai की खूब चर्चा हो रही है। WhatsApp जैसे फीचर्स से लैस यह ऐप लॉन्च होते ही लोगों के बीच लोकप्रिय हो गया और देखते ही देखते ऐप स्टोर पर टॉप पर पहुंच गया। लेकिन इस ऐप के पीछे जिस शख्सियत का नाम है, उनकी लाइफस्टाइल किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। हम बात कर रहे हैं जोहो कॉर्पोरेशन के फाउंडर और अरबपति एंटरप्रेन्योर श्रीधर वेम्बु की, जिनकी नेटवर्थ आज करीब 5.8 अरब डॉलर (करीब ₹8,850 करोड़) आंकी जाती है। इसके बावजूद वे सादगी और जमीन से जुड़ा जीवन जीते हैं और आज भी गांव की पगडंडियों पर साइकिल से घूमते नजर आते हैं।
आईआईटी से अमेरिका और फिर उद्यमिता की ओर
श्रीधर वेम्बु का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने 1989 में आईआईटी मद्रास से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद अमेरिका की प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री हासिल की। उच्च शिक्षा के बाद उन्होंने अमेरिकी कंपनी क्वालकॉम में सिस्टम डिजाइन इंजीनियर के तौर पर नौकरी शुरू की। हालांकि, कॉर्पोरेट नौकरी उन्हें रास नहीं आई और उन्होंने खुद का कुछ बड़ा करने का सपना देखा।
जोहो कॉर्प की नींव और विशालकाय सफलता
90 के दशक में, श्रीधर वेम्बु ने अपने परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर AdventNet की शुरुआत की, जो आगे चलकर आज की दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनी जोहो कॉर्प बन गई। आज जोहो को भारत की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनियों में गिना जाता है, जो दुनिया भर में लाखों ग्राहकों को क्लाउड सेवाएं दे रही है। कंपनी की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जोहो ने 2023-24 में करीब ₹8,703 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दर्ज किया और कंपनी का वैल्यूएशन ₹1.04 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।
अरबों की संपत्ति, गांव में ठिकाना
फोर्ब्स की 2024 की इंडिया टॉप-100 बिलिनियर्स लिस्ट में श्रीधर वेम्बु 51वें पायदान पर थे। उनकी संपत्ति साल-दर-साल तेजी से बढ़ी है—जहां 2018 में उनकी नेटवर्थ $1.6 बिलियन थी, वहीं 2024 में यह $5 बिलियन से अधिक हो गई। संपत्ति में इस अभूतपूर्व वृद्धि के बावजूद, वेम्बु ने भव्य शहरों की भागमभाग को छोड़कर, तमिलनाडु के तेनकाशी और तंजावुर जैसे गांवों को अपना ठिकाना बनाया है। वे अक्सर लोकल ट्रिप के लिए साइकिल का ही इस्तेमाल करते हैं। यही वजह है कि अरबपति होने के बावजूद उनकी छवि एक सादगीप्रिय और जमीन से जुड़े इंसान की बनी हुई है।
आईपीओ पर वेम्बु का स्पष्ट रुख
Arattai की सफलता के बाद जब जोहो के आईपीओ (IPO) को लेकर बाजार में अटकलें तेज हुईं, तो श्रीधर वेम्बु ने इन अटकलों को शांत करते हुए कहा कि कंपनी फिलहाल शेयर बाजार में उतरने की जल्दी में नहीं है। उनका मानना है कि जोहो के कई इनोवेटिव प्रोजेक्ट्स बिना किसी बाहरी दबाव के संभव हुए हैं, और कंपनी की यही स्वतंत्रता उसकी असली ताकत है।

