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Apple iOS 18: iPhone यूजर्स की शिकायतों के बाद CCPA ने बढ़ाई जांच, ₹27,900 रिपेयर बिल पर उठे सवाल
 

Apple iOS 18: iPhone यूजर्स की शिकायतों के बाद CCPA ने बढ़ाई जांच, ₹27,900 रिपेयर बिल पर उठे सवाल

Apple के iOS 18 अपडेट को लेकर भारत में कंपनी की सॉफ्टवेयर वारंटी और रिपेयर पॉलिसी जांच के दायरे में आ गई है. Central Consumer Protection Authority (CCPA) ने iOS 18 से जुड़ी शिकायतों की विस्तृत जांच के लिए मामला अपनी Investigation Wing को भेजा है. शिकायतों में कुछ iPhone यूजर्स ने अपडेट के बाद डिस्प्ले, माइक्रोफोन और दूसरी कार्यक्षमताओं में परेशानी आने की बात कही है.
हालांकि, अभी यह साबित नहीं हुआ है कि सभी शिकायतों में आई खराबियों की वजह iOS 18 ही थी. यही कारण है कि जांच में तकनीकी कारणों के साथ-साथ Apple की वारंटी शर्तों और रिपेयर चार्ज की भी पड़ताल की जा रही है.

75 शिकायतों के बाद बढ़ी जांच
रिपोर्ट के मुताबिक, CCPA के मामले में 75 शिकायतें शामिल हैं. इनमें कुछ यूजर्स ने iOS 18 अपडेट के बाद स्क्रीन पर ग्रीन, पिंक और व्हाइट लाइन, माइक्रोफोन से जुड़ी समस्या, कॉल संबंधी दिक्कत, स्क्रीन फ्रीज होने और अन्य परेशानियों की शिकायत की.
रेगुलेटर इस बात की जांच कर रहा है कि अगर किसी कंपनी के सॉफ्टवेयर अपडेट के बाद डिवाइस में कोई समस्या सामने आती है, तो ऐसी स्थिति में रिपेयर का खर्च ग्राहक से लेना उपभोक्ता अधिकारों के अनुरूप है या नहीं.
iPhone 15 की स्क्रीन रिपेयर का खर्च करीब ₹27,900
इस मामले में रिपेयर की लागत को लेकर भी सवाल उठे हैं. रिपोर्ट में iPhone 15 की स्क्रीन रिप्लेसमेंट का अनुमानित खर्च करीब ₹27,900 बताया गया है. CCPA की चिंता इस बात को लेकर है कि अगर किसी समस्या का संबंध कंपनी के सॉफ्टवेयर अपडेट से साबित होता है, तो ऐसे रिपेयर का वित्तीय बोझ किस पर होना चाहिए.
हालांकि, यह रकम एक उदाहरण के तौर पर सामने आई है और इसका मतलब यह नहीं है कि हर प्रभावित iPhone यूजर से इतनी ही राशि ली गई.
Apple की सॉफ्टवेयर वारंटी भी जांच के केंद्र में
मामले का एक अहम हिस्सा Apple की सॉफ्टवेयर लाइसेंस शर्तें हैं. रिपोर्ट के अनुसार, Apple का सॉफ्टवेयर लाइसेंस सॉफ्टवेयर को व्यापक वारंटी के बिना उपलब्ध कराए जाने की बात करता है, जबकि कंपनी की सीमित वारंटी मुख्य रूप से हार्डवेयर को कवर करती है.
अब CCPA यह देख रहा है कि ऐसी शर्तों का इस्तेमाल उन परिस्थितियों में कैसे किया जाना चाहिए, जहां ग्राहक किसी सॉफ्टवेयर अपडेट के बाद डिवाइस में खराबी की शिकायत करता है.
Apple ने आरोपों पर क्या कहा?
Apple ने जांच में लगाए गए आरोपों को स्वीकार नहीं किया है. कंपनी के मुताबिक iOS 18 को रिलीज करने से पहले इसकी कड़ी टेस्टिंग की गई थी और भारत में उसे सॉफ्टवेयर में किसी सिस्टम-वाइड समस्या या सुरक्षा संबंधी चिंता का पता नहीं चला.
Apple ने यह भी कहा कि सॉफ्टवेयर वारंटी से जुड़ी शर्तें इंस्टॉलेशन से पहले यूजर्स के सामने रखी जाती हैं और सॉफ्टवेयर के लिए ऐसी वारंटी व्यवस्था इंडस्ट्री में असामान्य नहीं है. कंपनी ने Sony और Samsung जैसी कंपनियों की शर्तों का भी हवाला दिया.


जून 2026 तक सिर्फ 11 फीसदी iPhone पर iOS 18
Apple ने CCPA के मामले में शिकायतों की संख्या और iOS 18 के इस्तेमाल से जुड़े आंकड़े भी सामने रखे. कंपनी के अनुसार, जून 2026 तक करीब 11 फीसदी iPhone ही iOS 18 पर चल रहे थे. Apple ने इसी आधार पर जांच में शामिल शिकायतों के दायरे को भी रेखांकित किया है.
हालांकि, यह आंकड़ा अपने आप में यह साबित नहीं करता कि iOS 18 से जुड़ी शिकायतें सही हैं या गलत. जांच का मुख्य सवाल यही रहेगा कि जिन डिवाइस में समस्या आई, उनमें खराबी और सॉफ्टवेयर अपडेट के बीच तकनीकी संबंध था या नहीं.
अभी Apple के खिलाफ कोई अंतिम फैसला नहीं
फिलहाल CCPA की कार्रवाई जांच के चरण में है. इसका मतलब यह नहीं है कि रेगुलेटर ने Apple को उपभोक्ता कानून का उल्लंघन करने का दोषी ठहरा दिया है. जांच में शिकायतों, Apple की प्रतिक्रिया, वारंटी शर्तों और तकनीकी साक्ष्यों की समीक्षा की जाएगी.
आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी. इसलिए फिलहाल इस मामले का सबसे अहम सवाल यही है कि iOS 18 अपडेट और कथित हार्डवेयर समस्याओं के बीच वास्तविक तकनीकी संबंध क्या था और ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं से लिया गया रिपेयर खर्च भारतीय उपभोक्ता कानून के तहत उचित माना जाएगा या नहीं.

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